Saras Dairy Alwar : राजस्थान के अलवर जिले के पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के लिए डेयरी सेक्टर से जुड़ी बड़ी घोषणा सामने आई है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अलवर में 5 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता वाली सरस डेयरी स्थापित की जाएगी। इस परियोजना के लिए भूमि पूजन हो चुका है और इसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। नई डेयरी से अलवर और आसपास के क्षेत्रों में दूध उत्पादन, संग्रह, प्रसंस्करण और पशुपालकों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।
अमित शाह ने सहकारिता और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पशुपालकों को उनके दूध का पैसा समय पर और सीधे बैंक खाते में मिलने से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने अलवर में पशुपालक महिलाओं से हुई बातचीत का भी उल्लेख किया और दूध के भुगतान का समय 15 दिन से घटाकर सात दिन करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही।
अलवर में बनेगी 5 लाख लीटर क्षमता वाली सरस डेयरी
अलवर में प्रस्तावित सरस डेयरी प्लांट की प्रतिदिन दूध क्षमता 5 लाख लीटर होगी। इतनी बड़ी प्रसंस्करण क्षमता वाला डेयरी प्लांट शुरू होने से क्षेत्र में संगठित दूध संग्रह व्यवस्था को विस्तार मिलने की संभावना है। स्थानीय पशुपालकों के लिए दूध बेचने का एक मजबूत सहकारी नेटवर्क तैयार होने के साथ दूध की प्रोसेसिंग और डेयरी उत्पादों के निर्माण की क्षमता भी बढ़ सकती है।
अमित शाह के अनुसार परियोजना का भूमि पूजन किया जा चुका है और अब इसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। इस डेयरी परियोजना को केवल दूध प्रसंस्करण संयंत्र के रूप में नहीं, बल्कि अलवर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन क्षेत्र से जुड़े बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन बड़ी संख्या में परिवारों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों को दूध की बिक्री से नियमित आमदनी मिलती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बड़ी डेयरी प्रसंस्करण क्षमता विकसित होने से दूध संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों को संगठित डेयरी नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
हजारों पशुपालकों को मिल सकता है फायदा
अलवर सरस डेयरी से क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। नई डेयरी के जरिए दूध संग्रह से लेकर प्रोसेसिंग तक की व्यवस्था का विस्तार होने पर गांवों में डेयरी सहकारी समितियों की भूमिका भी बढ़ सकती है।
डेयरी व्यवसाय की खासियत यह है कि यह किसानों और पशुपालकों को अपेक्षाकृत नियमित नकदी प्रवाह उपलब्ध करा सकता है। फसल से आय के लिए किसान को कई महीनों तक इंतजार करना पड़ सकता है, जबकि दूध की बिक्री नियमित रूप से होती है। इसलिए समय पर भुगतान पशुपालक परिवारों की घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है।
अमित शाह ने इसी पहलू पर जोर देते हुए कहा कि दूध की बिक्री का पैसा पशुपालकों के खाते में पहुंचने पर उसका फायदा पूरे परिवार को मिलता है। इससे घरेलू खर्च, पशुओं के चारे, बच्चों की शिक्षा और खेती से जुड़ी दूसरी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
दूध का भुगतान 15 दिन नहीं, 7 दिन में करने की कोशिश
अलवर के पशुपालकों के लिए सबसे अहम घोषणाओं में दूध के भुगतान की अवधि कम करने की बात भी शामिल रही। अमित शाह ने बताया कि अलवर की पशुपालक महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि दूध का भुगतान करीब 15 दिन में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरस डेयरी के जरिए दूध भुगतान की अवधि को घटाकर सात दिन करने का प्रयास किया जाएगा। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो पशुपालकों को अपने दूध का पैसा पहले की तुलना में जल्दी मिल सकेगा।
पशुपालन में पशु आहार, हरा चारा, सूखा चारा और पशुओं की देखभाल जैसे खर्च लगातार होते हैं। ऐसे में भुगतान का समय कम होने से पशुपालकों के लिए नकदी प्रबंधन आसान हो सकता है। खास तौर पर छोटे पशुपालकों के लिए नियमित और समय पर मिलने वाला भुगतान महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
गुजरात के डेयरी मॉडल का दिया उदाहरण
अमित शाह ने राजस्थान में सहकारी डेयरी व्यवस्था के विस्तार की चर्चा करते हुए गुजरात के डेयरी मॉडल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात में लाखों महिलाएं सहकारिता और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं तथा दूध उत्पादन के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।
उनका कहना था कि सहकारिता के जरिए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन में महिलाओं की बड़ी भूमिका होती है। जब दूध की बिक्री संगठित सहकारी व्यवस्था से होती है और उसका भुगतान बैंक खातों में पहुंचता है, तो इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिल सकता है।
