भारत में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब किसान गेहूं, धान, गन्ना और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी बागवानी फसलों को भी अपना रहे हैं, जिनसे कम क्षेत्र में बेहतर आय की संभावना बन सकती है। Dragon Fruit Farming इसी कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका आकर्षक रंग, बढ़ती बाजार मांग, लंबे समय तक फल देने की क्षमता और तुलनात्मक रूप से कम पानी में खेती की संभावना इसे एक उभरती हुई लाभकारी फसल बनाती है।
Dragon Fruit कैक्टस परिवार का एक चढ़ने वाला पौधा है। इसकी शाखाएं लंबी, मोटी, हरी और मांसल होती हैं, लेकिन यह सामान्य फलदार पेड़ों की तरह अपने आप सीधा खड़ा नहीं रह सकता। इसलिए इसकी खेती में मजबूत सीमेंट पोल, ऊपरी रिंग और सहारा प्रणाली की जरूरत होती है। पौधे की मुख्य शाखाओं को पोल के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है और ऊपर पहुंचने के बाद उन्हें चारों ओर नीचे की तरफ फैलने दिया जाता है। इन्हीं लटकती शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में फल विकसित होते हैं।
Dragon Fruit Farming में शुरुआती खर्च पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक हो सकता है, क्योंकि किसान को गुणवत्तापूर्ण पौध, सीमेंट पोल, रिंग, ड्रिप सिंचाई, खाद, मजदूरी, बाड़ और खेत की तैयारी पर निवेश करना पड़ता है। हालांकि बाग अच्छी तरह स्थापित हो जाने के बाद पौधों से कई वर्षों तक उत्पादन लिया जा सकता है। बेहतर लाभ के लिए रोपाई से पहले सही किस्म का चयन, मजबूत पोल व्यवस्था, अच्छी जल निकासी, संतुलित सिंचाई और स्थानीय बाजार की मांग का आकलन करना बेहद जरूरी है।
Dragon Fruit क्या है?
Dragon Fruit, जिसे पिताया या पिटाहाया भी कहा जाता है, कैक्टस परिवार का आकर्षक और अधिक मूल्य वाला फल है। इसका बाहरी छिलका गुलाबी, लाल या पीला हो सकता है, जबकि अंदर का गूदा सफेद, लाल या गुलाबी रंग का होता है। इसके गूदे में छोटे-छोटे काले बीज पाए जाते हैं और इसका स्वाद हल्का मीठा होता है।
भारत में गुलाबी छिलके और सफेद गूदे वाला Dragon Fruit सबसे अधिक उगाया जाता है, जबकि लाल गूदे वाली किस्म की बाजार मांग तेजी से बढ़ रही है। यह पौधा गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है तथा इसे सहारे के लिए मजबूत पोल की जरूरत होती है। इसकी शाखाएं पोल के ऊपर पहुंचने के बाद नीचे की ओर लटकती हैं, जहां फूल और फल विकसित होते हैं।
अच्छी उपज के लिए किसान को प्रमाणित नर्सरी से स्वस्थ और रोगमुक्त पौध खरीदनी चाहिए। किस्म चुनते समय फल का आकार, स्वाद, उपज क्षमता, परागण की जरूरत और स्थानीय बाजार की मांग जरूर जांचें। सही पौध और उचित प्रबंधन से Dragon Fruit का बाग कई वर्षों तक उत्पादन दे सकता है।
Dragon Fruit Farming के लिए कैसी जलवायु सबसे बेहतर है?
Dragon Fruit गर्म और हल्की शुष्क जलवायु में तेजी से बढ़ने वाली फसल है। कैक्टस परिवार का पौधा होने के कारण यह कम पानी में भी जीवित रह सकता है, लेकिन बेहतर वृद्धि, अधिक फूल और अच्छी गुणवत्ता वाले फलों के लिए नियंत्रित सिंचाई जरूरी होती है। पौधों को लंबे समय तक पूरी तरह सूखा छोड़ने से शाखाओं की बढ़वार रुक सकती है और फल का आकार प्रभावित हो सकता है।
इस फसल के लिए सबसे जरूरी बात अच्छी जल निकासी है। अधिक वर्षा या खेत में लगातार पानी जमा रहने से जड़ और तना सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में पौधों को ऊंची क्यारियों पर लगाना और पानी निकालने के लिए चौड़ी नालियां बनाना फायदेमंद रहता है।
बहुत तेज गर्मी और सीधी धूप नई शाखाओं पर सनबर्न पैदा कर सकती है, जिससे पीले या सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। ऐसे क्षेत्रों में शुरुआती पौधों को हल्की छाया देना उपयोगी हो सकता है। तेज हवा वाले इलाकों में मजबूत पोल और रिंग सिस्टम लगाना जरूरी है, ताकि फल और शाखाओं के भार से सहारा न गिरे। सही तापमान, संतुलित नमी और मजबूत संरचना Dragon Fruit की बेहतर उपज की मुख्य कुंजी है।
Dragon Fruit Farming के लिए कैसी मिट्टी और खेत सबसे बेहतर है?
