Increase Milk Production: भारत दुनिया के प्रमुख दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डेयरी पालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। लाखों छोटे और सीमांत किसान गाय तथा भैंस पालन से नियमित आय प्राप्त करते हैं। लेकिन केवल अधिक पशु रखना ही अधिक दूध उत्पादन की गारंटी नहीं है। असली अंतर पशु की नस्ल, पोषण, स्वास्थ्य, प्रबंधन, स्वच्छता, प्रजनन और तनाव नियंत्रण जैसे कारकों से पड़ता है।
कई बार किसान यह मान लेते हैं कि दूध कम होने पर केवल अधिक दाना देने से समस्या हल हो जाएगी। वास्तव में दूध उत्पादन एक जटिल जैविक प्रक्रिया है, जिस पर पशु के शरीर की ऊर्जा स्थिति, पाचन क्षमता, पानी की उपलब्धता, खनिज तत्व, दुग्धकाल, वातावरण और रोगों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए दुधारू पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीके अपनाना जरूरी है। सही प्रबंधन के माध्यम से पशु के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जा सकता है।
1. अच्छी नस्ल का चयन दूध उत्पादन की पहली शर्त
दूध उत्पादन काफी हद तक पशु की आनुवंशिक क्षमता पर निर्भर करता है। जिस पशु की आनुवंशिक क्षमता कम है, उससे केवल अधिक आहार देकर बहुत अधिक दूध प्राप्त नहीं किया जा सकता।गायों में साहीवाल, गिर, रेड सिंधी जैसी भारतीय दुग्ध नस्लें बेहतर मानी जाती हैं। इसके अलावा होल्स्टीन फ्रिज़ियन और जर्सी जैसी विदेशी नस्लों तथा उनकी क्रॉसब्रीड गायों में भी अच्छी दुग्ध क्षमता देखी जाती है।भैंसों में मुर्रा, मेहसाना, जाफराबादी और नीली-रावी जैसी नस्लें दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।
पशु खरीदते समय केवल उस दिन के दूध उत्पादन को नहीं देखना चाहिए। पशु की पिछली दुग्ध क्षमता, ब्यांत संख्या, थन की बनावट, शरीर की स्थिति, स्वास्थ्य, प्रजनन इतिहास और माता-पिता की उत्पादन क्षमता के बारे में भी जानकारी लेना उपयोगी रहता है।
2. संतुलित आहार है अधिक दूध उत्पादन की कुंजी
Dairy Cattle Nutrition दूध उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। पशु तभी अपनी आनुवंशिक क्षमता के अनुसार दूध दे सकता है, जब उसे पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज तत्व मिलें।एक संतुलित आहार में सामान्य रूप से निम्न प्रकार के खाद्य स्रोत शामिल होते हैं:
- हरा चारा
- सूखा चारा
- दाना मिश्रण
- प्रोटीन स्रोत
- मिनरल मिक्सचर
- सामान्य नमक
- पर्याप्त स्वच्छ पानी
पशु को केवल भूसा और थोड़ा दाना खिलाकर अधिक दूध की उम्मीद करना सही नहीं है। उसके दूध उत्पादन, शरीर के वजन, गर्भावस्था और दुग्धकाल के अनुसार आहार में बदलाव करना चाहिए।
3. हरा चारा क्यों जरूरी है?
