• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

भारतीय कृषि-रसायन उद्योग में आत्मनिर्भरता पर जोर, 7,500 करोड़ रुपये तक के समर्थन की मांग

ACFI ने कृषि-रसायन उद्योग के लिए ₹5,000-7,500 करोड़ के सहायता कार्यक्रम की मांग की है। रिपोर्ट में घरेलू उत्पादन, चीन से मुकाबला और कृषि नवाचार पर जोर दिया गया है।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
September 21, 2026
in कृषि समाचार
0
भारत में कृषि-रसायन विनिर्माण और आत्मनिर्भरता को दर्शाता कृषि उद्योग
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत के कृषि क्षेत्र में फसल सुरक्षा और कृषि-रसायन उद्योग को मजबूत बनाने के लिए Agro Chem Federation of India (ACFI) ने सरकार से एक लक्षित और समयबद्ध औद्योगिक नीति लागू करने की मांग की है। संगठन ने कृषि-रसायन के तकनीकी उत्पादों और मध्यवर्ती कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 5,000 से 7,500 करोड़ रुपये के सहायता कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा है। ACFI का कहना है कि इस तरह की नीति से भारत को कृषि-रसायन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ चीन से मिलने वाली लागत संबंधी प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

ACFI ने यह मांग KPMG द्वारा तैयार किए गए अपने ज्ञान पत्र ‘Redefining Indian Crop Protection through Innovation: From Scale to Science’ जारी करते हुए रखी। इस रिपोर्ट में भारतीय फसल सुरक्षा उद्योग की मौजूदा स्थिति, विनिर्माण लागत, अनुसंधान एवं नवाचार, नियामकीय व्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। संगठन का मानना है कि भारत में कृषि-रसायन उत्पादन की क्षमता पहले से मौजूद है, लेकिन अगला चरण घरेलू अनुसंधान, तकनीकी विकास और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने का है।

तकनीकी और मध्यवर्ती उत्पादों में आत्मनिर्भरता जरूरी

ACFI के अनुसार भारत कृषि-रसायनों के निर्माण में मजबूत स्थिति बना चुका है, लेकिन कई महत्वपूर्ण तकनीकी उत्पादों और मध्यवर्ती रसायनों के लिए आयात पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है। विशेष रूप से चीन से आने वाले कच्चे माल और तकनीकी उत्पादों के कारण भारतीय निर्माताओं को लागत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।

संगठन का प्रस्ताव है कि सरकार ऐसी औद्योगिक नीति बनाए जिससे महत्वपूर्ण कृषि-रसायन तकनीकी और इंटरमीडिएट का उत्पादन देश में बढ़ाया जा सके। इसके लिए पिछली कड़ी में निवेश करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन, उपयोगिता लागत में सहायता और अनुसंधान एवं विकास के लिए पूंजीगत अनुदान उपलब्ध कराया जा सकता है।

ACFI का कहना है कि इसका उद्देश्य उद्योग को स्थायी रूप से सब्सिडी पर निर्भर बनाना नहीं होना चाहिए। KPMG की रिपोर्ट में भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी सहायता का उद्देश्य केवल उन संरचनात्मक कमियों को दूर करना होना चाहिए, जिनके कारण भारतीय विनिर्माण की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता वैश्विक स्तर पर प्रभावित होती है।

7 से 8 साल की सहायता व्यवस्था का प्रस्ताव

रिपोर्ट में कृषि-रसायन उद्योग के लिए 7 से 8 वर्ष की सहायता अवधि प्रस्तावित की गई है। इसमें शुरुआती 2 से 3 वर्ष संयंत्र स्थापित करने और उत्पादन शुरू करने के लिए तथा इसके बाद लगातार उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सहायता देने की बात कही गई है।

प्रस्तावित नीति में निवेश के अलग-अलग स्तर निर्धारित करने की भी सिफारिश की गई है, ताकि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई भी इसका लाभ उठा सकें। नई परियोजनाओं के साथ मौजूदा संयंत्रों के विस्तार को भी इस ढांचे में शामिल करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में उत्पादन और बिक्री बढ़ाने वाली कंपनियों के लिए पीएलआई जैसी व्यवस्था के तहत अतिरिक्त बिक्री पर 5 से 8 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा औद्योगिक बिजली और अपशिष्ट उपचार जैसी लागतों को कम करने के लिए सहायता की सिफारिश की गई है।

बिजली और पर्यावरणीय ढांचे पर सहायता

भारतीय कृषि-रसायन उद्योग की एक बड़ी चुनौती उत्पादन लागत है। KPMG की रिपोर्ट के अनुसार चीन की तुलना में उपयोगिता लागत भारतीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा में बाधा बन सकती है। इसे देखते हुए औद्योगिक बिजली तथा साझा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट यानी CETP के उपयोग पर 30 से 40 प्रतिशत तक सहायता देने का सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट में विशेष कृषि-रसायन विनिर्माण पार्क विकसित करने की भी सिफारिश की गई है। ऐसे पार्कों में बिजली, पानी, अपशिष्ट उपचार और अन्य आवश्यक सुविधाएं साझा आधार पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे अलग-अलग कंपनियों को बुनियादी ढांचे पर होने वाला निवेश कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मध्यवर्ती उत्पादों में चयनित बैकवर्ड इंटीग्रेशन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।