Dragon Fruit की अच्छी पैदावार की शुरुआत सही मिट्टी और खेत के चयन से होती है। इस फसल के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि ऐसी मिट्टी में पानी जल्दी निकल जाता है और जड़ों तक पर्याप्त हवा पहुंचती है। मिट्टी हल्की, भुरभुरी और जैविक पदार्थों से भरपूर होनी चाहिए। जिस खेत में बारिश के बाद लंबे समय तक पानी जमा रहता है, वहां जड़ और तना सड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
भारी चिकनी मिट्टी में भी Dragon Fruit की खेती संभव है, लेकिन इसके लिए ऊंची क्यारियां और मजबूत जल निकासी व्यवस्था बनानी जरूरी होती है। मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़ी हुई गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और जरूरत के अनुसार रेत मिलाई जा सकती है। ताजा गोबर सीधे पौधे की जड़ों के पास नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे गर्मी पैदा होकर जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
व्यावसायिक खेती शुरू करने से पहले मिट्टी और सिंचाई जल की जांच जरूर करवानी चाहिए। मिट्टी परीक्षण से पीएच, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति पता चलती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर खाद और उर्वरक देने से लागत कम होती है और पौधों को संतुलित पोषण मिलता है।
Dragon Fruit के लिए खेत का सही चयन और तैयारी
Dragon Fruit Farming ऐसी जगह चुनें जहां सिंचाई का पानी उपलब्ध हो, बारिश का पानी आसानी से निकल सके और फल को बाजार तक पहुंचाना आसान हो। खेत तक ट्रैक्टर या छोटा वाहन पहुंचना जरूरी है, क्योंकि तुड़ाई के बाद फलों को जल्दी पैक करके भेजना पड़ता है। नीलगाय, छुट्टा पशु या जंगली जानवरों का खतरा होने पर खेत के चारों ओर मजबूत बाड़ लगाना लाभकारी रहता है।
खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले गहरी जुताई करें और पुराने फसल अवशेष, झाड़ियां तथा खरपतवार हटा दें। इसके बाद भूमि को समतल करके पानी निकासी के लिए उचित दिशा में नालियां बनाएं। पोल की दूरी और कतारों की दिशा पहले से तय करना जरूरी है, क्योंकि बाद में पोल सिस्टम में बदलाव करना खर्चीला हो सकता है।
रोपाई से कुछ सप्ताह पहले गड्ढे तैयार करना बेहतर रहता है। गड्ढों की ऊपरी मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद, कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट मिलाकर वापस भरें। खेत का लेआउट ऐसा रखें कि पौधों के बीच पर्याप्त जगह हो और मजदूर आसानी से सिंचाई, छंटाई, दवा छिड़काव और फल तुड़ाई का काम कर सकें। सही मिट्टी, मजबूत जल निकासी और योजनाबद्ध खेत Dragon Fruit की सफल खेती की नींव होते हैं।
Dragon Fruit के लिए मजबूत पोल और सहारा प्रणाली क्यों जरूरी है?