अलवर सहित राजस्थान के दूसरे जिलों में सहकारी डेयरी नेटवर्क का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई डेयरी क्षमता विकसित होने पर ज्यादा पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को औपचारिक नेटवर्क से जोड़ने का अवसर मिल सकता है।
राजस्थान में सेक्स सॉर्टेड सीमेन उत्पादन की योजना पर जोर
डेयरी सेक्टर को लेकर अमित शाह ने सेक्स सॉर्टेड सीमेन उत्पादन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान सरकार इसके लिए भूमि उपलब्ध कराती है, तो राज्य में ही सेक्स सॉर्टेड सीमेन तैयार करने की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
इस तकनीक का उद्देश्य पशुपालन में अधिक संख्या में मादा बछिया प्राप्त करने की संभावना को बढ़ाना है। डेयरी उद्योग में मादा पशुओं की संख्या बढ़ने का सीधा संबंध भविष्य की दूध उत्पादन क्षमता से होता है। इसलिए उन्नत प्रजनन तकनीकों को डेयरी सेक्टर के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजस्थान में स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधा विकसित होने पर पशुपालकों को उन्नत पशु प्रजनन सेवाओं से जोड़ने और बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली पशु नस्लों को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।
पशु बीमा योजना का भी किया जिक्र
अमित शाह ने अपने संबोधन में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पशु बीमा योजना का भी उल्लेख किया। पशुपालकों के लिए पशु केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति भी होते हैं। ऐसे में पशु बीमा व्यवस्था आर्थिक जोखिम को कम करने में भूमिका निभा सकती है।
डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केवल नए प्लांट स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं होता। इसके साथ पशुओं की सेहत, नस्ल सुधार, चारे की उपलब्धता, बीमा, दूध संग्रह, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण और समय पर भुगतान जैसी व्यवस्थाओं का मजबूत होना भी जरूरी है। अमित शाह ने डेयरी और सहकारिता के विस्तार को भविष्य में दुग्ध उत्पादों के लिए बड़े बाजार और निर्यात की संभावनाओं से भी जोड़ा।
अलवर ही नहीं, राजस्थान के इन जिलों में भी नए डेयरी प्लांट
राजस्थान में डेयरी नेटवर्क के विस्तार की योजना केवल अलवर तक सीमित नहीं है। अमित शाह ने कहा कि भीलवाड़ा, जयपुर, पाली और राजसमंद में भी सरस डेयरी के नए प्लांट शुरू किए जा रहे हैं।
अलग-अलग जिलों में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता बढ़ने से राज्य के दूध उत्पादन नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की बेहतर सुविधा उपलब्ध होने पर दूध को लंबी दूरी तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है और वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों के उत्पादन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
दूध से दही, छाछ, घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इसलिए प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने का फायदा केवल कच्चे दूध की खरीद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी डेयरी वैल्यू चेन को इसका लाभ मिल सकता है।
राजस्थान में सहकारिता नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने राजस्थान में सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में करीब चार हजार सहकारी समितियां हैं और लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें कोई गांव सहकारिता से अछूता न रहे।
सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों को सामूहिक व्यवस्था से जोड़ने का माध्यम बनती हैं। डेयरी सहकारी समितियों के जरिए गांवों से दूध संग्रह किया जा सकता है और किसानों को बड़े बाजार तथा प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़ा जा सकता है।
इसके साथ ही सहकारी समितियां कृषि ऋण, भंडारण, खाद-बीज और दूसरी ग्रामीण सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में भी भूमिका निभाती हैं। इसी कारण सरकार सहकारिता नेटवर्क को ग्रामीण आर्थिक ढांचे के विस्तार से जोड़ रही है।
चार जिलों में जिला सहकारी बैंकों का उल्लेख
अमित शाह ने फलोदी, बालोतरा, डीडवाना और प्रतापगढ़ में जिला सहकारी बैंकों की शुरुआत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से किसानों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य है।
किसानों और पशुपालकों के लिए संस्थागत ऋण तक पहुंच महत्वपूर्ण है। पशुपालन का विस्तार करने के लिए नए पशुओं की खरीद, पशु शेड, चारा प्रबंधन और अन्य सुविधाओं पर निवेश की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सहकारी बैंक और ग्रामीण वित्तीय संस्थाएं छोटे किसानों तथा पशुपालकों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ सकती हैं।
सहकारी बैंकिंग और डेयरी नेटवर्क को साथ-साथ बढ़ाने से ग्रामीण स्तर पर उत्पादन और वित्त दोनों से संबंधित व्यवस्थाओं को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