हरा चारा दुधारू पशुओं के लिए ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का महत्वपूर्ण स्रोत है। अच्छी गुणवत्ता वाला हरा चारा पशु की भूख और पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।बरसीम, लूसर्न, मक्का, ज्वार, बाजरा, नेपियर घास और लोबिया जैसे चारे विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग किए जाते हैं।हरी घास का उपयोग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पशु को अचानक बहुत अधिक मात्रा में नया चारा न दिया जाए। आहार में परिवर्तन धीरे-धीरे करना बेहतर होता है।हरी घास के साथ पर्याप्त सूखा चारा भी देना चाहिए, ताकि रूमेन का सामान्य कार्य बना रहे।
4. सूखे चारे की गुणवत्ता पर ध्यान दें
दुधारू पशुओं में सूखा चारा भी महत्वपूर्ण है। गेहूं का भूसा, धान का पुआल और सूखी घास सामान्यतः उपयोग किए जाते हैं।लेकिन केवल कम गुणवत्ता वाला सूखा चारा पशु की उत्पादन आवश्यकता पूरी नहीं कर सकता। यदि सूखे चारे में पोषक तत्व कम हैं, तो संतुलित दाना और अन्य पोषण स्रोत आवश्यक हो सकते हैं।फफूंदी लगा, सड़ा या खराब गंध वाला चारा पशु को नहीं खिलाना चाहिए। खराब चारा पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है और दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
5. दाना मिश्रण सही मात्रा में दें
दाना मिश्रण पशु को अतिरिक्त ऊर्जा और प्रोटीन देने का महत्वपूर्ण साधन है। लेकिन अधिक दाना देना हमेशा अधिक दूध का कारण नहीं बनता।बहुत अधिक कंसंट्रेट खिलाने से रूमेन में अम्लता बढ़ सकती है और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दाना पशु की दूध उत्पादन क्षमता और शरीर की स्थिति के अनुसार देना चाहदाना मिश्रण में अनाज, खली, चोकर और उचित खनिज मिश्रण शामिल किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर संतुलित राशन पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह से तैयार करना अधिक उपयुक्त रहता है।
6. मिनरल मिक्सचर का उपयोग
कई क्षेत्रों में दुधारू पशुओं के आहार में खनिज तत्वों की कमी देखी जाती है। कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम तथा सूक्ष्म खनिज पशु के शरीर की कई जैविक क्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।खनिज असंतुलन से प्रजनन समस्या, हड्डियों की कमजोरी, भूख में कमी और उत्पादन में गिरावट हो सकती है।इसलिए पशु चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपयुक्त Mineral Mixture for Dairy Cattle का उपयोग लाभकारी हो सकता है।खनिज मिश्रण की मात्रा उत्पाद की संरचना के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए लेबल या विशेषज्ञ की सलाह का पालन करना चाहिए।
7. पर्याप्त पानी से बढ़ सकती है दूध देने की क्षमता
दूध में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए दुधारू पशुओं में पानी की उपलब्धता सीधे दूध उत्पादन को प्रभावित करती है।गर्मी में पानी की आवश्यकता और बढ़ जाती है। पशु को दिनभर स्वच्छ और ताजा पानी उपलब्ध होना चाहिए।गंदा या बदबूदार पानी पशु कम पी सकता है, जिससे उसकी भूख और दूध उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।पानी की टंकी और नांद को नियमित रूप से साफ करना चाहिए।
8. पशु के बॉडी कंडीशन स्कोर पर ध्यान दें
दुधारू पशु (Increase Milk Production )न तो बहुत कमजोर होना चाहिए और न ही अत्यधिक मोटा। पशु के शरीर पर जमा वसा और मांसपेशियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन Body Condition Score के माध्यम से किया जाता है।यदि पशु बहुत कमजोर है, तो उसके पास दूध उत्पादन और प्रजनन के लिए पर्याप्त ऊर्जा भंडार नहीं हो सकता। वहीं अत्यधिक मोटापा भी स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।विशेष रूप से ब्याने से पहले और ब्याने के बाद पशु की शरीर स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
9. ब्याने से पहले सही पोषण