Dragon Fruit की सफल खेती में पोल और सहारा प्रणाली सबसे अहम भूमिका निभाती है। इसकी शाखाएं लंबी और भारी होती हैं, इसलिए वे अपने आप सीधी खड़ी नहीं रह सकतीं। पौधों को ऊपर चढ़ाने के लिए मजबूत सीमेंट या कंक्रीट पोल लगाए जाते हैं। पोल को जमीन में पर्याप्त गहराई तक गाड़ना जरूरी है, ताकि वह वर्षों तक शाखाओं, फूलों और फलों का वजन सुरक्षित रूप से संभाल सके।
पोल के ऊपरी हिस्से पर मजबूत गोल रिंग, कंक्रीट फ्रेम, टायर या टिकाऊ सहारा लगाया जाता है। जब पौधे की मुख्य शाखा पोल के ऊपर पहुंचती है, तो उसे रिंग के चारों ओर फैलाकर नीचे की ओर लटकने दिया जाता है। यही लटकती शाखाएं आगे चलकर अधिक फूल और फल देती हैं, इसलिए पौधों की सही ट्रेनिंग उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है।
पौधे को पोल से बांधने के लिए मुलायम रस्सी, कपड़ा या सुरक्षित प्लास्टिक टेप का उपयोग करना चाहिए। रस्सी को ज्यादा कसकर बांधने से शाखा मोटी होने पर उसमें कटाव हो सकता है। शुरुआती लागत बचाने के लिए कमजोर पोल या घटिया रिंग लगाना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि फल का भार बढ़ने पर पूरी संरचना गिर सकती है और पौधों, ड्रिप लाइन तथा तैयार फलों को नुकसान पहुंच सकता है।
Dragon Fruit Farming की रोपाई का सबसे सही समय
Dragon Fruit Farming की रोपाई ऐसे मौसम में करनी चाहिए, जब बहुत तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड, पाला या लगातार भारी बारिश का खतरा कम हो। स्थानीय जलवायु के अनुसार रोपाई का समय बदल सकता है, लेकिन सामान्य रूप से हल्का गर्म और संतुलित मौसम पौधों की शुरुआती वृद्धि के लिए बेहतर माना जाता है।
सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर किसान अनुकूल मौसम में रोपाई कर सकते हैं। बहुत अधिक गर्मी में पौध लगाने पर नई कटिंग को तेज धूप से बचाना जरूरी होता है। मानसून में रोपाई करने से प्राकृतिक नमी का फायदा मिलता है, लेकिन जलभराव से जड़ और तना सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पौधों को ऊंची क्यारियों पर लगाना चाहिए और खेत की नालियां खुली रखनी चाहिए। रोपाई से पहले पोल, रिंग और ड्रिप सिंचाई की पूरी व्यवस्था तैयार कर लेनी चाहिए। पौध खरीदते समय मजबूत, हरी और रोगमुक्त कटिंग चुनें। पीली, नरम, काले धब्बों वाली या सड़ी हुई पौध से बचें, क्योंकि ऐसी पौध भविष्य में कम वृद्धि और रोग फैलने का कारण बन सकती है।
Dragon Fruit की पौध लगाने की सही विधि
Dragon Fruit की पौध आमतौर पर पोल के चारों ओर लगाई जाती है। एक पोल के पास कितने पौधे लगाए जाएं, यह किस्म, पोल की मजबूती, स्थानीय तकनीक और उपलब्ध जगह पर निर्भर करता है। पौधों और कतारों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से धूप, हवा और मजदूरों की आवाजाही बेहतर रहती है। रोपाई के लिए पहले से तैयार गड्ढे में खाद मिश्रित मिट्टी भरें और पौध को सावधानी से लगाएं। जड़ों को मोड़ने, दबाने या तोड़ने से बचें। पौधे को बहुत अधिक गहराई में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के आसपास नमी बढ़ सकती है और सड़न का खतरा पैदा हो सकता है।
पौध लगाने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें, ताकि मिट्टी जड़ों से अच्छी तरह जुड़ जाए। इसके बाद पौधे को मुलायम रस्सी से पोल के साथ हल्के हाथ से बांध दें। शुरुआती दिनों में मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें, लेकिन पौधे के पास पानी जमा न होने दें। कुछ सप्ताह बाद खेत का निरीक्षण करके सूखे या कमजोर पौधों की जगह नई पौध लगाएं, ताकि पूरे बाग में पौधों की संख्या समान बनी रहे।
Dragon Fruit में सिंचाई का सही तरीका
Dragon Fruit Farming कम पानी में उगने वाली फसल है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए संतुलित सिंचाई जरूरी है। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ और तना सड़ सकता है, जबकि लंबे समय तक पानी की कमी रहने पर शाखाओं की वृद्धि, फूल बनने और फल के आकार पर असर पड़ सकता है। ड्रिप सिंचाई Dragon Fruit की खेती के लिए सबसे उपयोगी विकल्पों में से एक है। इससे पानी सीधे जड़ क्षेत्र तक पहुंचता है, खेत में अनावश्यक नमी नहीं फैलती और पानी की बचत होती है। ड्रिप के माध्यम से आवश्यकता के अनुसार घुलनशील उर्वरक भी दिए जा सकते हैं, जिससे पौधों को पोषण अधिक प्रभावी तरीके से मिलता है।
