मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद ने इस साल नया स्तर हासिल किया है। वर्ष 2026 के ग्रीष्मकालीन सीजन में राज्य में 5.33 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद की गई। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर भुगतान पर भी जोर दिया गया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन से मध्य प्रदेश के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक कर ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद, MSP से किसानों को मिले लाभ और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन की समीक्षा की।
बैठक में फसल बीमा से संबंधित Restructured Weather Based Crop Insurance Scheme (RWBCIS), WINDS प्रणाली और तकनीक आधारित फसल उपज आकलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
5.39 लाख टन खरीद की मंजूरी, 5.33 लाख टन हुई वास्तविक खरीद
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए राज्य में 4,54,580 मीट्रिक टन ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को प्रारंभिक मंजूरी दी थी।
किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए बाद में केंद्र ने इसमें 84,492 मीट्रिक टन की अतिरिक्त मंजूरी प्रदान की। खास बात यह रही कि अतिरिक्त मात्रा की मंजूरी से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला गया।
इस अतिरिक्त मंजूरी के बाद मध्य प्रदेश के लिए 2026 सीजन में ग्रीष्मकालीन मूंग की कुल स्वीकृत खरीद मात्रा बढ़कर 5,39,072 मीट्रिक टन हो गई।
खरीद अवधि अब समाप्त हो चुकी है और राज्य में कुल 5.33 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद दर्ज की गई। यह खरीद केंद्र द्वारा स्वीकृत सीमा के भीतर रही।
सभी इच्छुक पंजीकृत किसानों को मिली बिक्री की सुविधा
केंद्र सरकार के अनुसार, खरीद प्रक्रिया के दौरान सभी इच्छुक और पंजीकृत किसान अपनी उपलब्ध मूंग उपज बेचने में सक्षम रहे। इससे किसानों को खुले बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अपनी उपज के लिए MSP पर उचित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिला।
सरकारी खरीद के माध्यम से किसानों को सीधे वित्तीय लाभ मिला और उनकी आय को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से कुछ हद तक सुरक्षा मिली।
कृषि मंत्री ने कहा कि समय पर खरीद और MSP का प्रभावी लाभ किसानों का कृषि बाजार पर भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
NAFED और NCCF ने संभाली खरीद की जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद मुख्य रूप से NAFED और NCCF के माध्यम से की गई। खरीद के दौरान किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की गई खरीद ने न केवल किसानों को MSP का लाभ पहुंचाया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की।
किसानों से सीधे सरकारी खरीद होने के कारण उन्हें अपनी उपज के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध हुआ। इससे उत्पादन करने वाले किसानों में बाजार को लेकर भरोसा बढ़ाने में मदद मिली।
पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन
मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद का प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रहा है।
वर्ष 2025 के ग्रीष्मकालीन सीजन में राज्य के लिए 4,19,692 मीट्रिक टन मूंग खरीद की मंजूरी दी गई थी, जबकि वास्तविक खरीद 3,93,123.79 मीट्रिक टन रही थी।
इसके मुकाबले 2026 में स्वीकृत मात्रा बढ़कर 5,39,072 मीट्रिक टन हो गई और वास्तविक खरीद लगभग 5.33 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
इस तरह एक साल में न केवल सरकारी खरीद का स्वीकृत लक्ष्य बढ़ा, बल्कि वास्तविक खरीद में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। केंद्र सरकार के अनुसार, यह किसानों को मिले बेहतर समर्थन और बाजार में उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मध्य प्रदेश में लागू की जा रही पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) की भी समीक्षा की गई।
राज्य सरकार ने योजना के क्रियान्वयन के लिए टर्म शीट को अंतिम रूप देने का अनुरोध किया था। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाते हुए राज्य सरकार को टर्म शीट उपलब्ध करा दी है।
उन्होंने राज्य सरकार से योजना के शीघ्र क्रियान्वयन का आग्रह किया, ताकि किसानों को मौसम से जुड़े जोखिमों के खिलाफ बीमा सुरक्षा का लाभ समय पर मिल सके।
मौसम आधारित फसल बीमा उन परिस्थितियों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है जहां बारिश, तापमान, सूखा या अन्य मौसम संबंधी घटनाएं फसल उत्पादन को प्रभावित करती हैं।
WINDS सिस्टम को जल्द लागू करने पर जोर