गर्भावस्था के अंतिम चरण में भ्रूण का विकास तेज होता है। इसी समय अगले दुग्धकाल की तैयारी भी होती है।ब्याने से पहले पशु को संतुलित आहार देना महत्वपूर्ण है, लेकिन अत्यधिक ऊर्जा वाला आहार देना भी उचित नहीं है।गर्भावस्था के अंतिम चरण में पशु की पोषण आवश्यकता, शरीर की स्थिति और स्वास्थ्य के अनुसार राशन तैयार किया जाना चाहिए।इसे अक्सर Transition Period Management का हिस्सा माना जाता है।सही ट्रांजिशन मैनेजमेंट ब्याने के बाद पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
10. ड्राई पीरियड का महत्व
लगातार दूध देने वाली गाय या भैंस को अगले ब्यांत से पहले एक उचित विश्राम काल देना आवश्यक होता है, जिसे Dry Period कहा जाता है।इस समय थन ऊतक को अगले दुग्धकाल के लिए पुनः तैयार होने का अवसर मिलता है।यदि पशु को पर्याप्त ड्राई पीरियड नहीं मिलता, तो अगले दुग्धकाल में उसकी उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।हालांकि ड्राई पीरियड की सटीक अवधि पशु, नस्ल, स्वास्थ्य और उत्पादन स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए इसे पशु चिकित्सक या डेयरी विशेषज्ञ की सलाह से प्रबंधित करना बेहतर रहता है।
11. समय पर दुहाई करें
दूध दुहने का समय नियमित होना चाहिए। रोज अलग-अलग समय पर दूध निकालने से पशु की जैविक दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।अधिकांश डेयरी फार्मों में सुबह और शाम तय समय पर दुहाई की जाती है। उच्च उत्पादन वाले कुछ पशुओं में प्रबंधन व्यवस्था अलग हो सकती है।दुहाई के समय पशु को डराना, मारना या तेज आवाज करना दूध उतरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।शांत वातावरण में नियमित दुहाई बेहतर परिणाम देती है।
12. पूरी और स्वच्छ दुहाई
यदि थन में बार-बार दूध बच जाता है, तो दीर्घकाल में उत्पादन और थन स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।दुहाई से पहले हाथ और थन साफ होने चाहिए। थन को धोने के बाद साफ कपड़े या व्यक्तिगत टॉवल से सुखाना चाहिए।मशीन से दूध निकालने वाले फार्मों में मिल्किंग मशीन की सफाई, वैक्यूम सिस्टम और लाइनर की स्थिति की नियमित जांच जरूरी है।
13. मास्टाइटिस से बचाव बेहद जरूरी
मास्टाइटिस यानी थन की सूजन डेयरी पशुओं में दूध उत्पादन घटने का एक बड़ा कारण है।इसके कारण दूध की मात्रा कम हो सकती है और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। कई मामलों में पशु को उपचार की आवश्यकता पड़ती है। मास्टाइटिस की रोकथाम के लिए:
- थन और बाड़े की सफाई रखें
- दुहाई से पहले और बाद में स्वच्छता अपनाएं
- गीले और गंदे बिछावन से बचें
- थन में चोट होने से रोकें
- असामान्य दूध या सूजन दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें
14. नियमित स्वास्थ्य जांच
कई बार दूध उत्पादन अचानक कम होना किसी छिपी बीमारी का संकेत हो सकता है।बुखार, परजीवी संक्रमण, पाचन गड़बड़ी, खुर रोग, थन संबंधी बीमारी और प्रजनन समस्याएं दूध उत्पादन को कम कर सकती हैं।इसलिए केवल दूध कम होने पर दाना बढ़ाने के बजाय पशु की पूरी स्वास्थ्य स्थिति की जांच करना आवश्यक है।नियमित पशु चिकित्सा जांच डेयरी फार्म की उत्पादकता बनाए रखने में मदद करती है।
15. टीकाकरण और रोग नियंत्रण
संक्रामक रोग पशुओं के स्वास्थ्य और फार्म की अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।अपने क्षेत्र में प्रचलित रोगों के अनुसार पशु चिकित्सक या सरकारी पशुपालन विभाग द्वारा सुझाए गए टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करना चाहिए।टीकाकरण कार्यक्रम क्षेत्र, रोग की स्थिति और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार बदल सकता है।बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना संक्रमण नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
16. आंतरिक और बाहरी परजीवी नियंत्रण
कृमि और बाहरी परजीवी पशु के शरीर से पोषक तत्वों का नुकसान कर सकते हैं।गंभीर परजीवी संक्रमण से पशु कमजोर हो सकता है, उसकी भूख कम हो सकती है और दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है।कृमिनाशक दवा अपने मन से बार-बार देना उचित नहीं है। पशु चिकित्सक पशु की उम्र, वजन, क्षेत्र और परजीवी जोखिम के आधार पर उचित कार्यक्रम बता सकता है।
17. गर्मी के तनाव से बचाना
