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Home कृषि समाचार

खेल और शिक्षा साथ-साथ चलें, तभी युवा बनेंगे देश की असली ताकत: शिवराज सिंह चौहान

Sports and education should go together, only then will the youth become the real strength of the country: Shivraj Singh Chouhan

Emran Khan by Emran Khan
August 28, 2026
in कृषि समाचार, पशुपालन
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी मजबूत करने पर जोर

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी मजबूत करने पर जोर

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देश के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेल और शिक्षा को एक-दूसरे का पूरक बनाकर आगे बढ़ना होगा। खेल केवल प्रतियोगिता जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के माता सुंदरी कॉलेज फॉर वुमेन में MY Bharat के सहयोग से आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद – खेल की बात PM मोदी के साथ’ कार्यक्रम में छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं के सुझावों को नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम देशव्यापी संवाद का हिस्सा था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को अपनी बात सीधे केंद्रीय मंत्री के सामने रखने का अवसर मिला।

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की बड़ी भूमिका

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए युवाओं की भागीदारी केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि खेल, नवाचार, सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में भी उनकी सक्रिय भूमिका जरूरी है।

उन्होंने कहा कि युवाओं से प्राप्त सुझाव सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं और व्यवहारिक सुझावों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं को भरोसा दिलाया कि उनके विचारों और समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा तथा खेल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उपयोगी सुझावों पर आगे काम किया जाएगा।

खेल से बनता है आत्मविश्वास और अनुशासन

केंद्रीय मंत्री ने खेलों को समग्र व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि खेल और अकादमिक शिक्षा दोनों का समान महत्व है।

खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, संघर्ष करने की क्षमता और असफलताओं से सीखने का गुण विकसित करता है। प्रतियोगिताओं में सफलता और असफलता दोनों का सामना करने से युवाओं में मानसिक मजबूती भी आती है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबों और कक्षा तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें शारीरिक गतिविधियों और खेलों से भी जोड़ना जरूरी है, ताकि उनका संतुलित एवं स्वस्थ विकास हो सके।

खेल मनोविज्ञान को Khelo India Centres से जोड़ने का सुझाव

कार्यक्रम में छात्राओं ने खेल व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इनमें Khelo India Centres और सरकारी खेल अकादमियों में नियमित Sports Psychology Modules शुरू करने का सुझाव प्रमुख रहा।

छात्राओं ने कहा कि खिलाड़ियों को केवल शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया जाना चाहिए। इसके लिए तनाव प्रबंधन, ध्यान, प्रेरणा, प्रदर्शन का दबाव, असफलता से निपटने और भावनात्मक प्रशिक्षण जैसे विषयों को खेल प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जा सकता है।

आज प्रतिस्पर्धी खेलों में खिलाड़ियों पर प्रदर्शन का दबाव काफी बढ़ गया है। ऐसे में मानसिक तैयारी को प्रशिक्षण व्यवस्था का नियमित हिस्सा बनाने से खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं पर फोकस

छात्राओं ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी सामने रखी।

उन्होंने बेहतर खेल बुनियादी ढांचे, किफायती एवं आसानी से उपलब्ध खेल उपकरण, प्रशिक्षित कोच, जागरूकता अभियान, करियर मार्गदर्शन और खिलाड़ियों को समान अवसर देने की मांग की।

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवा खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, लेकिन कई बार उन्हें उचित प्रशिक्षण, उपकरण और प्रतियोगिताओं तक पहुंच नहीं मिल पाती। छात्राओं ने सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण केंद्र और खेल सुविधाएं विकसित करने से इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।

शिवराज सिंह चौहान ने इन सुझावों को गंभीरता से सुना और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए सहायता की मांग

छात्राओं ने खेलों में आर्थिक बाधाओं का मुद्दा भी उठाया। कई प्रतिभाशाली युवा महंगे खेल उपकरण, प्रशिक्षण और यात्रा का खर्च वहन नहीं कर पाते।