गोदाम और सहकारी समितियों के विस्तार पर फोकस
राजस्थान में सहकारिता नेटवर्क के साथ गोदामों के विस्तार की बात भी सामने आई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भंडारण व्यवस्था किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती है। पर्याप्त भंडारण सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को अपनी उपज के प्रबंधन में ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं।
डेयरी क्षेत्र में भी मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। दूध जल्दी खराब होने वाला उत्पाद है, इसलिए संग्रह केंद्र, चिलिंग सुविधा, परिवहन और प्रोसेसिंग यूनिट का आपस में जुड़ा होना जरूरी है। अलवर की 5 लाख लीटर क्षमता वाली सरस डेयरी इसी बड़े डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क का हिस्सा बन सकती है।
पशुपालक महिलाओं की भूमिका पर खास जोर
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। पशुओं को चारा देने, दूध निकालने और उनकी रोजमर्रा की देखभाल में महिलाएं सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसी वजह से डेयरी सहकारिता का विस्तार ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से भी जुड़ता है।
अमित शाह ने अलवर में पशुपालक महिलाओं के साथ बातचीत का उल्लेख करते हुए दूध भुगतान की अवधि पर जानकारी मिलने की बात कही। सात दिन में भुगतान की व्यवस्था का प्रयास इसी बातचीत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने आया।
यदि दूध संग्रह और डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विस्तार होता है, तो इससे ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय के औपचारिक आर्थिक नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
डेयरी से ग्रामीण रोजगार बढ़ने की उम्मीद
नए डेयरी प्लांट का असर केवल दूध बेचने वाले पशुपालकों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। बड़े डेयरी प्लांट के संचालन के लिए दूध संग्रह, परिवहन, गुणवत्ता जांच, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, वितरण और अन्य सेवाओं की आवश्यकता होती है।
इससे स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। दूध संग्रह केंद्रों और सहकारी समितियों के विस्तार से गांवों में भी रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं। इसके अलावा पशु आहार, पशु चिकित्सा, डेयरी उपकरण और परिवहन जैसी सहायक गतिविधियों की मांग भी डेयरी नेटवर्क के विस्तार के साथ बढ़ सकती है।
किसानों के लिए सरकारी योजनाओं का भी उल्लेख
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में किसानों के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कृषि, सिंचाई, फसल बीमा, किसान सम्मान निधि, कृषि आधारभूत ढांचे और सहकारिता के क्षेत्र में किए गए कार्यों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। डेयरी और पशुपालन को खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अलवर की नई सरस डेयरी क्यों है महत्वपूर्ण?
अलवर में बनने वाली 5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता की सरस डेयरी कई स्तर पर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पहली बात, इससे स्थानीय दूध की बड़ी मात्रा को संगठित रूप से संग्रह और प्रोसेस करने की क्षमता तैयार होगी। दूसरी, पशुपालकों के लिए दूध बेचने का सहकारी नेटवर्क मजबूत हो सकता है। तीसरी, भुगतान का समय घटाकर सात दिन करने का प्रयास पशुपालकों के नकदी प्रवाह में सुधार कर सकता है। इसके अलावा उन्नत पशु प्रजनन तकनीक, पशु बीमा और सहकारी समितियों का विस्तार एक साथ होने पर राजस्थान के डेयरी सेक्टर में व्यापक बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं। अलवर के साथ भीलवाड़ा, जयपुर, पाली और राजसमंद में नए सरस डेयरी प्लांट शुरू किए जाने की योजना राज्य की दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
राजस्थान के डेयरी सेक्टर को मिल सकती है नई रफ्तार
राजस्थान पहले से ही पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की मजबूत परंपरा वाला राज्य है। ऐसे में नई प्रोसेसिंग क्षमता, सहकारी नेटवर्क, पशु बीमा और उन्नत प्रजनन तकनीक पर एक साथ काम होने से डेयरी अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
अलवर में प्रस्तावित सरस डेयरी की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि प्लांट कितनी जल्दी तैयार होता है, दूध संग्रह नेटवर्क कितने गांवों तक पहुंचता है और पशुपालकों को भुगतान व्यवस्था में कितना सुधार मिलता है।
फिलहाल अलवर सरस डेयरी, 5 लाख लीटर दूध क्षमता, सात दिन में दूध भुगतान, राजस्थान डेयरी प्लांट और पशुपालकों की आय से जुड़ी घोषणाओं ने क्षेत्र के डेयरी सेक्टर के लिए नई संभावनाएं जरूर पैदा की हैं। आने वाले समय में परियोजना के निर्माण और संचालन की प्रगति पर पशुपालकों की नजर रहेगी।