सिंचाई की मात्रा पौधे की उम्र, मौसम, मिट्टी की बनावट, तापमान और फल विकास की अवस्था के अनुसार तय करनी चाहिए। किसान को तय अंतराल पर पानी देने के बजाय मिट्टी की नमी देखकर निर्णय लेना चाहिए। बारिश के मौसम में सिंचाई कम या बंद की जा सकती है। फूल आने और फल बढ़ने के समय मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन अचानक अधिक पानी देने से फल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
खाद और उर्वरक प्रबंधन
Dragon Fruit Farming के बेहतर विकास के लिए सड़ी हुई गोबर खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करना लाभकारी रहता है। ये जैविक खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती हैं, नमी बनाए रखने में मदद करती हैं और जड़ों को पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं। रासायनिक उर्वरक मिट्टी जांच, पौधे की उम्र और उत्पादन अवस्था के अनुसार छोटी-छोटी खुराक में देना चाहिए। अधिक नाइट्रोजन देने से शाखाओं की वृद्धि तेज हो सकती है, लेकिन फूल और फल कम बन सकते हैं, इसलिए संतुलित पोषण जरूरी है।
ट्रेनिंग और छंटाई
Dragon Fruit के पौधे को सही आकार देने के लिए ट्रेनिंग और छंटाई बहुत जरूरी है। शुरुआती अवस्था में एक या दो मजबूत शाखाओं को पोल के ऊपर तक बढ़ने देना चाहिए और कमजोर, पतली तथा अनावश्यक शाखाओं को हटाते रहना चाहिए। पोल के ऊपर पहुंचने के बाद शाखाओं को चारों ओर नीचे की तरफ लटकने दें, क्योंकि इन्हीं शाखाओं पर अधिक फूल और फल बनते हैं। सूखी, रोगग्रस्त, टूटी और जमीन को छूने वाली शाखाओं को काटने से पौधे में धूप और हवा का आवागमन बेहतर होता है।
फूल और परागण
Dragon Fruit के फूल बड़े, सफेद और आकर्षक होते हैं, जो अक्सर रात के समय खिलते हैं। कुछ किस्में स्वपरागित होती हैं, जबकि कुछ किस्मों में बेहतर फल बनने के लिए दूसरी अनुकूल किस्म या हाथ से परागण की जरूरत पड़ सकती है। यदि पौधों में फूल अधिक आ रहे हों लेकिन फल कम बन रहे हों, तो परागण की व्यवस्था, मौसम और किस्म की जांच करनी चाहिए। सही परागण से फल बनने की दर, आकार और कुल उत्पादन में सुधार हो सकता है।
Dragon Fruit के प्रमुख कीट और उनका नियंत्रण
Dragon Fruit की फसल में चींटी, मिलीबग, एफिड और अन्य रस चूसने वाले कीट नई शाखाओं, फूलों और फलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। Dragon Fruit Farming में मिलीबग एक प्रमुख समस्या है, क्योंकि ये पौधे का रस चूसकर उसकी वृद्धि कमजोर करते हैं और चिपचिपा पदार्थ छोड़ते हैं, जिस पर काली फफूंद विकसित हो सकती है। चींटियां मिलीबग को एक शाखा से दूसरी शाखा तक फैलाने में मदद करती हैं, इसलिए दोनों कीट अक्सर एक साथ दिखाई देते हैं। कीटों से बचाव के लिए बाग का नियमित निरीक्षण करना बहुत जरूरी है। शुरुआती अवस्था में प्रभावित हिस्सों को साफ करके, अत्यधिक संक्रमित शाखाओं को हटाकर और चींटियों के रास्तों को नियंत्रित करके नुकसान कम किया जा सकता है।
Dragon Fruit Farming में पौधों के आसपास खरपतवार और गंदगी कम रखने से भी कीटों के छिपने और बढ़ने की संभावना घटती है। यदि कीटों का प्रकोप अधिक हो, तो स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या उद्यान विभाग की सलाह से केवल पंजीकृत दवा का उपयोग करें। छिड़काव के समय निर्धारित मात्रा, सुरक्षा उपकरण और फल तुड़ाई से पहले की प्रतीक्षा अवधि का पालन जरूरी है। बिना आवश्यकता बार-बार कीटनाशक डालने से लागत बढ़ती है, लाभकारी कीटों को नुकसान होता है और फलों में रासायनिक अवशेष का खतरा बढ़ सकता है।
Dragon Fruit Farming में सनबर्न की समस्या
Dragon Fruit Farming की नई और कोमल शाखाएं बहुत तेज धूप तथा अधिक तापमान में झुलस सकती हैं। सनबर्न होने पर शाखाओं पर पीले, सफेद या हल्के भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में प्रभावित हिस्सा सूख सकता है और कमजोर ऊतक पर फफूंद या अन्य रोगों का संक्रमण बढ़ सकता है।
