कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए बागवानी फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादन के द्वितीय अग्रिम अनुमान जारी कर दिए हैं। जारी आंकड़ों के अनुसार देश में बागवानी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। सरकार द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025-26 में देश का कुल बागवानी उत्पादन लगभग 3777.76 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 70.39 लाख टन अधिक है।
बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। फल, सब्जियां, फूल, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों का उत्पादन न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि कृषि निर्यात को भी मजबूती प्रदान करता है।
बागवानी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ा
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में बागवानी फसलों का कुल क्षेत्रफल लगभग 301.51 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। यह वर्ष 2024-25 के 301.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की तुलना में 0.14 लाख हेक्टेयर अधिक है।
हालांकि क्षेत्रफल में वृद्धि सीमित है, लेकिन उत्पादन में हुई बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि किसानों ने बेहतर तकनीकों, उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि पद्धतियों का उपयोग किया है। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में सुधार देखने को मिला है।
फलों के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
वर्ष 2025-26 में फलों का उत्पादन 1214.75 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह वर्ष 2024-25 के 1176.49 लाख टन उत्पादन की तुलना में 38.26 लाख टन अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार केला, आम, पपीता, सेब और अमरूद के उत्पादन में वृद्धि इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है। देश में फलों की बढ़ती मांग और किसानों द्वारा व्यावसायिक बागवानी की ओर बढ़ते रुझान ने भी इस क्षेत्र को मजबूती दी है।
फल उत्पादन में वृद्धि से किसानों को बेहतर आय मिलने की संभावना है, वहीं उपभोक्ताओं को भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
सब्जियों का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़े
सब्जियां भारतीय बागवानी क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में सब्जियों का क्षेत्रफल बढ़कर 118.79 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.88 लाख हेक्टेयर अधिक है।
सब्जियों का उत्पादन भी 2177.97 लाख टन से बढ़कर 2210 लाख टन होने का अनुमान है। यानी लगभग 32 लाख टन की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
विशेष रूप से आलू, टमाटर, भिंडी, मटर, फूलगोभी और लौकी जैसी फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। यह वृद्धि देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्याज उत्पादन स्थिर, क्षेत्रफल में वृद्धि
प्याज देश की महत्वपूर्ण नकदी फसलों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में प्याज का रकबा 19.68 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 20.14 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है। यह करीब 2.31 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
हालांकि क्षेत्रफल बढ़ने के बावजूद प्याज उत्पादन लगभग स्थिर रहने की संभावना है। वर्ष 2025-26 में प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 307.67 लाख टन था।
यह स्थिति मौसम संबंधी चुनौतियों और कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्पादन प्रभावित होने के कारण हो सकती है।
आलू और टमाटर उत्पादन में बढ़त
देश में आलू उत्पादन 2025-26 में 598.89 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.18 लाख टन अधिक है। यह लगभग 2.25 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
वहीं टमाटर उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। वर्ष 2024-25 में जहां टमाटर का उत्पादन 205.99 लाख टन था, वहीं 2025-26 में इसके 214.61 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
इन दोनों फसलों की बढ़ती पैदावार बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ कीमतों को संतुलित रखने में भी मदद कर सकती है।
फूलों और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा
बागवानी क्षेत्र में फूलों और औषधीय पौधों की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में फूलों का क्षेत्रफल बढ़कर 4 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।
फूलों का उत्पादन 42.65 लाख टन से बढ़कर 45.84 लाख टन होने की संभावना है, जो लगभग 7.47 प्रतिशत की वृद्धि है। यह बागवानी क्षेत्र में सबसे तेज वृद्धि दरों में से एक है।
इसी प्रकार सुगंधित और औषधीय पौधों का उत्पादन भी 9.01 लाख टन से बढ़कर 9.76 लाख टन होने का अनुमान है। आयुर्वेद, औषधि उद्योग और निर्यात बाजारों में बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
मसालों का उत्पादन भी बढ़ेगा
भारत विश्व के प्रमुख मसाला उत्पादक देशों में शामिल है। विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में मसालों का क्षेत्रफल 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि उत्पादन 126.55 लाख टन तक पहुंच सकता है।
लहसुन, हल्दी, करी पत्ता और मेथी जैसी फसलों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई गई है। मसालों के निर्यात में बढ़ोतरी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
किसानों के लिए सकारात्मक संकेत
बागवानी उत्पादन में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि भारतीय कृषि लगातार विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। फल, सब्जियां, फूल, मसाले और औषधीय पौधों की खेती किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ प्रदान कर सकती है।
सरकार की विभिन्न योजनाएं, बेहतर सिंचाई सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री किसानों को बागवानी क्षेत्र की ओर आकर्षित कर रही हैं।
वर्ष 2025-26 के द्वितीय अग्रिम अनुमान भारतीय बागवानी क्षेत्र के लिए उत्साहजनक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। कुल बागवानी उत्पादन में लगभग 1.90 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि फलों, सब्जियों, फूलों और मसालों के उत्पादन में भी सकारात्मक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा बल्कि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगा। आने वाले वर्षों में बागवानी क्षेत्र भारतीय कृषि विकास का प्रमुख आधार बन सकता है।

