भारत के औद्योगिक विकास और आर्थिक मजबूती में स्पेशलिटी केमिकल्स सेक्टर की बढ़ती भूमिका को लेकर राजधानी नई दिल्ली में ASSOCHAM Speciality Chemicals Conclave 2026 का आयोजन किया गया। “Speciality Chemicals for Economic Growth & Job Creation” थीम पर आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में उद्योग जगत के दिग्गजों, सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने भारत के केमिकल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की रणनीतियों पर गहन चर्चा की।
इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारत के स्पेशलिटी केमिकल्स उद्योग को नई दिशा देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, विनिर्माण क्षमता मजबूत करना तथा वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और बेहतर बनाना रहा। कार्यक्रम में उद्योग से जुड़े कई बड़े नामों ने हिस्सा लिया और सरकार तथा निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ASSOCHAM National Council on Chemicals & Petrochemicals के चेयरमैन सागर कौशिक के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद परिषद के सह-अध्यक्ष कपिल मल्होत्रा और निलेश ए. कुलकर्णी ने भारतीय केमिकल उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन के साथ-साथ एक विशेष नॉलेज रिपोर्ट भी जारी की गई। इस दौरान भारत सरकार के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के सचिव तेजवीर सिंह (IAS) ने बतौर मुख्य अतिथि उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र में वैश्विक व्यापार पर बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और उनके भारतीय केमिकल उद्योग पर प्रभाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच भारतीय कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और लचीला बनाना होगा। साथ ही, अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के प्रभाव, निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं तथा व्यापारिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारतीय उद्योगों को तैयार रहने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि भारत अब केवल “कम लागत वाले विकल्प” के रूप में नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर “पसंदीदा स्पेशलिटी केमिकल्स पार्टनर” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसके लिए गुणवत्ता, नियामकीय अनुपालन (Compliance), निर्यात मानकों और MSME इकाइयों की प्रमाणन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में केमिकल पार्क्स को भारत के औद्योगिक विकास का नया इंजन बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में केमिकल पार्क्स की अवधारणा अभी तक अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई है, जिसका मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण की समस्याएं, आधारभूत संरचना की कमी और पर्यावरणीय स्वीकृतियों में देरी रही है। हालांकि, केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार द्वारा तीन समर्पित केमिकल पार्क्स के विकास के लिए 600 करोड़ रुपये की घोषणा को उद्योग के लिए सकारात्मक कदम माना गया।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि गुजरात जैसे पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर देश के अन्य हिस्सों में भी एकीकृत केमिकल इकोसिस्टम विकसित किए जाने चाहिए। ऊर्जा प्रबंधन, फीडस्टॉक एकीकरण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पहलुओं पर भी गहन चर्चा हुई, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
सम्मेलन का तीसरा सत्र ग्रीन केमिकल्स, इनोवेशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर केंद्रित रहा। विशेषज्ञों ने माना कि भारत के केमिकल उद्योग में अनुसंधान और नवाचार को और मजबूत करने की जरूरत है। खासतौर पर उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया ताकि अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर व्यावसायिक उपयोग तक पहुंच सके।
ग्रीन केमिस्ट्री, डीकार्बोनाइजेशन, ग्रीन हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकों को भविष्य के टिकाऊ औद्योगिक विकास का आधार बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि भारत समय रहते इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाता है, तो वह वैश्विक ग्रीन केमिकल मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
कॉन्क्लेव के अंतिम सत्र में नई पीढ़ी के केमिकल्स (New Age Chemicals) पर चर्चा हुई, जिसमें सेमीकंडक्टर केमिकल्स, बैटरी मैटेरियल्स, इलेक्ट्रॉनिक केमिकल्स और फार्मा इंटरमीडिएट्स को भारत के लिए बड़े अवसरों वाला क्षेत्र बताया गया। विशेषज्ञों ने माना कि आने वाले दशक में यही सेक्टर भारत की औद्योगिक प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई दिशा देंगे। साथ ही, AI और केमिस्ट्री के संयोजन को उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव का माध्यम बताया गया।
कुल मिलाकर, ASSOCHAM Speciality Chemicals Conclave 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सरकार, उद्योग और शोध संस्थान मिलकर काम करें, तो भारत का स्पेशलिटी केमिकल्स सेक्टर न केवल अर्थव्यवस्था को गति देगा बल्कि लाखों नए रोजगार सृजित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने की दिशा में मजबूत आधार साबित हो सकता है।


