केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए पश्चिम बंगाल में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को तेजी से लागू कर रही है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) और एमएसएमई नवाचार योजना के माध्यम से राज्य के कारीगरों, शिल्पकारों, महिला उद्यमियों और नवाचार आधारित स्टार्टअप को आर्थिक सहायता, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान इन योजनाओं की प्रगति और उपलब्धियों की जानकारी दी।
सबसे महत्वपूर्ण पहल प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना है, जिसे 17 सितंबर 2023 को शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य उन पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाना है, जो अपने हाथों और पारंपरिक औजारों से आजीविका कमाते हैं। यह योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल उन्नयन, आधुनिक उपकरण, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा, आसान ऋण और विपणन सहायता जैसी सुविधाएं भी प्रदान करती है।
पश्चिम बंगाल में इस योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया 14 मई 2026 को तेज हुई, जब राज्य सरकार ने योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति और जिला कार्यान्वयन समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की। इसके बाद राज्य में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का औपचारिक क्रियान्वयन शुरू हो गया। इससे हजारों पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। इनमें बढ़ई, नाव निर्माता, कवच निर्माता, धातु कारीगर, औजार निर्माता, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार एवं पत्थर कारीगर, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, चटाई एवं झाड़ू बनाने वाले, पारंपरिक खिलौना निर्माता, नाई, माला बनाने वाले, धोबी, दर्जी तथा मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगर शामिल हैं। इन सभी को प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, बिना गारंटी के ऋण, डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन और विपणन सहायता प्रदान की जाएगी।
वहीं, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत भी पश्चिम बंगाल ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 8 अप्रैल 2015 से 26 जून 2026 तक राज्य में कुल 5.82 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं, जिनकी कुल राशि 3.55 लाख करोड़ रुपये है। मुद्रा योजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वालों, सूक्ष्म उद्यमों और नए व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों को बिना किसी बड़ी जमानत के ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इससे लाखों लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने या उसका विस्तार करने में मदद मिली है।
केंद्र सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी कई विशेष कदम उठाए हैं। सुंदरबन क्षेत्र की महिला उद्यमियों और मछुआरों सहित देशभर की महिलाओं को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक और संस्थागत सहायता प्रदान की जा रही है। सरकार का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों को मजबूती मिलेगी।
महिला उद्यमियों के लिए उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम सहायता पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। पंजीकरण कराने वाली महिला स्वामित्व वाली इकाइयों को मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के साथ-साथ प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण का लाभ मिलता है। इससे महिलाओं के लिए औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश करना और सरकारी सहायता प्राप्त करना आसान हो गया है।
बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सार्वजनिक खरीद नीति में भी महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम तीन प्रतिशत महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से करना अनिवार्य किया गया है। यह कदम महिला उद्यमियों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीटीएमएसई) के अंतर्गत महिला उद्यमियों को विशेष लाभ दिया जा रहा है। जहां सामान्य उद्यमों को 75 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज मिलती है, वहीं महिला स्वामित्व वाले उद्यमों को 90 प्रतिशत तक की गारंटी प्रदान की जाती है। इसके अलावा वार्षिक गारंटी शुल्क में भी 10 प्रतिशत की छूट दी जाती है। इससे महिलाओं के लिए बैंक ऋण प्राप्त करना अधिक आसान और किफायती बनता है।
इसी प्रकार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत भी महिलाओं को विशेष श्रेणी में रखा गया है। महिला लाभार्थियों को परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत तक की मार्जिन मनी सब्सिडी मिल सकती है, जबकि सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए यह 25 प्रतिशत है। साथ ही महिलाओं को परियोजना लागत का केवल 5 प्रतिशत स्वयं निवेश करना होता है, जबकि सामान्य श्रेणी के लिए यह 10 प्रतिशत निर्धारित है। इससे महिलाओं को कम पूंजी में अपना उद्योग स्थापित करने का अवसर मिलता है।
सरकार कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। नारियल जटा उद्योग में कार्यरत महिला कारीगरों के लिए कौशल उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि उनकी उत्पादकता बढ़े और वे आधुनिक तकनीकों से परिचित हो सकें। इसके अतिरिक्त खरीद एवं विपणन सहायता योजना के तहत घरेलू व्यापार मेलों में भाग लेने वाली महिला उद्यमियों को स्वीकार्य खर्च का 100 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग दिया जाता है, जबकि अन्य उद्यमियों के लिए यह सीमा 80 प्रतिशत है।
महिला कारीगर प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत भी पात्र हैं। यदि वे अधिसूचित 18 पारंपरिक व्यवसायों में कार्यरत हैं, तो उन्हें कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, बिना गारंटी के ऋण, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता जैसी सुविधाएं प्राप्त होंगी। इससे महिला कारीगरों को अपनी आय बढ़ाने और अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए यशस्विनी अभियान भी संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से मौजूदा और नई महिला उद्यमियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, मार्गदर्शन, परामर्श, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सफल उद्यमी के रूप में विकसित करना है।
नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए एमएसएमई मंत्रालय की एमएसएमई नवाचार योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना का इनक्यूबेशन घटक नए विचारों को व्यावसायिक उद्यमों में बदलने में सहायता करता है। इसके तहत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों और नवाचार केंद्रों को मेजबान संस्थान (होस्ट इंस्टीट्यूशन) के रूप में मान्यता दी जाती है, जहां नवाचार आधारित परियोजनाओं को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
पश्चिम बंगाल में वर्तमान समय में 23 मेजबान संस्थान कार्यरत हैं। इन संस्थानों के माध्यम से चयनित प्रत्येक नवाचार आधारित परियोजना को अधिकतम 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है। इससे राज्य में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को रोजगार सृजित करने वाले नए व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, मुद्रा योजना और एमएसएमई नवाचार योजना का संयुक्त प्रभाव पश्चिम बंगाल के पारंपरिक उद्योगों, सूक्ष्म उद्यमों और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा देगा। कारीगरों को आधुनिक तकनीक, सस्ती वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार उपलब्ध होने से उनकी आय में वृद्धि होगी। वहीं महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन मिलने से राज्य में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की संख्या भी बढ़ने की संभावना है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य इन योजनाओं के माध्यम से पारंपरिक कौशल को संरक्षित करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने का है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो पश्चिम बंगाल का एमएसएमई क्षेत्र आने वाले वर्षों में राज्य की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