बैठक में मध्य प्रदेश में WINDS प्रणाली के क्रियान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। संबंधित केंद्रीय विभाग की ओर से राज्य सरकार को समय-समय पर इस प्रणाली को लागू करने के संबंध में पत्र भेजे गए हैं, लेकिन राज्य में इसका पूर्ण क्रियान्वयन अभी लंबित है।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि RWBCIS के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए WINDS का संचालन महत्वपूर्ण है। इसलिए राज्य में इस प्रणाली को जल्द से जल्द लागू करने की आवश्यकता है।
WINDS जैसी तकनीकी प्रणालियां मौसम और फसल से संबंधित आंकड़ों को बेहतर तरीके से जुटाने और उनका उपयोग करने में सहायता कर सकती हैं। इससे मौसम आधारित फसल बीमा के आकलन और दावों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
फसल उपज आकलन में तकनीक और जमीनी आंकड़ों का मिश्रण
बैठक में PMFBY के तहत तकनीक आधारित फसल उपज आकलन के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। मध्य प्रदेश में प्रमुख फसलों के लिए फिलहाल तकनीक आधारित उपज आकलन किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने सुझाव दिया कि तकनीक आधारित मॉडलों को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए Crop Cutting Experiments (CCE) को दोबारा शामिल किया जाना चाहिए।
फसल कटाई प्रयोगों के माध्यम से खेत स्तर पर वास्तविक उपज से जुड़े आंकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं। इन आंकड़ों का इस्तेमाल तकनीक आधारित मॉडल की जांच, तुलना और जरूरत पड़ने पर रीकैलिब्रेशन के लिए किया जा सकता है।
‘ब्लेंडेड अप्रोच’ से सुधरेगा उपज आकलन
केंद्र सरकार ने फसल उपज आकलन के लिए ब्लेंडेड अप्रोच अपनाने की सिफारिश की है। इसके तहत तकनीक आधारित आकलन के साथ-साथ खेत स्तर पर प्राप्त वास्तविक आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा।
इससे उपज आकलन की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही तकनीकी मॉडल और जमीनी वास्तविकता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
फसल बीमा योजना में उपज का आकलन एक महत्वपूर्ण आधार होता है, क्योंकि इसी के आधार पर कई परिस्थितियों में किसानों को मिलने वाले बीमा लाभ और दावों का निर्धारण किया जाता है। इसलिए विश्वसनीय और पारदर्शी उपज आकलन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
खरीद, भुगतान और बीमा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के हित में खरीद, भुगतान और फसल बीमा प्रणालियों को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगी।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय को मजबूत करने और कृषि बाजार में उनका विश्वास बढ़ाने के लिए तीन चीजें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं—समय पर सरकारी खरीद, MSP की सुनिश्चितता और प्रभावी फसल बीमा व्यवस्था।
सरकारी खरीद किसानों को उनकी उपज के लिए एक सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने में मदद करती है, जबकि MSP उन्हें कीमतों में गिरावट की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करता है। दूसरी ओर, फसल बीमा प्राकृतिक और मौसम संबंधी जोखिमों से होने वाले संभावित नुकसान के खिलाफ आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
मूंग किसानों के लिए बढ़ा भरोसा
ग्रीष्मकालीन मूंग की रिकॉर्ड स्तर पर हुई सरकारी खरीद को मध्य प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस वर्ष स्वीकृत मात्रा और वास्तविक खरीद दोनों में वृद्धि हुई है।
5.33 लाख मीट्रिक टन की खरीद यह बताती है कि बड़ी संख्या में पंजीकृत किसानों ने सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ उठाया। NAFED और NCCF के माध्यम से खरीद तथा समय पर भुगतान पर जोर ने किसानों को बाजार में बेहतर भरोसा देने का काम किया।
साथ ही, अतिरिक्त 84,492 मीट्रिक टन खरीद की मंजूरी यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार ने राज्य में उत्पादन और किसानों की वास्तविक आवश्यकता को देखते हुए खरीद सीमा बढ़ाई।
कृषि बाजार में आय सुरक्षा की ओर कदम
मध्य प्रदेश में मूंग खरीद और फसल बीमा की समीक्षा के दौरान सामने आए मुद्दे व्यापक कृषि आय सुरक्षा से जुड़े हैं। किसान की आय केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसे उचित कीमत, समय पर भुगतान और प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा की भी आवश्यकता होती है।
ऐसे में MSP आधारित सरकारी खरीद और फसल बीमा दोनों को मजबूत करना कृषि क्षेत्र में जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
2026 में ग्रीष्मकालीन मूंग की 5.33 लाख मीट्रिक टन खरीद और किसानों को MSP का लाभ मिलने के बाद अब सरकार का फोकस फसल बीमा व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने पर है। WINDS के जल्द क्रियान्वयन, तकनीक आधारित उपज आकलन में जमीनी आंकड़ों को शामिल करने और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने से किसानों को बेहतर सुरक्षा देने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में मूंग की रिकॉर्ड सरकारी खरीद और फसल बीमा प्रणाली को मजबूत करने की पहल किसानों की आय, बाजार भरोसे और कृषि जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा सकती है।