इस समस्या के समाधान के लिए छात्रों ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए विभिन्न सहायता कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया। इनमें अनुदान, खेल उपकरण किराये पर उपलब्ध कराने की सुविधा और स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

ऐसी योजनाएं प्रतिभाशाली लेकिन सीमित आर्थिक संसाधनों वाले खिलाड़ियों को अपनी पसंद के खेल में आगे बढ़ने का अवसर दे सकती हैं।

माता-पिता और शिक्षकों को संवेदनशील बनाने की जरूरत

छात्राओं ने कहा कि युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में परिवार और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कई बार विद्यार्थियों को खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने में परिवार या शैक्षणिक संस्थानों से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता।

इसलिए उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों के लिए जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यशालाएं आयोजित करने का सुझाव दिया।

इन कार्यशालाओं के माध्यम से परिवार और शिक्षक यह समझ सकेंगे कि खेल में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को किस तरह प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें आवश्यक मानसिक एवं व्यावहारिक सहयोग दिया जाए।

मानसिक स्वास्थ्य और पोषण को खेल नीति में मिले प्राथमिकता

शिवराज सिंह चौहान ने खेलों के साथ मानसिक स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल अभ्यास और तकनीकी प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त पोषण, शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

विशेषकर युवा खिलाड़ियों के लिए संतुलित आहार, उचित आराम और मानसिक मजबूती उनकी खेल क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

उन्होंने आश्वासन दिया कि युवाओं द्वारा उठाए गए इन पहलुओं पर संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

छात्राओं ने खुलकर रखे अपने विचार

‘खेलो इंडिया संवाद’ का उद्देश्य युवाओं और नीति निर्माताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करना भी रहा। कार्यक्रम में छात्राओं को बिना किसी बाधा के अपने विचार रखने का अवसर दिया गया।

छात्राओं ने खेल बुनियादी ढांचे से लेकर मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता, ग्रामीण खेल सुविधाओं और करियर मार्गदर्शन तक कई मुद्दे उठाए।

केंद्रीय मंत्री ने छात्राओं के सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और उनकी सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि जो सुझाव व्यवहारिक और लागू करने योग्य होंगे, उन्हें संबंधित विभागों तक आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।

छात्राओं ने भी सीधे केंद्रीय मंत्री से संवाद करने के अवसर का स्वागत किया। उनका कहना था कि इस तरह के संवाद से युवाओं को यह भरोसा मिलता है कि उनकी आवाज नीति निर्माताओं तक पहुंच सकती है और भविष्य में इसका असर जमीन पर दिखाई दे सकता है।

नशामुक्त भारत की दिलाई शपथ

कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कॉलेज की छात्राओं को नशामुक्त भारत की शपथ भी दिलाई।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ, फिट और नशे से दूर युवा ही देश की वास्तविक ताकत हैं। युवाओं को नशे से दूर रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने युवाओं से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी मजबूत करने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और जरूरत है कि उन्हें उचित मंच, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की पहचान से लेकर उच्च स्तर के प्रशिक्षण तक एक मजबूत व्यवस्था तैयार करना भारतीय खेलों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा।

युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगा विकसित भारत का लक्ष्य

‘खेलो इंडिया संवाद’ के दौरान सामने आए सुझावों ने यह स्पष्ट किया कि युवा केवल खेल सुविधाओं में वृद्धि नहीं चाहते, बल्कि वे मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, करियर, आर्थिक सहायता और समान अवसर जैसी व्यापक व्यवस्थाओं की भी मांग कर रहे हैं।

सरकार और खेल संस्थानों के लिए इन सुझावों को व्यावहारिक नीतियों में बदलना महत्वपूर्ण होगा। विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विस्तार से देश की नई प्रतिभाओं को सामने लाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, दिल्ली में आयोजित इस संवाद ने खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने की जरूरत को रेखांकित किया। शिवराज सिंह चौहान का संदेश स्पष्ट रहा कि खेलों को शिक्षा से अलग नहीं देखा जाना चाहिए। खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना विकसित करते हैं और यही गुण भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

Tags: AgricultureFarmingShivraj Singh Chouhan
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