नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर देते हुए कहा है कि देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आगामी खरीफ फसल सत्र के दौरान खाद की मांग को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उत्पादन, आयात और कच्चे माल की उपलब्धता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारत में उर्वरकों की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है और आवश्यकता के अनुसार आयात भी किया जा रहा है, जिससे देश में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित बनी हुई है।
अपर्णा शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में देश में उर्वरकों का कुल भंडार संतोषजनक स्तर पर है। खरीफ सीजन 2026 के लिए कुल 390.54 लाख टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है, जबकि इस समय देश के पास 200.12 लाख टन का उपलब्ध स्टॉक मौजूद है। यह अनुमानित मांग का 50 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में खरीफ सीजन से पहले कुल आवश्यकता का लगभग 33 प्रतिशत भंडार ही उपलब्ध रहता है, लेकिन इस बार सरकार ने पहले से बेहतर तैयारी की है।
उन्होंने जानकारी दी कि अब तक घरेलू उत्पादन के माध्यम से लगभग 95 लाख टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है, जबकि 22.60 लाख टन उर्वरक आयात के जरिए देश में लाया गया है। इस प्रकार कुल 117.6 लाख टन उर्वरक भंडार में जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा सरकार ने 13.5 लाख टन डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और 9 लाख टन एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश) उर्वरकों की अतिरिक्त आपूर्ति भी पहले से सुनिश्चित कर ली है।
सरकार का मानना है कि इन तैयारियों से खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की अधिकतम मांग वाले समय में भी किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि देश में खरीफ फसलों की बुवाई आमतौर पर जून के मध्य से शुरू होती है और इस दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, बाजरा तथा अन्य फसलों के लिए उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
अतिरिक्त सचिव ने यह भी बताया कि उर्वरक उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता भी फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। सरकार तैयार उर्वरकों और कच्चे माल दोनों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सचिवों के अधिकार-प्राप्त समूह (Empowered Group of Secretaries) की अब तक नौ बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें आपूर्ति, उत्पादन और आयात की समीक्षा की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल वर्तमान मांग को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। वैश्विक बाजार में उर्वरकों और कच्चे माल की कीमतों तथा आपूर्ति श्रृंखला पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित संकट से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
उर्वरक क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में देश की कुल उर्वरक आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा किया गया। पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार देश का कुल उर्वरक उत्पादन वर्ष 2021 में 433.29 लाख टन था, जो बढ़कर 2025 में रिकॉर्ड 524.62 लाख टन तक पहुंच गया।
यूरिया उत्पादन में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014-15 में देश का यूरिया उत्पादन लगभग 225 लाख टन था, जो बढ़कर 2024-25 में 306.67 लाख टन तक पहुंच गया। हालांकि बढ़ती कृषि मांग को देखते हुए भारत को अभी भी यूरिया आयात करना पड़ता है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था ताकि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा सके।
किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार सब्सिडी प्रदान कर रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस सब्सिडी के कारण किसानों को नियंत्रित कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध हो पाते हैं।
वर्तमान में नीम-लेपित यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बोरी निर्धारित है, जबकि डीएपी उर्वरक 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बोरी की दर से किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का दावा है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए देश पूरी तरह तैयार है और किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। घरेलू उत्पादन, आयात, पर्याप्त भंडारण और मजबूत निगरानी व्यवस्था के चलते इस बार खाद आपूर्ति की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।


