• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

Bulandshahr Gomutra Purchase Project: बुलंदशहर में मिलेंगे ₹10 प्रति लीटर, 300 महिलाएं बनीं शेयरहोल्डर

Bulandshahr Cow Urine Purchase Project: Cow urine to fetch ₹10 per litre in Bulandshahr; 300 women have become shareholders.

Fiza by Fiza
August 11, 2026
in कृषि समाचार
0
Bulandshahr Gomutra Purchase Project

Bulandshahr Gomutra Purchase Project

0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

Bulandshahr Gomutra Purchase Project: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गो संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की दिशा में एक नया प्रयोग शुरू किया गया है। स्याना तहसील के नरसैना गांव में किसान उत्पादक संगठन यानी FPO के माध्यम से पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। इस पायलट प्रोजेक्ट से आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है और करीब 300 ग्रामीण महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है।

उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक खेती से जोड़ने की दिशा में बुलंदशहर का एक नया मॉडल चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो संरक्षण, प्राकृतिक खेती और महिला सशक्तीकरण से जुड़े विजन के तहत बुलंदशहर जिले में गोमूत्र खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस मॉडल की खास बात यह है कि गोमूत्र को केवल गोवंश से मिलने वाले एक उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि किसानों और पशुपालकों के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।

बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में किसान उत्पादक संगठन यानी Farmer Producer Organisation (FPO) ने इसकी शुरुआत की है। डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में चल रही इस पहल के तहत पशुपालकों से फिलहाल 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है।

योजना से नरसैना और आसपास के कुल 15 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। गांवों में गोमूत्र संग्रह केंद्र और विशेष टैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस Bulandshahr Gomutra Purchase Project में ग्रामीण महिलाओं को सीधे आर्थिक गतिविधि से जोड़ा गया है। करीब 300 महिलाओं को मॉडल में शेयरहोल्डर बनाया गया है और गोमूत्र संग्रह में सहयोग करने पर उन्हें अलग से कमीशन भी दिया जा रहा है।

बुलंदशहर में 10 रुपये प्रति लीटर बिक रहा गोमूत्र

आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालन से होने वाली आय का मुख्य स्रोत दूध माना जाता है। लेकिन बुलंदशहर में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट इस पारंपरिक मॉडल को विस्तार देने का प्रयास है। इसके तहत गोवंश से मिलने वाले गोमूत्र का भी आर्थिक उपयोग किया जा रहा है।

एफपीओ पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर गोमूत्र खरीद रहा है। यानी किसी पशुपालक से यदि प्रतिदिन पांच लीटर गोमूत्र खरीदा जाता है, तो मौजूदा खरीद दर के अनुसार इससे 50 रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।

यह आय दूध या अन्य पशुपालन गतिविधियों से होने वाली आमदनी से अलग होगी। इसी कारण योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

पायलट प्रोजेक्ट के विस्तार और इससे तैयार उत्पादों की मांग बढ़ने की स्थिति में गोमूत्र की खरीद कीमत बढ़ाने की भी योजना है। भविष्य में खरीद दर को 10 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर तक करने की योजना बताई गई है। यदि यह व्यवस्था बड़े स्तर पर सफल होती है, तो इससे गोपालकों के लिए गोवंश पालन की आर्थिक उपयोगिता बढ़ सकती है।

प्रतिदिन इकट्ठा हो रहा करीब 500 लीटर गोमूत्र

बुलंदशहर के नरसैना गांव से शुरू हुए इस मॉडल में गोमूत्र संग्रह के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाई गई है। वर्तमान में इस नेटवर्क के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है।

इस हिसाब से मौजूदा 10 रुपये प्रति लीटर की खरीद दर पर प्रतिदिन करीब 5,000 रुपये का गोमूत्र पशुपालकों से खरीदा जा रहा है। यदि संग्रह का यही औसत बना रहता है, तो 30 दिनों में करीब 15,000 लीटर गोमूत्र संग्रह हो सकता है, जिसकी मौजूदा खरीद दर के आधार पर कीमत लगभग 1.50 लाख रुपये बैठती है। हालांकि वास्तविक संग्रह और भुगतान की मात्रा प्रतिदिन उपलब्ध गोमूत्र तथा अन्य परिचालन परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।

