भारतीय आमों के निर्यात क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए उत्तर प्रदेश से पहली बार समुद्री मार्ग के जरिए 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आमों की सफल व्यावसायिक खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई पहुंची है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अब भारतीय आमों का लंबी दूरी तक समुद्री मार्ग से भी गुणवत्ता बनाए रखते हुए किफायती निर्यात संभव है। इस सफलता से न केवल निर्यातकों की परिवहन लागत कम होगी, बल्कि आम उत्पादक किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
यह उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल के सफल परीक्षण का परिणाम है। इस तकनीक के माध्यम से उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 40 फुट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में आमों को समुद्र के रास्ते दुबई भेजा गया।
यह खेप अमरोहा की शहनाज़ एक्सपोर्ट द्वारा अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से तैयार की गई और इसे यूएई की प्रमुख खुदरा श्रृंखला लुलु ग्रुप को निर्यात किया गया। पूरी प्रक्रिया में आईसीएआर-सीआईएसएच ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया, जबकि एपीईडीए ने निर्यात प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक भारतीय आमों का निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से किया जाता था, क्योंकि यह माना जाता था कि समुद्री यात्रा के दौरान लंबे समय तक फल सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। हालांकि हवाई परिवहन की लागत काफी अधिक होने के कारण निर्यात सीमित रहता था। नई तकनीक के सफल परीक्षण ने इस धारणा को बदल दिया है और भारतीय आमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खोल दिए हैं।
इस निर्यात के लिए आमों की 22 जून 2026 को वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई की गई। इसके बाद फलों को कटाई के बाद की वैज्ञानिक प्रबंधन प्रणाली के तहत संभाला गया। आमों को आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित ‘मेटवॉश’ तकनीक से उपचारित किया गया, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके। इसके बाद गुणवत्ता के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से उनकी ग्रेडिंग की गई और अमरोहा स्थित आधुनिक पैक हाउस में पैक किया गया। फिर इन्हें 40 फुट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में लोड कर लगातार नियंत्रित तापमान वाली कोल्ड चेन व्यवस्था के साथ समुद्री मार्ग से दुबई भेजा गया।
हालांकि यात्रा के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के कारण जहाज के संचालन में कुछ देरी हुई, जिसके चलते खेप को दुबई पहुंचने में अपेक्षा से अधिक समय लगा। आम 17 जुलाई 2026 को गंतव्य बाजार पहुंचे। इस प्रकार तुड़ाई से लेकर बाजार तक कुल 25 दिन का लंबा परिवहन समय लगा। इसके बावजूद सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दुबई पहुंचने पर लगभग 90 प्रतिशत आम पूरी तरह अच्छी और बिक्री योग्य स्थिति में पाए गए। यह परिणाम समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता और वैज्ञानिक प्रबंधन की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है।
इस उपलब्धि का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने वाला है। समुद्री परिवहन की लागत हवाई माल ढुलाई की तुलना में काफी कम होती है। परिवहन खर्च घटने से निर्यातकों को किसानों को बेहतर मूल्य देने का अवसर मिला। जानकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था के कारण आम उत्पादकों को पारंपरिक निर्यात प्रणाली की तुलना में प्रति किलोग्राम लगभग 15 से 20 रुपये अतिरिक्त कीमत प्राप्त हुई। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर अवसर उपलब्ध हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री मार्ग से आमों का निर्यात बड़े पैमाने पर शुरू होता है, तो उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य आम उत्पादक राज्यों के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कम परिवहन लागत के कारण भारतीय आम वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और उनकी मांग बढ़ने की संभावना है।
यह उत्तर प्रदेश से दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है, जिसने गुणवत्ता बनाए रखते हुए 25 दिनों की लंबी यात्रा पूरी की। इससे यह साबित हो गया है कि वैज्ञानिक तकनीक, उचित पैकिंग, नियंत्रित तापमान और आधुनिक कोल्ड चेन प्रबंधन के जरिए भारतीय आमों को समुद्र के रास्ते सुरक्षित रूप से विदेश भेजा जा सकता है।
इस सफलता से खाड़ी देशों के अलावा यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय आमों के निर्यात की नई संभावनाएं खुल सकती हैं। अब निर्यातकों को केवल महंगे हवाई परिवहन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। समुद्री मार्ग अपनाने से बड़ी मात्रा में आमों का निर्यात कम लागत पर संभव होगा, जिससे भारत के ताजे फलों का वैश्विक बाजार और मजबूत होगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल एक सफल निर्यात नहीं, बल्कि भारतीय बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, बेहतर पैकिंग, प्रभावी कोल्ड चेन और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत अब अपने कृषि उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर वैश्विक बाजार में नई पहचान दिला सकता है।
आईसीएआर-सीआईएसएच और एपीईडीए द्वारा विकसित यह समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और अन्य आम उत्पादक राज्यों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, निर्यात लागत घटेगी और भारत के प्रीमियम आमों की पहुंच दुनिया के अधिक देशों तक सुनिश्चित होगी।
इस सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और सरकारी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। समुद्री मार्ग से आमों के सफल निर्यात की यह उपलब्धि भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

