बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज, 16 सितंबर को बिहार के दौरे पर जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद निर्धारित इस दौरे का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी स्थिति का आकलन करना, किसानों को हुए Crop Damage की जानकारी लेना और राज्य में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करना है।
केंद्रीय मंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का Aerial Survey करेंगे, खेतों में पहुंचकर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेंगे और प्रभावित किसानों तथा आम लोगों से सीधे बातचीत करेंगे। इसके बाद पटना में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बाढ़ आपदा प्रबंधन, राहत कार्यों और किसानों के लिए सहायता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम भी शिवराज सिंह चौहान के साथ बिहार जाएगी। केंद्र के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य बाढ़ की स्थिति और उसके प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करना तथा प्रभावित किसानों और परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थिति की समीक्षा करना है।
आज से शुरू होगा बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक आकलन
शिवराज सिंह चौहान का बिहार दौरा ऐसे समय हो रहा है जब राज्य के कई जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है। बिहार सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 49.7 लाख लोग 15 जिलों में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि कई इलाकों में जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
राज्य सरकार के अनुसार करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति बनी है, जिससे कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ा है। ऐसे में केंद्रीय कृषि मंत्री का खेतों तक पहुंचकर फसल नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लेना इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता खेतों में खड़ी फसलों के नुकसान के साथ-साथ आने वाले Rabi Season की तैयारी को लेकर भी है। खेतों में लंबे समय तक पानी रहने से मिट्टी, फसल अवशेष, कृषि इनपुट और खेती की अगली गतिविधियों पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में नुकसान का वास्तविक आकलन और समय पर सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सुबह पटना पहुंचेंगे शिवराज सिंह चौहान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिवराज सिंह चौहान भोपाल से पटना पहुंचेंगे। इसके बाद वह पटना के State Hangar से हेलीकॉप्टर के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे।
सुबह करीब 10:30 बजे दिघवारा और मनेर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का Aerial Survey प्रस्तावित है। हवाई सर्वेक्षण के दौरान बाढ़ से प्रभावित गांवों, कृषि क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों की स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री करीब 11 बजे हाजीपुर पुलिस लाइंस हेलिपैड पहुंचेंगे। वहां से वह सड़क मार्ग से तेरसिया और सरायपुर गांवों की ओर जाएंगे।
इन गांवों में उनका कार्यक्रम विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर बाढ़ के प्रभाव को समझने पर केंद्रित रहेगा। वह खेतों में जाकर फसल नुकसान का निरीक्षण करेंगे और स्थानीय किसानों से बातचीत करेंगे।
किसानों से सीधे संवाद पर रहेगा जोर
बाढ़ के कारण किसानों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इसे समझने के लिए शिवराज सिंह चौहान प्रभावित किसानों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान फसल नुकसान, खेतों में जलभराव, कृषि गतिविधियों पर पड़े प्रभाव और राहत से जुड़ी जरूरतों के बारे में जानकारी ली जाएगी।
किसानों से सीधे बातचीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बाढ़ से हुए नुकसान का वास्तविक स्वरूप केवल प्रशासनिक आंकड़ों से पूरी तरह सामने नहीं आ सकता। खेतों में खड़ी फसल, कटाई के लिए तैयार फसल, बीज और अन्य कृषि संसाधनों को हुए नुकसान की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है।
केंद्रीय टीम के अधिकारी भी इस दौरान स्थिति का जायजा लेंगे। इससे केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता के लिए आवश्यक Ground-Level Assessment को बेहतर आधार मिल सकता है।
पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ होगी उच्चस्तरीय बैठक
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रारंभिक निरीक्षण के बाद शिवराज सिंह चौहान पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ पहुंचेंगे।
यहां बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। बैठक में बाढ़ आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्य, प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
राज्य सरकार पहले ही प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को बाढ़ से हुए नुकसान की विस्तृत और तथ्य आधारित रिपोर्ट तैयार रखने के निर्देश दे चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में राहत, Recovery और Reconstruction कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा है।
इस बैठक में जमीनी निरीक्षण से प्राप्त जानकारी और राज्य प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बिहार सरकार ने 8.27 लाख परिवारों को दी राहत सहायता
शिवराज सिंह चौहान के बिहार दौरे से एक दिन पहले, यानी 15 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत सहायता जारी की।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 15 जिलों के 8.27 लाख बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में कुल ₹579.23 करोड़ की राहत राशि Direct Benefit Transfer यानी DBT के माध्यम से भेजी गई। पात्र परिवारों को ₹7,000 प्रति परिवार की सहायता दी गई।
यह सहायता ऐसे समय दी गई है जब राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का असर बना हुआ है और बड़ी संख्या में लोग राहत तथा पुनर्वास सहायता पर निर्भर हैं।
केंद्रीय मंत्री के दौरे के दौरान राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे Relief Operations की भी जानकारी साझा किए जाने की संभावना है।
मुंगेर में राहत शिविर का करेंगे निरीक्षण
पटना में समीक्षा बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान के मुंगेर जाने का कार्यक्रम निर्धारित है।
दोपहर करीब 1:30 बजे पटना से रवाना होकर वह लगभग 2:15 बजे मुंगेर के नवाबगढ़ी पहुंचेंगे। यहां वह बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण करेंगे।