गर्मी में गाय और भैंस दोनों का दूध उत्पादन घट सकता है। इसे Heat Stress in Dairy Animals कहा जाता है।जब तापमान और आर्द्रता बढ़ती है, तो पशु कम खाना शुरू कर सकता है। इससे ऊर्जा का सेवन कम होता है और दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है।गर्मी से बचाव के लिए:
- पर्याप्त छाया दें
- शेड में हवा का अच्छा आवागमन रखें
- पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं
- आवश्यकता अनुसार पंखे या कूलिंग सिस्टम उपयोग करें
- पशुओं को तेज धूप में लंबे समय तक न रखें
18. आरामदायक पशु आवास
दुधारू पशु जितना आराम से रहेगा, उतनी ही अच्छी तरह भोजन, जुगाली और विश्राम कर पाएगा।फर्श फिसलन वाला नहीं होना चाहिए। शेड में गोबर और मूत्र जमा नहीं होना चाहिए।सोने का स्थान सूखा और आरामदायक होना चाहिए। भीड़भाड़ भी कम रखनी चाहिए।अधिक भीड़ पशुओं में तनाव और प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकती है।
19. तनाव कम करना जरूरी
पशुओं में तनाव कई कारणों से हो सकता है, जैसे:
- बार-बार स्थान परिवर्तन
- तेज आवाज
- मारपीट
- अत्यधिक गर्मी
- भीड़भाड़
- भोजन में अचानक बदलाव
- नया समूह
- बीमारी
तनाव से हार्मोनल प्रतिक्रिया बदल सकती है, जिसका असर दूध उतरने और उत्पादन पर पड़ सकता है।पशु के साथ शांत और नियमित व्यवहार रखना चाहिए।
20. नियमित व्यायाम
नियंत्रित और हल्की गतिविधि पशुओं की सामान्य शारीरिक स्थिति के लिए लाभकारी हो सकती है।पशु को हर समय बेहद संकरे स्थान में बांधकर रखने से उसकी गतिविधि कम हो जाती है। उपयुक्त व्यवस्था होने पर पशु को सुरक्षित खुले क्षेत्र में चलने की सुविधा दी जा सकती है।हालांकि अत्यधिक चलाना, खासकर गर्म मौसम में, तनाव बढ़ा सकता है।
21. सही समय पर प्रजनन
डेयरी पशुओं में दूध उत्पादन और प्रजनन का गहरा संबंध है।यदि पशु लंबे समय तक गर्भधारण नहीं करता, तो फार्म की आर्थिक दक्षता प्रभावित होती है।हीट के संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण है। पशु में बेचैनी, दूसरे पशुओं पर चढ़ना या खड़े रहना, जननांग से साफ श्लेष्मा आना और गतिविधि बढ़ना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।उचित समय पर कृत्रिम गर्भाधान या प्राकृतिक प्रजनन की योजना पशु विशेषज्ञ की सलाह से करनी चाहिए।
22. रिकॉर्ड रखना क्यों जरूरी है?
वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन बिना रिकॉर्ड के अधूरा है।हर पशु के लिए निम्न रिकॉर्ड रखना उपयोगी है:
- रोज का दूध उत्पादन
- ब्याने की तारीख
- गर्भाधान की तारीख
- दवाइयां
- टीकाकरण
- बीमारी
- आहार
- दूध में अचानक बदलाव
इन आंकड़ों से किसान यह पहचान सकता है कि किस पशु की उत्पादन क्षमता बेहतर है और किस पशु में लगातार समस्या आ रही है।
23. दूध उत्पादन अचानक कम हो तो क्या करें?
यदि किसी पशु का दूध अचानक कम हो जाए, तो सबसे पहले संभावित कारण तलाशना चाहिए।दूध उत्पादन कम होने के सामान्य कारणों में शामिल हो सकते हैं:
- आहार में बदलाव
- पानी की कमी
- गर्मी का तनाव
- बीमारी
- मास्टाइटिस
- पाचन समस्या
- प्रजनन संबंधी बदलाव
- तनाव
- दुहाई के समय में बदलाव
यदि पशु में भूख की कमी, बुखार, थन में सूजन, दर्द, लंगड़ापन या व्यवहार में बदलाव भी दिखाई दे, तो पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
24. केवल दूध बढ़ाने वाले नुस्खों पर निर्भर न रहें
कई किसान दूध बढ़ाने के लिए घरेलू नुस्खे, पाउडर, टॉनिक या विभिन्न सप्लीमेंट इस्तेमाल करते हैं।हर उत्पाद उपयोगी हो, यह जरूरी नहीं है। यदि पशु के मूल आहार में ऊर्जा, प्रोटीन, खनिज या पानी की कमी है, तो केवल टॉनिक देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।दूध उत्पादन बढ़ाने का सबसे टिकाऊ तरीका है:अच्छी नस्ल + संतुलित पोषण + स्वच्छ पानी + रोग नियंत्रण + आराम + सही प्रजनन + वैज्ञानिक रिकॉर्ड प्रबंधन।
25. रूमेन स्वास्थ्य बनाए रखें
गाय और भैंस जुगाली करने वाले पशु हैं। उनके पेट का रूमेन भाग भोजन को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।आहार में पर्याप्त फाइबर का होना जरूरी है। अचानक बहुत अधिक अनाज या दाना देने से रूमेन का संतुलन बिगड़ सकता है।आहार बदलते समय धीरे-धीरे बदलाव करना चाहिए।पशु की नियमित जुगाली अच्छे रूमेन स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
