भारत में बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (DIBD) ने करंट एआई और कल्पा इम्पैक्ट के सहयोग से व्योमा (VYOMA) इनोवेशन प्रतियोगिता का शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य ओपन-सोर्स, बहुभाषी और वॉइस-फर्स्ट एआई समाधानों के विकास को बढ़ावा देना है, जो कम इंटरनेट कनेक्टिविटी या ऑफलाइन वातावरण में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।
यह प्रतियोगिता भारत के डिजिटल समावेशन अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में अत्याधुनिक एआई तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सुनो सूत्र प्लेटफॉर्म पर आधारित है प्रतियोगिता
व्योमा इनोवेशन प्रतियोगिता का आधार ‘सुनो सूत्र’ (Suno Sutra) नामक एक अत्याधुनिक एआई प्लेटफॉर्म है, जिसे भाषिनी और करंट एआई ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इस बहुभाषी, वॉइस-फर्स्ट और ओपन-सोर्स हैंडहेल्ड एआई डिवाइस का अनावरण वर्ष 2026 में आयोजित इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट में किया गया था।
सुनो सूत्र को एक ऐसे संदर्भ मंच के रूप में डिजाइन किया गया है जो भारतीय भाषाओं में संवादात्मक एआई अनुभव प्रदान करता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हुए बिना डिवाइस पर ही एआई क्षमताओं का उपयोग कर सकता है। इससे दूरदराज और कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी एआई आधारित सेवाओं की पहुंच संभव हो सकेगी।
बहुभाषी एआई बनेगा डिजिटल समावेशन का आधार
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कहा कि बहुभाषी एआई केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि भारत के लिए एक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनकारी अवसंरचना है।
उन्होंने कहा कि भाषिनी का उद्देश्य देश की विविध भाषाओं में डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। सुनो सूत्र जैसे समाधान उन लोगों तक भी एआई आधारित सुविधाएं पहुंचाएंगे जो इंटरनेट या डिजिटल संसाधनों की सीमित उपलब्धता वाले क्षेत्रों में रहते हैं।
उनके अनुसार, भाषिनी भारतीय भाषा एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दे रही है जो अंतिम छोर तक नागरिकों को उनकी मातृभाषा में सेवाएं उपलब्ध कराएं।
स्टार्टअप, शोधकर्ता और छात्रों को मिलेगा बड़ा मंच
व्योमा इनोवेशन प्रतियोगिता में देशभर के स्टार्टअप, शोधकर्ता, छात्र, शैक्षणिक संस्थान, एमएसएमई, उद्योग भागीदार और स्वतंत्र नवप्रवर्तक भाग ले सकते हैं।
प्रतियोगिता के तहत प्रतिभागियों को सुनो सूत्र प्लेटफॉर्म को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए उपयोग मामलों, हार्डवेयर सुधारों, एआई मॉडल अनुकूलन तथा वास्तविक उपयोग के लिए तैयार अनुप्रयोग विकसित करने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों के अनुसार प्रतिभागियों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जो डिवाइस को अधिक कॉम्पैक्ट, ऊर्जा-कुशल और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बना सकें।
शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में होंगे उपयोग
व्योमा प्रतियोगिता के माध्यम से विकसित होने वाले एआई समाधान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से:
- शिक्षा एवं डिजिटल लर्निंग
- कृषि एवं किसान सलाह सेवाएं
- स्वास्थ्य सेवा और टेलीमेडिसिन
- ई-गवर्नेंस
- सार्वजनिक सेवा वितरण
- ग्रामीण विकास
- डिजिटल साक्षरता
जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय भाषाओं में विकसित एआई तकनीकें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं तथा सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच को और अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
कई चरणों में आयोजित होगी प्रतियोगिता
व्योमा इनोवेशन प्रतियोगिता को कई चरणों में आयोजित किया जाएगा। सबसे पहले इच्छुक प्रतिभागियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों में से 20 सर्वश्रेष्ठ टीमों का चयन किया जाएगा।
चयनित टीमों को सुनो सूत्र डेवलपर किट और तकनीकी प्लेटफॉर्म तक विशेष पहुंच प्रदान की जाएगी। इसके अलावा भाषिनी और करंट एआई के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को तकनीकी मार्गदर्शन और मेंटरशिप भी देंगे।
इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने एआई समाधान विकसित करने, उनका परीक्षण करने और उन्हें वास्तविक उपयोग के लिए तैयार करने का अवसर मिलेगा।
विजेताओं को मिलेंगे 80 लाख रुपये तक के पुरस्कार
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित टीमें विशेषज्ञ जूरी के समक्ष अपने प्रोटोटाइप और समाधान प्रस्तुत करेंगी।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमों को कुल 80 लाख रुपये तक के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विजेता समाधानों को केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में लागू किए जाने का अवसर भी मिल सकता है।
यह पहल केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभागियों को वास्तविक सरकारी परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवा प्रणालियों में अपने नवाचारों को लागू करने का मंच भी प्रदान करती है।
सहयोग आधारित नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
व्योमा इनोवेशन चैलेंज का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना भी है।
प्रतियोगिता विशेष रूप से उन टीमों को प्रोत्साहित करती है जिनमें स्टार्टअप, इंजीनियर, शोधकर्ता, एमएसएमई और शैक्षणिक संस्थान मिलकर कार्य करें। इससे नवाचार प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
भाषिनी बना रहा है भारत का बहुभाषी एआई इकोसिस्टम
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन भारत की राष्ट्रीय भाषा प्रौद्योगिकी पहल है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बहुभाषी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देती है।
राष्ट्रीय भाषा प्रौद्योगिकी केंद्र (NHLT) के माध्यम से भाषिनी वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को भाषा सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक अनुरोधों को संसाधित करता है तथा 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वॉइस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार व्योमा इनोवेशन प्रतियोगिता भारत के बहुभाषी एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, डिजिटल समावेशन को गति देने और भारतीय भाषाओं में तकनीकी नवाचार को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।


