देश में इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) अभियान ने नया मोड़ ले लिया है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अभियान से जुड़े अकाउंट के भारत में ब्लॉक होने के दावे के बाद यह मुद्दा और ज्यादा वायरल हो गया। अकाउंट बैन होने के कुछ ही घंटों बाद नया हैंडल “Cockroach Is Back” नाम से शुरू किया गया, जिसने तेजी से लाखों युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
यह पूरा अभियान शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन ट्रेंड के रूप में सामने आया था, लेकिन अब यह युवाओं की नाराजगी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया की ताकत को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है। इंस्टाग्राम और एक्स पर इस अभियान को भारी समर्थन मिल रहा है और बड़ी संख्या में युवा इससे जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।
अकाउंट बैन होने के बाद बढ़ी चर्चा
अभियान से जुड़े लोगों का दावा है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का पुराना एक्स अकाउंट भारत में दिखाई देना बंद हो गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर #CockroachIsBack तेजी से ट्रेंड करने लगा। नया अकाउंट बनते ही कुछ ही घंटों में हजारों लोगों ने उसे फॉलो करना शुरू कर दिया।
नए हैंडल के बायो में लिखा गया — “Cockroaches Don’t Die” यानी “कॉकरोच मरते नहीं”। यह लाइन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और युवाओं के बीच प्रतीकात्मक नारे के रूप में इस्तेमाल होने लगी।
सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अकाउंट ब्लॉक होने के बाद इस अभियान को और ज्यादा लोकप्रियता मिली। कई लोगों ने इसे डिजिटल अभिव्यक्ति पर कार्रवाई के रूप में देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसे केवल इंटरनेट ट्रेंड बताया।
कैसे शुरू हुआ यह अभियान?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। सोशल मीडिया पर वायरल हुई रिपोर्टों में दावा किया गया कि युवाओं और व्यवस्था की आलोचना को लेकर दिए गए बयान के बाद कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की।
इसके बाद अभिजीत दीपके नाम के डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और एक्टिविस्ट ने व्यंग्यात्मक अंदाज में “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से ऑनलाइन अभियान शुरू किया। देखते ही देखते यह अभियान मीम, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए वायरल हो गया।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं की आवाज को मंच देना है। उन्होंने दावा किया कि अकाउंट को पहले हैक करने की कोशिश हुई और बाद में एक्स पर उसे ब्लॉक कर दिया गया।
हालांकि, इस संबंध में एक्स प्लेटफॉर्म की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इंस्टाग्राम पर करोड़ों फॉलोअर्स
इस अभियान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुछ ही दिनों में यह संख्या करोड़ों तक पहुंच गई।
युवाओं के बीच इस अभियान को लेकर भारी उत्सुकता दिखाई दी। कई यूजर्स ने इसे “युवाओं की डिजिटल आवाज” बताया, जबकि कुछ ने इसे मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ व्यंग्यात्मक विरोध का तरीका कहा।
इंटरनेट पर इस अभियान से जुड़े मीम, पोस्टर और वीडियो बड़ी संख्या में शेयर किए जा रहे हैं। खासकर “कॉकरोच इज बैक” स्लोगन सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुआ।
राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं
इस पूरे विवाद पर कई राजनीतिक नेताओं और विश्लेषकों ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर कहा कि लोकतंत्र में असहमति, व्यंग्य और युवाओं की भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए जगह होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने कहा कि इस तरह के अभियान केवल मजाक नहीं होते, बल्कि समाज के भीतर मौजूद बेचैनी और असंतोष को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, युवाओं के बीच बढ़ती निराशा सोशल मीडिया के जरिए नए रूप में सामने आ रही है।
तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने अकाउंट ब्लॉक होने को लेकर चिंता जताई और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं का इस तरह के ऑनलाइन आंदोलन से जुड़ना यह संकेत देता है कि वे पारंपरिक राजनीतिक दलों से दूरी महसूस कर रहे हैं।
सोशल मीडिया और नई डिजिटल राजनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का मंच नहीं रह गया है। आज की युवा पीढ़ी मीम, वीडियो और डिजिटल अभियानों के जरिए अपनी बात ज्यादा प्रभावी ढंग से रख रही है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इसी बदलते डिजिटल माहौल का उदाहरण बनकर सामने आई है। शुरुआत में इसे एक इंटरनेट मीम समझा गया, लेकिन अकाउंट बैन होने के बाद यह मुद्दा और तेजी से वायरल हो गया।
सोशल मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि इंटरनेट पर किसी अभियान को रोकने की कोशिश कई बार उसे और ज्यादा लोकप्रिय बना देती है। यही वजह है कि नया अकाउंट शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग उससे जुड़ गए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस
इस मामले के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि यदि कोई ऑनलाइन अभियान हिंसा या नफरत नहीं फैला रहा, तो उसे अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए।
वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नियमों के अनुसार काम करना होता है और किसी भी कंटेंट पर कार्रवाई उनके आंतरिक दिशानिर्देशों के तहत की जा सकती है।
फिलहाल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले अभियानों में से एक बन चुकी है। अकाउंट बैन होने और नए हैंडल के लॉन्च ने इसे और अधिक वायरल बना दिया है।
युवाओं के गुस्से और व्यंग्य का डिजिटल रूप
यह अभियान दिखाता है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी नाराजगी और विचारों को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का किस तरह इस्तेमाल कर रही है। इंटरनेट की दुनिया में मीम और व्यंग्य अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संवाद का हिस्सा बन चुके हैं।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भविष्य में किस दिशा में जाएगी, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि इसने डिजिटल राजनीति, युवाओं की भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।