राहत शिविर में रह रहे प्रभावित परिवारों से केंद्रीय मंत्री सीधे बातचीत करेंगे और यह जानने का प्रयास करेंगे कि उन्हें भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़ी पर्याप्त सहायता मिल रही है या नहीं।
राहत शिविरों में रह रहे लोगों से सीधा संवाद सरकार को यह समझने में मदद कर सकता है कि प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सहायता जमीनी स्तर पर किस तरह पहुंच रही है और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त intervention की जरूरत है।
भागलपुर और नवगछिया में तटबंध का भी होगा निरीक्षण
मुंगेर के बाद शिवराज सिंह चौहान सड़क मार्ग से भागलपुर की ओर जाएंगे। इस दौरान नवगछिया के काजीकोरैया तटबंध का निरीक्षण प्रस्तावित है।
बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों और नदी तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। बाढ़ के दौरान तटबंधों की स्थिति और उनके आसपास पानी के दबाव की निगरानी राहत एवं आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहती है।
केंद्रीय मंत्री के प्रस्तावित निरीक्षण के दौरान तटबंध की स्थिति और बाढ़ के प्रभाव का मौके पर आकलन किया जाएगा।
इसके बाद शाम के समय वह भागलपुर पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित राहत शिविर में जाएंगे। यहां बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी लेने का कार्यक्रम है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिवराज सिंह चौहान रात में भागलपुर में ठहरेंगे और 17 सितंबर की सुबह भी बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात करने के बाद पटना के लिए रवाना होंगे।
करीब 50 लाख लोगों पर बाढ़ का असर
बिहार में मौजूदा बाढ़ का प्रभाव व्यापक है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार लगभग 49.72 लाख लोग 15 जिलों में प्रभावित हुए हैं। कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 सितंबर को कहा था कि बिहार में इस वर्ष अब तक सामान्य की तुलना में 30 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है, लेकिन पड़ोसी राज्यों और नेपाल के कैचमेंट क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण राज्य में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई। गंगा, सोन और गंडक जैसी नदियों के जलस्तर में वृद्धि का भी प्रभाव पड़ा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार में बाढ़ का प्रभाव केवल राज्य के भीतर हुई बारिश से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि नदी के Catchment Areas और पड़ोसी क्षेत्रों में हुई बारिश का भी व्यापक असर पड़ता है।
कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है नुकसान का आकलन
बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और बाढ़ के कारण खेतों में जलभराव किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की स्थिति और अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में शिवराज सिंह चौहान के दौरे में Crop Damage Assessment विशेष महत्व रखता है। खेतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण यह समझने में मदद करेगा कि किस क्षेत्र में कितनी फसल प्रभावित हुई है और किसानों को किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है।
किसानों की ओर से फसल नुकसान, कृषि इनपुट, पुनर्बुवाई, खेतों की बहाली और आगामी रबी सीजन की तैयारी से जुड़े मुद्दे सामने आने की संभावना है।
केंद्र और राज्य के बीच Coordination पर जोर
शिवराज सिंह चौहान के दौरे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच Coordination भी महत्वपूर्ण विषय रहेगा। केंद्र की ओर से कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का साथ रहना इस बात की ओर संकेत करता है कि बाढ़ के प्रभाव का आकलन केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में हुए नुकसान को भी देखा जाएगा।
बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल, तटबंध, खेत, आवास और अन्य ग्रामीण Infrastructure को नुकसान होने की स्थिति में पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए आज होने वाला दौरा तत्काल राहत के साथ-साथ आने वाले समय में Recovery, Rehabilitation और Reconstruction की जरूरतों को समझने की दिशा में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद
दौरे का एक प्रमुख हिस्सा राहत शिविरों में रह रहे लोगों से बातचीत करना है। नवाबगढ़ी और भागलपुर के राहत शिविरों में केंद्रीय मंत्री प्रभावित परिवारों से उनकी समस्याएं सुनेंगे।
ऐसे संवाद में प्रभावित लोगों की वास्तविक जरूरतों की जानकारी मिल सकती है। बाढ़ के दौरान भोजन और सुरक्षित आवास के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा, बच्चों की आवश्यकताएं, पशुधन की सुरक्षा और दैनिक जरूरतों से जुड़ी समस्याएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी राहत शिविरों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की स्थिति का भी जायजा लेंगे।
प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद तैयार हुआ दौरा
बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की ओर से टीम भेजकर स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया था। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को जानकारी दी कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केंद्रीय टीम बिहार का दौरा करेगी।
अब 16 सितंबर को होने वाला यह दौरा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण Field Assessment के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की सहायता के लिए बनेगा आधार
शिवराज सिंह चौहान के आज के दौरे में खेतों का निरीक्षण, किसानों से बातचीत, राहत शिविरों का जायजा और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक—चारों स्तरों पर जानकारी जुटाई जाएगी।
इससे बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान की व्यापक तस्वीर तैयार करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में नुकसान का आकलन किसानों के लिए राहत और आगे की कृषि गतिविधियों की योजना के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।
हालांकि, आज के दौरे के बाद ही नुकसान की अंतिम तस्वीर सामने आएगी। केंद्रीय और राज्य अधिकारियों के Ground Assessment तथा उपलब्ध प्रशासनिक रिपोर्टों के आधार पर आगे की राहत, पुनर्वास और सहायता से संबंधित निर्णय लिए जाएंगे।
फिलहाल बिहार के बाढ़ प्रभावित किसानों और परिवारों की नजर केंद्रीय कृषि मंत्री के आज के दौरे पर है। उम्मीद है कि खेतों और राहत शिविरों तक पहुंचकर स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र तक पहुंचाने में मदद करेगा।