नए पौधों को शुरुआती अवस्था में हल्की छाया देना सनबर्न से बचाव में मदद करता है। नर्सरी से लाए गए पौधों को अचानक गहरी छाया से तेज धूप में नहीं रखना चाहिए, बल्कि धीरे-धीरे बाहरी वातावरण के अनुकूल बनाना चाहिए। शाखाओं को पोल और रिंग पर संतुलित रूप से फैलाने से भी एक ही हिस्से पर लगातार तेज धूप नहीं पड़ती।
गर्मियों में मिट्टी की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन पौधों को ठंडा रखने के लिए जरूरत से अधिक पानी देना सही उपाय नहीं है। अधिक सिंचाई से जड़ और तना सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ड्रिप सिंचाई, उचित मल्चिंग, हल्की छाया और अच्छी जल निकासी के माध्यम से पौधों को गर्मी से सुरक्षित रखना बेहतर होता है।
निष्कर्ष
Dragon Fruit Farming किसानों के लिए एक लाभकारी और लंबे समय तक आय देने वाली बागवानी फसल बन सकती है। इसकी सफलता केवल पौध लगाने पर नहीं, बल्कि सही किस्म, प्रमाणित पौध, मजबूत पोल सिस्टम, बेहतर जल निकासी, नियंत्रित सिंचाई, संतुलित पोषण और समय पर छंटाई पर निर्भर करती है।
खेती शुरू करने से पहले किसान को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, पानी की उपलब्धता और स्थानीय बाजार की मांग का अध्ययन करना चाहिए। पहली बार खेती करने वाले किसानों के लिए छोटे क्षेत्र से शुरुआत करना बेहतर रहता है, ताकि वे पौध प्रबंधन, परागण, रोग नियंत्रण, तुड़ाई और बिक्री का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकें। Dragon Fruit के पौधे अच्छी तरह स्थापित होने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन दे सकते हैं। सही समय पर फल की तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और बाजार तक पहुंच बनाने से बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ती है। वैज्ञानिक तकनीक और मजबूत मार्केटिंग योजना के साथ Dragon Fruit Farming किसानों की आय बढ़ाने का अच्छा माध्यम बन सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1.Dragon Fruit की खेती कब शुरू करनी चाहिए?
Dragon Fruit की रोपाई स्थानीय मौसम को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। बहुत तेज गर्मी, पाला और लगातार भारी बारिश के समय पौध लगाने से बचें। रोपाई से पहले पोल, ड्रिप सिंचाई और जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह तैयार होनी चाहिए।
2.Dragon Fruit के पौधे को पोल की जरूरत क्यों होती है?
Dragon Fruit एक चढ़ने वाला कैक्टस पौधा है, जिसकी शाखाएं अपने आप सीधी खड़ी नहीं रह सकतीं। मजबूत पोल और ऊपरी रिंग शाखाओं को सहारा देते हैं। रिंग से नीचे लटकने वाली शाखाओं पर फूल और फल बनने की संभावना अधिक रहती है।
3.Dragon Fruit में फल कब आना शुरू होता है?
फल आने का समय पौध की गुणवत्ता, किस्म, जलवायु और देखभाल पर निर्भर करता है। स्वस्थ कटिंग से तैयार पौधे उचित प्रबंधन में जल्दी फूल देना शुरू कर सकते हैं, लेकिन बेहतर व्यावसायिक उत्पादन पौधों के परिपक्व होने के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है।
4.Dragon Fruit की तुड़ाई कब करनी चाहिए?
फल का बाहरी रंग पूरी तरह विकसित होने और उसका आकार सामान्य होने पर तुड़ाई की जा सकती है। कई किस्मों में फूल आने के लगभग 31 से 36 दिन बाद फल तैयार हो सकता है। मौसम और किस्म के अनुसार इस अवधि में बदलाव संभव है।
5.क्या Dragon Fruit में ड्रिप सिंचाई जरूरी है?
ड्रिप सिंचाई अनिवार्य नहीं है, लेकिन व्यावसायिक खेती में काफी लाभकारी होती है। इससे पानी सीधे जड़ क्षेत्र तक पहुंचता है, जलभराव का खतरा घटता है और पानी की बचत होती है। ड्रिप के माध्यम से घुलनशील उर्वरक भी दिए जा सकते हैं।
6.Dragon Fruit की खेती में कितना मुनाफा हो सकता है?
Dragon Fruit Farming से होने वाला मुनाफा पौधों की उम्र, उपज, किस्म, फल की गुणवत्ता, बाजार भाव, पैकिंग, परिवहन और कुल उत्पादन लागत पर निर्भर करता है। किसान को खुदरा बाजार के भाव के बजाय अपने क्षेत्र में मिलने वाले वास्तविक खेत-स्तरीय मूल्य के आधार पर आय का अनुमान लगाना चाहिए।