प्रोजेक्ट की खासियत केवल गोमूत्र खरीदना नहीं है। इसके बाद गोमूत्र की प्रोसेसिंग करके खेती में इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक उत्पाद तैयार करने की योजना भी इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

15 गांवों को जोड़ा गया, गांव में ही मिलेगा खरीद केंद्र

गोमूत्र खरीद की व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने के लिए नरसैना और आसपास के गांवों को नेटवर्क के रूप में जोड़ा गया है। अभी इस पहल में आसपास के करीब 15 गांव शामिल किए गए हैं। गांवों में स्थानीय संग्रह केंद्र बनाए गए हैं ताकि पशुपालकों को गोमूत्र लेकर किसी दूर स्थित प्रोसेसिंग यूनिट या बाजार तक न जाना पड़े।

गोमूत्र के संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले विशेष टैंक लगाए गए हैं। पशुपालक स्थानीय स्तर पर इन केंद्रों तक गोमूत्र पहुंचा सकते हैं, जहां से आगे इसे एकत्र कर प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है।

स्थानीय संग्रह केंद्र बनाने के पीछे एक बड़ा कारण परिवहन की समस्या को कम करना है। यदि थोड़ी मात्रा में गोमूत्र बेचने के लिए पशुपालक को कई किलोमीटर दूर जाना पड़े, तो परिवहन में लगने वाला समय और खर्च इस गतिविधि को आर्थिक रूप से कम आकर्षक बना सकता है।इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए गांव के पास ही Gomutra Collection Centre बनाने का मॉडल अपनाया गया है।

300 ग्रामीण महिलाएं बनीं शेयरहोल्डर

बुलंदशहर के इस गोमूत्र खरीद प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तीकरण है। योजना में ग्रामीण महिलाओं को केवल श्रमिक या संग्रहकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक मॉडल का भागीदार बनाने की कोशिश की गई है।

करीब 300 महिलाओं को इस पहल से जोड़कर शेयरहोल्डर बनाया गया है। इन महिलाओं की गोमूत्र संग्रह और स्थानीय स्तर पर योजना के संचालन में भूमिका तय की गई है। इससे महिलाओं को अपने गांव में रहते हुए आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिल रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं पहले से पशुपालन और गोवंश की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में गोमूत्र संग्रह की व्यवस्था को उनके साथ जोड़ने से मौजूदा पशुपालन गतिविधियों के माध्यम से ही अतिरिक्त आय का रास्ता तैयार किया जा सकता है।

महिलाओं को प्रति लीटर 2 रुपये कमीशन

महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाने के साथ-साथ गोमूत्र संग्रह में उनके योगदान के लिए आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, गोमूत्र संग्रह में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये का कमीशन दिया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गांवों में गोमूत्र संग्रह का मजबूत नेटवर्क तैयार करने के साथ महिलाओं को नियमित अतिरिक्त आमदनी से जोड़ना है। यदि किसी महिला के माध्यम से प्रतिदिन 20 लीटर गोमूत्र संग्रह होता है तो दो रुपये प्रति लीटर की दर से 40 रुपये का कमीशन बनता है। संग्रह की मात्रा अधिक होने पर यह आय भी बढ़ सकती है। इस तरह Gomutra Purchase in Uttar Pradesh का यह मॉडल गो संरक्षण के साथ ग्रामीण महिला सशक्तीकरण को जोड़ने की कोशिश करता दिखाई देता है।

गोमूत्र में जड़ी-बूटियां मिलाकर तैयार होंगे कृषि उत्पाद

पशुपालकों से खरीदे गए गोमूत्र का आगे क्या होगा? इस परियोजना में इसका जवाब प्राकृतिक खेती से जुड़ा है। एकत्र किए गए गोमूत्र में अलग-अलग प्रकार की जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेती में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उद्देश्य किसानों को रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पाद उपलब्ध कराना है। तैयार उत्पादों को समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

इससे एक तरह का ग्रामीण आर्थिक चक्र बनाने की कोशिश है। गांव का पशुपालक गोमूत्र उपलब्ध कराता है, स्थानीय महिलाएं संग्रह व्यवस्था से जुड़ती हैं, एफपीओ इसकी खरीद और प्रोसेसिंग करता है और इससे तैयार उत्पाद वापस किसानों तक पहुंचाए जाते हैं।

