MOVCDNER Scheme: भारत में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब किसान केवल अधिक उत्पादन पर नहीं बल्कि बेहतर गुणवत्ता, कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाली खेती पर ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि देश में Organic Farming यानी जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बढ़ती हेल्थ अवेयरनेस और रसायन मुक्त खाद्य पदार्थों की मांग ने किसानों के लिए जैविक खेती को एक बड़ा अवसर बना दिया है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने Mission Organic Value Chain Development for North Eastern Region (MOVCDNER) यानी मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट योजना शुरू की।
यह योजना खासतौर पर पूर्वोत्तर भारत के किसानों को जैविक खेती से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई है। सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक रूप से कम रासायनिक खेती होने के कारण यहां ऑर्गेनिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यही कारण है कि इस योजना के तहत किसानों को उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक पूरी सहायता दी जाती है।
आज Organic Farming केवल एक खेती पद्धति नहीं बल्कि एक profitable agriculture business model बन चुका है। देश और विदेश में Organic Vegetables, Organic Rice, Organic Spices और Organic Fruits की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट किसानों के लिए बड़ा अवसर साबित हो रहा है।
मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट योजना क्या है?
Mission Organic Value Chain Development for North Eastern Region (MOVCDNER) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत किसानों के समूह बनाए जाते हैं और उन्हें क्लस्टर आधारित जैविक खेती से जोड़ा जाता है। किसानों को Organic Certification, Training, Seed Support, Processing Units और Marketing सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकार का लक्ष्य केवल खेती कराना नहीं बल्कि किसानों के उत्पाद को सही कीमत दिलाना भी है। यही वजह है कि इस योजना में Value Chain Development पर खास ध्यान दिया गया है।
योजना की शुरुआत कैसे हुई?
भारत सरकार ने वर्ष 2015-16 में इस योजना की शुरुआत की थी। शुरुआत में यह योजना पूर्वोत्तर राज्यों पर केंद्रित रखी गई क्योंकि इन राज्यों में पारंपरिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग काफी कम होता है।
पूर्वोत्तर भारत के किसान लंबे समय से प्राकृतिक खेती करते आ रहे थे लेकिन उन्हें मार्केटिंग और प्रमाणन की सुविधाएं नहीं मिल रही थीं। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने MOVCDNER योजना शुरू की।
इस योजना को National Mission for Sustainable Agriculture (NMSA) के तहत लागू किया गया। योजना का उद्देश्य था कि किसान केवल जैविक उत्पादन तक सीमित न रहें बल्कि अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा सकें।
योजना का मुख्य उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है। इसके अलावा योजना के अन्य उद्देश्य भी हैं:
- रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना
- किसानों को ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराना
- जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग
- गांव स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट विकसित करना
- किसानों को निर्यात बाजार से जोड़ना
- मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण
कौन-कौन से राज्य इस योजना का लाभ उठा सकते हैं?
यह योजना मुख्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए बनाई गई है। इनमें शामिल हैं:
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मणिपुर
- मेघालय
- मिजोरम
- नागालैंड
- सिक्किम
- त्रिपुरा
इन राज्यों में किसान समूह बनाकर इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
किसानों को इस योजना से क्या फायदा मिलता है?
जैविक खेती के लिए वित्तीय सहायता
सरकार किसानों को Organic Farming अपनाने के लिए आर्थिक सहायता देती है। इसमें जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, बीज और प्रशिक्षण शामिल हैं।
Organic Certification की सुविधा
जैविक उत्पाद बेचने के लिए Certification जरूरी होता है। इस योजना के तहत किसानों को PGS और Third Party Certification की सुविधा मिलती है।
बेहतर बाजार और ब्रांडिंग
किसानों के उत्पादों को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। सरकार Organic Brands विकसित करने में भी मदद करती है।
प्रोसेसिंग यूनिट और स्टोरेज
कई किसानों को फसल बेचने में दिक्कत होती है क्योंकि उनके पास प्रोसेसिंग और स्टोरेज की सुविधा नहीं होती। इस योजना में सरकार इन सुविधाओं को विकसित करने में सहायता देती है।
निर्यात के अवसर
आज दुनिया भर में Organic Products की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस योजना के तहत किसानों को Export Market से जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।
किसान इस योजना का फायदा कैसे उठाएं?
