चंडीगढ़/नई दिल्ली: उत्तर भारत में इस खरीफ सीजन कपास की खेती को बड़ा झटका लगा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में किसानों का रुझान कपास से हटकर धान की ओर बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर भारत में कपास का रकबा करीब 22 प्रतिशत तक घटा है। यह गिरावट साफ संकेत देती है कि किसानों का कपास पर भरोसा कमजोर हो रहा है और वे अब ज्यादा सुरक्षित मानी जाने वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
कपास से धान की ओर क्यों बढ़े किसान?
किसानों के फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण फसल बिक्री का भरोसा है। धान की सरकारी खरीद व्यवस्था मजबूत मानी जाती है, जहां किसानों को MSP और खरीद केंद्रों का सहारा मिलता है। वहीं कपास में कीमतें बाजार, गुणवत्ता और मांग पर निर्भर करती हैं। कई बार किसान अच्छी फसल लेने के बाद भी मंडी में बेहतर भाव नहीं पा पाते।
कीटों और लागत ने बढ़ाई परेशानी
Kapas ki kheti में सफेद मक्खी और पिंक बॉलवर्म जैसे कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इनसे बचाव के लिए किसानों को बार-बार कीटनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। इसके बावजूद फसल नुकसान का खतरा बना रहता है। किसानों का कहना है कि कपास में मेहनत और खर्च दोनों ज्यादा हैं, लेकिन मुनाफे की गारंटी नहीं है।
पंजाब में लक्ष्य से पीछे रही बुवाई
पंजाब में इस साल कपास की बुवाई लक्ष्य से काफी पीछे रही। मई के मध्य तक राज्य अपने कपास बुवाई लक्ष्य का करीब 32 प्रतिशत ही पूरा कर पाया था। इससे साफ है कि किसान कपास को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं दिखा रहे। हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों में भी किसान धान या दूसरी फसलों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
धान में भरोसा, लेकिन पानी की चिंता
धान किसानों के लिए बाजार के लिहाज से सुरक्षित विकल्प जरूर बन रहा है, लेकिन इसका बढ़ता रकबा भूजल के लिए चिंता बढ़ा सकता है। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में पहले से ही पानी का स्तर नीचे जा रहा है। ऐसे में कपास से धान की ओर बढ़ता रुझान सरकारों के फसल विविधीकरण अभियान के लिए भी चुनौती बन सकता है।
कपास को फिर आकर्षक बनाना जरूरी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कपास की खेती को फिर से मजबूत बनाने के लिए किसानों को बेहतर बीज, समय पर कीट प्रबंधन सलाह, फसल बीमा और भरोसेमंद बाजार भाव की जरूरत है। अगर कपास में आय की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में इसका रकबा और कम हो सकता है।
निष्कर्ष:
Kapas ki kheti उत्तर भारत में कपास का घटता रकबा केवल फसल परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे में बदलाव की कहानी है। किसान अब वही फसल चुन रहे हैं जिसमें जोखिम कम और बिक्री का भरोसा ज्यादा हो। फिलहाल धान ने यही भरोसा देकर कपास की जमीन अपने नाम कर ली है।

