भारतीय जैविक कृषि क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि बायोलॉजिकल एग्री सॉल्यूशंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BASAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विपिन सैनी का शोध सार (Abstract) विश्व के प्रतिष्ठित Annual Biocontrol Industry Meeting (ABIM) 2026 में प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मेलन 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक बासेल, स्विट्जरलैंड में आयोजित होगा, जहां दुनिया भर के वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, नियामक संस्थाएं और नीति निर्माता जैविक कृषि और बायोकंट्रोल के भविष्य पर विचार-विमर्श करेंगे।
विपिन सैनी “Regulatory Challenges of Cell-Free Microbials as Biological Agri-Inputs: India Case Study” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत करेंगे। उनका चयन “Navigating Regulatory Pathways for Complex Mixtures, Peptides & RNAi” विषयक विशेष तकनीकी सत्र के लिए किया गया है, जो 22 अक्टूबर 2026 को आयोजित होगा।
वैश्विक मंच पर भारत की आवाज
यह चयन केवल विपिन सैनी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय जैविक कृषि उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उनके शोध के माध्यम से पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के संदर्भ में सेल-फ्री माइक्रोबियल जैविक कृषि उत्पादों के नियामक ढांचे और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होगी।
तेजी से विकसित हो रहे जैविक कृषि क्षेत्र में माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स, पेप्टाइड्स और आरएनएआई (RNAi) आधारित उत्पादों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन उत्पादों के सुरक्षित उपयोग, वैज्ञानिक मूल्यांकन और नियामक प्रक्रियाओं को लेकर विश्वभर में नई नीतियों और मानकों पर काम किया जा रहा है। इस संदर्भ में भारत का अनुभव वैश्विक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है शोध का मुख्य विषय?
विपिन सैनी का शोध विशेष रूप से सेल-फ्री माइक्रोबियल जैविक कृषि इनपुट्स के नियामक पहलुओं पर आधारित है। यह ऐसे जैविक उत्पाद हैं, जो सूक्ष्मजीवों से प्राप्त जैव सक्रिय तत्वों का उपयोग करते हैं, लेकिन इनमें जीवित सूक्ष्मजीव मौजूद नहीं होते।
ऐसे उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल माने जाते हैं और भविष्य में रासायनिक कृषि इनपुट्स का बेहतर विकल्प बन सकते हैं। हालांकि इनके वैज्ञानिक मूल्यांकन, सुरक्षा परीक्षण और नियामक स्वीकृति से जुड़े कई प्रश्न अभी भी वैश्विक स्तर पर विचाराधीन हैं।
अपने शोध में विपिन सैनी भारत में इन उत्पादों के नियामक ढांचे, चुनौतियों और संभावित समाधान पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
ABIM: बायोकंट्रोल उद्योग का सबसे बड़ा वैश्विक मंच
Annual Biocontrol Industry Meeting (ABIM) जैविक फसल संरक्षण और बायोकंट्रोल उद्योग का दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन माना जाता है।
हर वर्ष इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के वैज्ञानिक, कृषि उद्योग, नियामक एजेंसियां, अनुसंधान संस्थान और नीति विशेषज्ञ भाग लेते हैं। यहां नई तकनीकों, जैविक कृषि समाधानों, नियामक ढांचे और वैश्विक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श होता है।
इस मंच पर शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिलना किसी भी वैज्ञानिक या कृषि विशेषज्ञ के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
नियामक चुनौतियों पर होगा वैश्विक मंथन
सम्मेलन के दौरान आयोजित विशेष सत्र में Complex Mixtures, Peptides एवं RNAi जैसे उभरते जैविक कृषि उत्पादों के लिए नियामक प्रक्रियाओं पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि इन जटिल जैविक उत्पादों के लिए वैज्ञानिक जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) कैसे किया जाए, उनकी सुरक्षा का मूल्यांकन किन मानकों पर आधारित हो तथा विभिन्न देशों में उनके लिए प्रभावी और पारदर्शी नियामक व्यवस्था कैसे विकसित की जाए।
इसी चर्चा में भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करना वैश्विक कृषि समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
भारतीय जैविक कृषि उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आज जैविक कृषि, बायोपेस्टिसाइड, बायोफर्टिलाइजर और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में भारतीय विशेषज्ञों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी न केवल देश की वैज्ञानिक क्षमता को प्रदर्शित करती है, बल्कि वैश्विक नीतियों के निर्माण में भी भारत की भूमिका को मजबूत करती है।
विपिन सैनी लंबे समय से जैविक कृषि इनपुट्स, नियामक सुधार, उद्योग और नीति निर्माण से जुड़े विषयों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनका अनुभव भारतीय जैविक कृषि उद्योग और नियामक प्रणाली को बेहतर समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
किसानों और उद्योग दोनों को मिलेगा लाभ
यदि सेल-फ्री माइक्रोबियल उत्पादों के लिए स्पष्ट और वैज्ञानिक नियामक व्यवस्था विकसित होती है, तो इसका लाभ किसानों, कृषि उद्योग और पर्यावरण तीनों को मिलेगा।
इससे सुरक्षित और प्रभावी जैविक उत्पादों का विकास तेज होगा, किसानों को रासायनिक इनपुट्स के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारतीय जैविक कृषि उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ने की भी संभावना है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी
हाल के वर्षों में भारत ने जैविक कृषि, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ऐसे में ABIM जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर भारतीय विशेषज्ञ द्वारा शोध प्रस्तुत किया जाना इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैज्ञानिक और नीति-निर्माण क्षमता का भी प्रमाण है।
विपिन सैनी का चयन यह दर्शाता है कि भारतीय विशेषज्ञ अब केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कृषि नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान और नियामक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।
यह उपलब्धि भारतीय जैविक कृषि उद्योग, वैज्ञानिक समुदाय और कृषि नीति से जुड़े सभी हितधारकों के लिए प्रेरणादायक है तथा आने वाले समय में भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