यदि किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें समूह आधारित खेती मॉडल अपनाना होगा। सामान्यतः 50 या उससे अधिक किसानों का क्लस्टर बनाया जाता है।
इसके बाद किसान निम्न तरीके से योजना का लाभ उठा सकते हैं:
- अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें
- किसान उत्पादक संगठन (FPO) या Farmer Group से जुड़ें
- जैविक खेती प्रशिक्षण लें
- क्लस्टर पंजीकरण करवाएं
- Organic Certification प्रक्रिया पूरी करें
योजना की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
इस योजना में आवेदन की प्रक्रिया राज्य कृषि विभाग के माध्यम से की जाती है। अलग-अलग राज्यों में आवेदन प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
Step 1: किसान समूह बनाना
सबसे पहले किसानों का क्लस्टर बनाया जाता है।
Step 2: आवेदन जमा करना
किसान या FPO कृषि विभाग में आवेदन करता है।
Step 3: दस्तावेज सत्यापन
संबंधित अधिकारी किसानों के दस्तावेज और जमीन की जांच करते हैं।
Step 4: प्रशिक्षण और मंजूरी
किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर योजना की मंजूरी दी जाती है।
योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
किसानों के पास निम्न दस्तावेज होने जरूरी हैं:
- आधार कार्ड
- पहचान पत्र
- बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर
- भूमि रिकॉर्ड
- पासपोर्ट साइज फोटो
- किसान पंजीकरण प्रमाण पत्र
- FPO या किसान समूह का विवरण
पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?
पिछले कुछ वर्षों में इस योजना के तहत हजारों किसानों को लाभ मिला है। पूर्वोत्तर राज्यों में लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को Organic Farming के तहत लाया गया है।
सरकार के अनुसार:
- हजारों किसान समूह बनाए गए
- जैविक उत्पादन में वृद्धि हुई
- किसानों की आय में सुधार देखा गया
- Organic Export बढ़ा
- कई राज्यों में Organic Branding मजबूत हुई
विशेष रूप से सिक्किम पहले ही पूरी तरह Organic State बन चुका है, जिससे दूसरे राज्यों को भी प्रेरणा मिली है।
जैविक खेती क्यों बन रही है भविष्य की खेती?
आज लोग Chemical Free Food को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि Organic Vegetables, Organic Tea, Organic Spices और Organic Fruits की मांग लगातार बढ़ रही है।
जैविक खेती के कई फायदे हैं:
- मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
- पानी की बचत होती है
- उत्पादन लागत घटती है
- पर्यावरण सुरक्षित रहता है
- किसानों को बेहतर दाम मिलता है
Organic Farming में किन फसलों की ज्यादा मांग है?
आज बाजार में कई जैविक फसलों की मांग तेजी से बढ़ रही है:
- हल्दी
- अदरक
- काली मिर्च
- चाय
- बासमती चावल
- फल और सब्जियां
- दालें
- मसाले
पूर्वोत्तर राज्यों में विशेष रूप से Organic Spices और Organic Tea की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ रही है।
योजना से FPO को कैसे फायदा मिल रहा है?
Farmer Producer Organizations यानी FPO इस योजना का बड़ा हिस्सा हैं। सरकार FPO के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने का काम करती है।
FPO के फायदे:
- सामूहिक खरीद और बिक्री
- बेहतर मोलभाव
- कम लागत
- बड़ी कंपनियों से सीधा संपर्क
- प्रोसेसिंग और पैकेजिंग सुविधा
किसानों के लिए जैविक खेती में जरूरी सावधानियां
जैविक खेती में सफलता के लिए किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बंद करें
- गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट का इस्तेमाल करें
- फसल चक्र अपनाएं
- जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें
- खेत की नियमित निगरानी करें
सरकार का भविष्य का लक्ष्य
सरकार आने वाले वर्षों में Organic Farming को और बढ़ावा देना चाहती है। कई राज्यों में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को जोड़कर नई योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
सरकार का लक्ष्य है:
- किसानों की आय बढ़ाना
- निर्यात बढ़ाना
- रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देना
- गांव स्तर पर रोजगार बढ़ाना
क्या यह योजना किसानों के लिए फायदेमंद है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकती है। हालांकि शुरुआत में किसानों को धैर्य रखना पड़ता है क्योंकि जैविक खेती में उत्पादन स्थिर होने में समय लगता है।
लेकिन लंबे समय में:
- लागत कम होती है
- मिट्टी बेहतर होती है
- उत्पाद की कीमत अधिक मिलती है
- निर्यात के अवसर बढ़ते हैं
निष्कर्ष
Mission Organic Value Chain Development योजना पूर्वोत्तर भारत के किसानों के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरी है। यह योजना केवल खेती तक सीमित नहीं है बल्कि किसानों को उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक पूरी सहायता देती है।
आज जब दुनिया Organic Food की तरफ तेजी से बढ़ रही है, तब भारत के किसानों के लिए यह सही समय है कि वे जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। सरकार की यह योजना किसानों को बेहतर आय, सुरक्षित खेती और स्थायी कृषि मॉडल देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।यदि किसान सही प्रशिक्षण, सही तकनीक और सरकारी सहायता का सही उपयोग करें तो Organic Farming आने वाले समय में खेती की तस्वीर बदल सकती है।