इस प्रकार गो संरक्षण, FPO, प्राकृतिक खेती, पशुपालन और महिला सशक्तीकरण को एक ही आर्थिक मॉडल से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

प्राकृतिक खेती को मिल सकता है बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए गो-आधारित कृषि उत्पादों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।

बुलंदशहर का यह पायलट प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक स्थानीय आर्थिक मॉडल पेश करता है। यदि गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पाद किसानों के लिए उपयोगी, सुलभ और आर्थिक रूप से व्यवहारिक साबित होते हैं, तो इनके लिए स्थानीय बाजार विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है।

इससे गोमूत्र खरीदने वाले एफपीओ के लिए भी राजस्व का स्रोत तैयार होगा। यानी केवल सरकारी या संस्थागत सहायता पर निर्भर रहने के बजाय उत्पादों की बिक्री के माध्यम से मॉडल को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने का रास्ता खोजा जा सकता है।

गो संरक्षण को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश

गो संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के सामने एक प्रमुख चुनौती आर्थिक स्थिरता की होती है। गोवंश के भोजन, देखभाल, स्वास्थ्य और आश्रय पर लगातार खर्च होता है।ऐसे में गोवंश से मिलने वाले दूध के अलावा गोबर और गोमूत्र जैसे उत्पादों का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ने पर पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आमदनी की संभावना पैदा हो सकती है।

बुलंदशहर में शुरू हुआ गोमूत्र खरीद पायलट प्रोजेक्ट इसी विचार पर आधारित है। गोमूत्र की निश्चित खरीद व्यवस्था होने पर पशुपालक इसे अनुपयोगी समझकर छोड़ने के बजाय संग्रह कर आय प्राप्त कर सकते हैं। भविष्य में यदि खरीद मूल्य 20 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचता है और संग्रह नेटवर्क का विस्तार होता है, तो इससे ग्रामीण स्तर पर नई आर्थिक गतिविधि विकसित हो सकती है। हालांकि इसकी दीर्घकालिक सफलता गोमूत्र से तैयार उत्पादों की गुणवत्ता, किसानों की मांग, उत्पादन लागत, बाजार और खरीद व्यवस्था की निरंतरता पर निर्भर करेगी।

FPO क्यों है इस मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा?

किसान उत्पादक संगठन यानी FPO किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, खरीद, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसी गतिविधियों से जोड़ने का माध्यम है। बुलंदशहर में गोमूत्र खरीद के लिए FPO मॉडल अपनाने से बड़ी संख्या में छोटे पशुपालकों को एक नेटवर्क में जोड़ना आसान हो सकता है।

अकेले पशुपालक के लिए कुछ लीटर गोमूत्र को प्रोसेस करना और उससे तैयार उत्पाद बाजार में बेचना मुश्किल हो सकता है। लेकिन सैकड़ों पशुपालकों से सामूहिक रूप से गोमूत्र खरीदकर बड़ी मात्रा में प्रोसेसिंग करने पर व्यवसाय का पैमाना बढ़ जाता है। इसी तरह महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाने से स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ाई जा सकती है। कारण है कि Bulandshahr FPO Gomutra Model को केवल खरीद योजना नहीं, बल्कि सामुदायिक ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

गो सेवा आयोग ने मॉडल को लेकर क्या कहा?

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, यह मॉडल रासायनिक उत्पादों का विकल्प उपलब्ध कराने के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। गोमूत्र आधारित उत्पादों को खेती में उपयोग के लिए तैयार करके किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था इस परियोजना का अहम हिस्सा है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर आगे इसके विस्तार की योजना बनाई जा सकती है।

इसका मतलब है कि बुलंदशहर का प्रयोग सफल रहने पर उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसी तरह के Gomutra Collection Centres, FPO Network और Natural Farming Products आधारित मॉडल देखने को मिल सकते हैं।

