मिलेट्स यानी श्री अन्न को देश और दुनिया में तेजी से बढ़ती पहचान के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को हैदराबाद स्थित आईसीएआर-भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR), राजेंद्रनगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मिलेट्स (श्री अन्न) के अंतर्गत चल रही अनुसंधान गतिविधियों, तकनीकी नवाचारों, उद्यमिता विकास कार्यक्रमों और किसानों के लिए संचालित पहलों की विस्तृत समीक्षा की।
श्री चौहान का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मिलेट्स को पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि प्रणाली के लिए भविष्य की फसल माना जा रहा है। भारत सरकार भी मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
आईसीएआर-आईआईएमआर पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के मुख्य भवन के पास पौधारोपण किया। यह पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के प्रतीक के रूप में किया गया।
इस अवसर पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से बचाने के लिए टिकाऊ खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि मिलेट्स ऐसी फसलें हैं जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मिलेट्स को बताया भविष्य की फसल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिलेट्स केवल पारंपरिक अनाज नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा और किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया स्वस्थ भोजन और पोषणयुक्त आहार की ओर बढ़ रही है, ऐसे में श्री अन्न की मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है और यह मधुमेह, मोटापा तथा कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने में सहायक हैं। इसके साथ ही ये फसलें जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रही हैं।
श्री चौहान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल मिलेट्स उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि इसके प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार विस्तार को भी मजबूत करना है ताकि किसानों को बेहतर आय प्राप्त हो सके।
किसानों, एफपीओ और स्टार्टअप्स से संवाद
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने संस्थान परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कृषि स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों और मिलेट्स क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।
प्रदर्शनी में उन्नत मिलेट किस्मों, मूल्य संवर्धित उत्पादों, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों, नवीन कृषि मशीनरी और स्टार्टअप आधारित व्यावसायिक मॉडलों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा बीज उत्पादन, मिलेट्स प्रसंस्करण, पैकेजिंग और व्यावसायीकरण से जुड़ी तकनीकों की जानकारी भी दी गई।
श्री चौहान ने किसानों और उद्यमियों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें उद्यमी बनाकर कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ना चाहती है।
ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए अवसर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिलेट्स आधारित उद्योग ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। उन्होंने एफपीओ, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि यदि मिलेट्स आधारित प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को गांव स्तर तक बढ़ाया जाए तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। सरकार तकनीक हस्तांतरण, प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आईसीएआर-आईआईएमआर की भूमिका की सराहना
श्री शिवराज सिंह चौहान ने मिलेट्स अनुसंधान और किसान-केंद्रित विकास कार्यक्रमों में आईसीएआर-भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने मिलेट्स क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई किस्में और आधुनिक तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने और देश में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होंगी।
संस्थान की प्रमुख योजनाओं की जानकारी
आईसीएआर-आईआईएमआर की निदेशक डॉ. सी. तारा सत्यवती ने केंद्रीय मंत्री को संस्थान की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मिलेट्स (GCoE), ट्राइबल सब प्लान (TSP), अनुसूचित जाति उप योजना (SCSP), नॉर्थ ईस्टर्न हिल (NEH) कार्यक्रम, एफपीओ प्रमोशन और महारिषि कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों, आदिवासी समुदायों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, प्रसंस्करण सहायता, बाजार संपर्क और उद्यमिता विकास के माध्यम से सशक्त बनाना है।
डॉ. सत्यवती ने कहा कि संस्थान देशभर में मिलेट्स आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहा है और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
एडवांस्ड फेनोमिक्स फैसिलिटी का किया निरीक्षण
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मिलेट्स के अंतर्गत विकसित एडवांस्ड फेनोमिक्स फैसिलिटी का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने जीनोमिक्स और प्रिसीजन ब्रीडिंग से जुड़े आधुनिक अनुसंधान ढांचे की जानकारी प्राप्त की।
वैज्ञानिकों ने उन्हें बताया कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक उत्पादक, पोषणयुक्त और जलवायु-अनुकूल मिलेट किस्में विकसित की जा रही हैं। इससे भविष्य में किसानों को बेहतर उत्पादन और बाजार की मांग के अनुरूप फसलें उपलब्ध हो सकेंगी।
किसानों और वैज्ञानिकों में बढ़ा उत्साह
श्री शिवराज सिंह चौहान के इस दौरे से किसानों, एफपीओ प्रतिनिधियों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों में नया उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में मौजूद हितधारकों ने कहा कि सरकार द्वारा मिलेट्स क्षेत्र को दिए जा रहे प्रोत्साहन से इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुसंधान, तकनीक और बाजार को प्रभावी तरीके से जोड़ा जाए तो भारत मिलेट्स उत्पादन और निर्यात में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है।
श्री अन्न के जरिए मजबूत होगा ग्रामीण भारत
भारत सरकार द्वारा मिलेट्स को “श्री अन्न” के रूप में बढ़ावा देने का उद्देश्य केवल पोषण सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, जलवायु-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है।
आईसीएआर-आईआईएमआर जैसे संस्थानों की पहल और सरकार के सहयोग से मिलेट्स क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। केंद्रीय मंत्री का यह दौरा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो देश में टिकाऊ कृषि और ग्रामीण विकास को नई गति देने में मदद करेगा।