कृषि नवाचार में कई क्षेत्रों का समन्वय जरूरी

ACFI के महानिदेशक कल्याण गोस्वामी ने कहा कि कृषि में नवाचार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। जैव प्रौद्योगिकी, फसल सुरक्षा, जैविक उत्पाद, नैनो तकनीक, डिजिटल तकनीक, उन्नत बीज और फसल पोषण जैसे क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

उनके अनुसार नई तकनीक तभी सफल होगी जब वह वैज्ञानिक रूप से मजबूत होने के साथ किसानों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक और उपयोगी हो। कृषि क्षेत्र में किसी भी नई तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए किसानों का भरोसा भी महत्वपूर्ण है।

ACFI ने उद्योग, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सरकार और वैज्ञानिक समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया है। संगठन का कहना है कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को खेत तक पहुंचाने के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।

नियामकीय प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग

रिपोर्ट में कृषि-रसायन उद्योग के लिए एकल खिड़की यानी सिंगल-विंडो नियामकीय व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इसके तहत केंद्र और राज्य स्तर की मंजूरियों के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच विकसित करने की बात कही गई है।

ACFI के अनुसार अनुमोदन प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। विशेष रूप से जैविक फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए स्पष्ट नियामकीय रास्ता तैयार किया जाना आवश्यक है। इससे नए उत्पादों के विकास और उनके व्यावसायीकरण में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।

संगठन ने डिजिटल तकनीक के विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया है। उसका कहना है कि कृषि-रसायन उद्योग का विकास केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें अनुसंधान, नवाचार, टिकाऊ कृषि और किसानों तक तकनीक की पहुंच भी शामिल होनी चाहिए।

कृषि नवाचार में सार्वजनिक–निजी भागीदारी पर जोर

ACFI के हालिया वार्षिक आम बैठक में आयोजित चर्चा के दौरान भी कृषि-रसायन क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने की जरूरत पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार विशाल चौधरी ने कहा कि भारत ने कृषि-रसायन विनिर्माण में मजबूत आधार तैयार किया है। अब अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी तथा अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग जरूरी बताया गया।

FSSAI की निदेशक स्वीटी बेहरा ने कृषि नवाचार में उत्पादकता के साथ टिकाऊपन और उपभोक्ता सुरक्षा को भी समान महत्व देने की बात कही। TERI की निदेशक पुष्पलता सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी और नैनो तकनीक को टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Bayer CropScience के कृषि मामलों के निदेशक राजवीर राठी ने तकनीक लाइसेंसिंग और तकनीक तक पहुंच की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। KPMG India के पार्टनर एवं वरिष्ठ सलाहकार गोपीनाथ कोनेटी के अनुसार कृषि नवाचार की अंतिम कसौटी उसकी आर्थिक व्यवहारिकता है। किसानों के लिए वही समाधान अधिक उपयोगी होगा, जिसका परिणाम स्पष्ट, मापने योग्य और आर्थिक रूप से लाभकारी हो।

किसानों तक पहुंचे तकनीक का लाभ

ACFI के चेयरमैन राहुल धनुका ने कहा कि कृषि-रसायन उद्योग का ध्यान किसानों की वास्तविक जरूरतों पर होना चाहिए। उनके अनुसार नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नियामकीय व्यवस्था, घरेलू उत्पादन क्षमता, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल तकनीक का विस्तार जरूरी है।

कुल मिलाकर ACFI की मांग कृषि-रसायन क्षेत्र को केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित ढांचे में घरेलू उत्पादन, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे, नियामकीय सुधार और आपूर्ति श्रृंखला को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया गया है। यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो इसका उद्देश्य भारत में कृषि-रसायन तकनीकी और मध्यवर्ती उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय उद्योग की लागत संबंधी चुनौतियों को कम करना होगा।

 

Tags: ACFIKPMGआत्मनिर्भर भारतएग्रोकेमिकलकिसानकृषि उद्योगकृषि नवाचारकृषि रसायनकृषि रसायन उत्पादनफसल सुरक्षा
Previous Post

Soil Organic Carbon कैसे बढ़ाएं? स्वस्थ और उपजाऊ मिट्टी के लिए पूरी गाइड

Next Post

ई-केसीसी से किसानों को बड़ी राहत, 3 लाख से अधिक KCC आवेदन डिजिटल हुए

Next Post
ई-केसीसी पोर्टल के जरिए किसान क्रेडिट कार्ड के लिए डिजिटल आवेदन करता किसान

ई-केसीसी से किसानों को बड़ी राहत, 3 लाख से अधिक KCC आवेदन डिजिटल हुए

Recent Posts

  • भारत में खाद सब्सिडी पर सरकार की नजर
  • हॉर्मुज संकट से यूरिया बाजार में तेजी, भारत पर क्या होगा असर?
  • यूरिया के बाद सल्फर बना नई चिंता, DAP और SSP की लागत बढ़ने का खतरा
  • ई-केसीसी से किसानों को बड़ी राहत, 3 लाख से अधिक KCC आवेदन डिजिटल हुए
  • भारतीय कृषि-रसायन उद्योग में आत्मनिर्भरता पर जोर, 7,500 करोड़ रुपये तक के समर्थन की मांग

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.