सफल हुआ बुलंदशहर मॉडल तो पूरे यूपी में हो सकता है विस्तार

फिलहाल यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसलिए आने वाले समय में इसके परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। यदि पशुपालकों से नियमित गोमूत्र संग्रह, समय पर भुगतान, महिलाओं की भागीदारी, प्रोसेसिंग और तैयार उत्पादों की बिक्री का पूरा चक्र सफल रहता है तो मॉडल को प्रदेश के अन्य हिस्सों में विस्तार दिया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार पशुपालन से जुड़े हैं। ऐसे में स्थानीय FPO के माध्यम से गोमूत्र और गोबर जैसे गो-आधारित उत्पादों के लिए बाजार विकसित होने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही व्यवस्था में कई उद्देश्यों को जोड़ने की कोशिश की गई है। इनमें गो संरक्षण, पशुपालकों की आय, महिला सशक्तीकरण, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण रोजगार और FPO आधारित स्थानीय उद्यम शामिल हैं।

अब नजर बुलंदशहर के पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों पर रहेगी। यदि गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों की बाजार में पर्याप्त मांग बनती है और खरीद व्यवस्था आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित होती है, तो नरसैना गांव से शुरू हुआ यह प्रयोग उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों तक पहुंच सकता है।

एक नजर में बुलंदशहर गोमूत्र खरीद योजना

  • स्थान: नरसैना गांव, स्याना तहसील, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश
  • मॉडल: किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से गोमूत्र खरीद
  • मौजूदा खरीद दर: 10 रुपये प्रति लीटर
  • प्रस्तावित भविष्य की दर: 20 रुपये प्रति लीटर तक
  • प्रतिदिन संग्रह: करीब 500 लीटर
  • योजना से जुड़े गांव: लगभग 15
  • संग्रह टैंक की क्षमता: 200 लीटर
  • महिला शेयरहोल्डर: करीब 300
  • महिलाओं के लिए कमीशन: 2 रुपये प्रति लीटर
  • गोमूत्र का उपयोग: जड़ी-बूटियों के साथ कृषि उपयोगी प्राकृतिक उत्पाद तैयार करने में
  • मुख्य उद्देश्य: गो संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पशुपालकों की अतिरिक्त आय और महिला सशक्तीकरण
  • अगला चरण: पायलट की सफलता के आधार पर उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विस्तार

 

Tags: Bulandshahr Gomutra PurchaseCow Urine Purchase PriceFPO BulandshahrGomutra Collection CentreNatural Farming UPUP Cow ConservationUP Gomutra PriceYogi Adityanathगो संरक्षण उत्तर प्रदेशगोमूत्र 10 रुपये लीटरगोमूत्र खरीद उत्तर प्रदेशपशुपालक आयप्राकृतिक खेती उत्तर प्रदेशबुलंदशहर गोमूत्र योजनामहिला सशक्तीकरण उत्तर प्रदेश
Previous Post

Dr. Srinivasa Kumar Tummala बने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नए सचिव, Deep Ocean Mission और Climate Resilience को मिलेगी नई गति

Next Post

Dr. Srinivasa Kumar Tummala बने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नए सचिव, Deep Ocean Mission और Climate Resilience को मिलेगी नई गति

Next Post
Science और Society के बीच मजबूत होगा संबंध

Dr. Srinivasa Kumar Tummala बने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नए सचिव, Deep Ocean Mission और Climate Resilience को मिलेगी नई गति

Recent Posts

  • Tripura से Dubai पहुंचा पहली बार Mustard Honey, Dergang FPO ने किया 1 MT का Export; किसानों के लिए खुले अंतरराष्ट्रीय बाजार के रास्ते
  • North India Weather Update: अगले दो दिन उत्तर भारत में बारिश का जोर, लो प्रेशर और मॉनसून ट्रफ से बिगड़ सकता है मौसम
  • Dr. Srinivasa Kumar Tummala बने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नए सचिव, Deep Ocean Mission और Climate Resilience को मिलेगी नई गति
  • Bulandshahr Gomutra Purchase Project: बुलंदशहर में मिलेंगे ₹10 प्रति लीटर, 300 महिलाएं बनीं शेयरहोल्डर
  • Dr. Srinivasa Kumar Tummala बने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नए सचिव, Deep Ocean Mission और Climate Resilience को मिलेगी नई गति

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.