26. साइलेज का वैज्ञानिक उपयोग
जिन क्षेत्रों में सालभर हरा चारा उपलब्ध नहीं रहता, वहां साइलेज उपयोगी विकल्प हो सकता है।मक्का या अन्य उपयुक्त फसलों से अच्छी गुणवत्ता का साइलेज तैयार किया जा सकता है।साइलेज बनाते समय उचित नमी, दबाव और वायुरहित वातावरण महत्वपूर्ण होता है।खराब या फफूंदी वाला साइलेज पशु को नहीं खिलाना चाहिए।
27. टोटल मिक्स्ड राशन का उपयोग
बड़े और व्यवस्थित डेयरी फार्मों में Total Mixed Ration यानी TMR का उपयोग किया जाता है।इसमें सूखा चारा, हरा चारा, कंसंट्रेट और अन्य पोषक तत्वों को मिलाकर पशु को एक समान मिश्रण दिया जाता है।TMR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पशु भोजन के अलग-अलग हिस्सों को चुनकर न खाए और हर निवाले में लगभग संतुलित पोषण मिले।हालांकि TMR की सही संरचना पशु के दूध उत्पादन, शरीर के वजन और उपलब्ध चारे के अनुसार तय की जानी चाहिए।
28. दूध की मात्रा के साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान दें
डेयरी व्यवसाय में केवल लीटर बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए।दूध में फैट, प्रोटीन और अन्य ठोस पदार्थ भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।दूध की संरचना नस्ल, आहार, दुग्धकाल, स्वास्थ्य और आनुवंशिकी से प्रभावित होती है।भैंस के दूध में सामान्यतः गाय के दूध की तुलना में फैट प्रतिशत अधिक होता है, लेकिन अलग-अलग पशुओं में काफी अंतर हो सकता है।
29. स्वच्छ डेयरी फार्म से उत्पादन में सुधार
स्वच्छता पशु स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी है।गोबर और मूत्र का उचित निस्तारण करें। पानी की नांद साफ रखें। बिछावन नियमित बदलें और मक्खियों पर नियंत्रण रखें।गंदे वातावरण में थन संक्रमण और अन्य रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
30. नवजात बछड़े की देखभाल भी भविष्य के दूध उत्पादन से जुड़ी है
आज की अच्छी बछिया भविष्य की उच्च उत्पादन वाली गाय बन सकती है।जन्म के तुरंत बाद नवजात बछड़े को समय पर अच्छी गुणवत्ता का कोलोस्ट्रम मिलना अत्यंत महत्वपूर्ण है।बछियों का सही पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन उनकी वृद्धि और भविष्य की उत्पादन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।इसलिए डेयरी फार्म को केवल वर्तमान दूध उत्पादन पर ध्यान न देकर भविष्य के पशुधन विकास की योजना भी बनानी चाहिए।
दुधारू पशुओं का दूध बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सुझाव
दूध उत्पादन में सुधार के लिए किसान कुछ मुख्य सिद्धांत हमेशा ध्यान में रख सकते हैं:
- उच्च उत्पादन क्षमता वाली स्वस्थ नस्ल का चयन करें।
- पशु को संतुलित आहार दें।
- पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध रखें।
- हरे और सूखे चारे का संतुलन बनाए रखें।
- उचित मिनरल मिक्सचर का उपयोग करें।
- दुहाई का समय नियमित रखें।
- थन की स्वच्छता का ध्यान रखें।
- गर्मी और अन्य प्रकार के तनाव से बचाएं।
- समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच कराएं।
- हर पशु का दूध और प्रजनन रिकॉर्ड रखें।
दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम होने के प्रमुख कारण
किसान अक्सर पूछते हैं, “गाय या भैंस का दूध अचानक कम क्यों हो जाता है?”
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
पोषण की कमी
ऊर्जा, प्रोटीन या खनिज तत्वों की कमी से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पानी की कमी
कम पानी पीने से पशु की दूध उत्पादन क्षमता कम हो सकती है।
बीमारी
मास्टाइटिस, बुखार और अन्य रोग दूध कम कर सकते हैं।
गर्मी का तनाव
गर्मी में पशु कम भोजन करता है।
अनियमित दुहाई
दूध निकालने के समय में बार-बार बदलाव उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
दुग्धकाल का चरण
ब्याने के बाद दूध उत्पादन आमतौर पर एक समय तक बढ़ता है और फिर धीरे-धीरे कम होना प्राकृतिक प्रक्रिया है।

