देश में नदियों और छोटी धाराओं के पुनर्जीवन को लेकर अब केवल नदी के किनारे तक सीमित प्रयासों के बजाय पूरे catchment landscape को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources-DOLR) ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में watershed approach के माध्यम से river rejuvenation पर प्रस्तावित pilot projects को लेकर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की।
कार्यशाला का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि किसी नदी या धारा के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए उसके पूरे catchment area की जलवैज्ञानिक स्थिति को समझना जरूरी है। यदि उस क्षेत्र में वर्षा जल का बेहतर संचयन, भूजल recharge, soil and water conservation और landscape treatment किया जाए, तो इसका सीधा प्रभाव नदी के flow pattern पर पड़ सकता है।
भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने कहा कि नदी को पुनर्जीवित करने के लिए केवल नदी की धारा में काम करना पर्याप्त नहीं है। जिस landscape से नदी को पानी मिलता है, उसके उपचार और संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। उनके अनुसार अलग-अलग catchment की hydrology अलग हो सकती है, इसलिए interventions भी स्थानीय परिस्थितियों और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर तय किए जाने चाहिए।
नदी पुनरुद्धार के साथ वाटरशेड विकास का लक्ष्य
प्रस्तावित pilot projects में नदी के catchment को एक integrated landscape के रूप में देखते हुए काम करने की योजना है। इसमें वर्षा जल के व्यवहार, भूजल स्तर, मिट्टी की स्थिति, drainage pattern और उपलब्ध जल संसाधनों का अध्ययन किया जाएगा।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य watershed development और river rejuvenation दोनों को एक साथ आगे बढ़ाना है। इसके लिए ऐसे interventions की पहचान की जाएगी जो एक ओर खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को मजबूत करें और दूसरी ओर नदी या stream में पानी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने में मदद करें।
भूमि संसाधन विभाग के अनुसार प्रस्तावित कार्यों में catchment treatment, groundwater recharge, soil and water conservation तथा नदी के base flow और lean-season flow को बेहतर बनाने वाले उपाय शामिल होंगे।
यह दृष्टिकोण विशेष रूप से उन छोटी नदियों और धाराओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनमें वर्ष के कुछ महीनों में प्रवाह काफी कम हो जाता है या जिनका seasonal flow लगातार घटा है।
वैज्ञानिक आधार पर होगा कैचमेंट का चयन
कार्यशाला में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि किसी नदी या stream को केवल उसकी वर्तमान स्थिति देखकर pilot project के लिए नहीं चुना जाना चाहिए। इसके लिए एक विस्तृत hydrological baseline तैयार करने की आवश्यकता होगी।
इस baseline में rainfall pattern, groundwater condition, catchment characteristics और water balance जैसे parameters को शामिल किया जाएगा। इसके आधार पर यह समझने का प्रयास होगा कि किसी particular intervention से नदी के hydrological function को वास्तव में कितना सुधारा जा सकता है।
भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक catchment की जलविज्ञान संबंधी विशेषताओं को वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है। इसके बाद ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि targeted watershed interventions नदी या धारा के कमजोर अथवा समाप्त हो चुके hydrological functions को किस सीमा तक restore कर सकते हैं।
डेटा और आधुनिक तकनीक से होगी नदी की पहचान
राष्ट्रीय वर्षाक्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने छोटी नदियों को लेकर data availability की चुनौती की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि छोटी नदियों के मामले में लंबे समय का flow data कई बार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होता।
ऐसे में पुराने उपलब्ध records, scientific analysis, high-resolution mapping और Decision Support System (DSS) को एक साथ इस्तेमाल करने की जरूरत होगी। इससे संभावित rivers और streams की पहचान तथा उनके लिए treatment plan तैयार करने में मदद मिल सकती है।
इस प्रक्रिया में GIS, remote sensing और geospatial technology की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। Satellite-based information और ground-level data को जोड़कर catchment की स्थिति, land use, drainage, vegetation, soil characteristics और water-related parameters का बेहतर assessment किया जा सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने के साथ नदी का प्रवाह भी सुधरे
भूमि संसाधन विभाग में वाटरशेड प्रबंधन के संयुक्त सचिव नितिन खाडे ने बताया कि proposed pilot projects का लक्ष्य केवल नदी में पानी बढ़ाना नहीं है। इनका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य catchment में रहने वाले किसानों की agricultural productivity और income में भी सुधार करना है।
उनके अनुसार groundwater recharge, soil and water conservation और intensive watershed treatment के माध्यम से जहां नदी के flow को मजबूत करने का प्रयास होगा, वहीं खेती के लिए उपलब्ध जल संसाधनों और soil moisture को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
यही इस approach की प्रमुख चुनौती भी है कि watershed interventions इस तरह डिजाइन किए जाएं जिससे नदी के ecological flow और स्थानीय कृषि जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे।
इसका अर्थ है कि watershed development को केवल infrastructure-based activity के रूप में नहीं देखा जाएगा। इसे water security, agriculture और rural livelihood से जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी की धाराओं पर फोकस
प्रस्तावित pilot projects में first, second और third-order streams को प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाएगा। इसके लिए कई scientific और field-based parameters का इस्तेमाल किया जाएगा।
नदी या धारा के चयन के दौरान उसके historical flow decline, catchment condition, rainfall pattern, groundwater depletion, proposed interventions की संभावनाओं और उपलब्ध data को देखा जाएगा।
इस approach का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमित resources को उन catchments में लगाया जाए जहां वैज्ञानिक analysis के आधार पर watershed treatment से measurable impact हासिल करने की संभावना हो।
चार स्तरों पर मापा जाएगा परियोजनाओं का असर
प्रस्तावित monitoring framework में परियोजनाओं के परिणामों का assessment चार प्रमुख dimensions पर किया जाएगा।
पहला hydrological dimension होगा, जिसमें नदी के flow, groundwater recharge और जल उपलब्धता में होने वाले बदलावों को देखा जाएगा।
दूसरा environmental dimension होगा। इसके तहत soil conservation, landscape condition और अन्य पर्यावरणीय indicators में होने वाले बदलावों का assessment किया जाएगा।
तीसरा agricultural dimension होगा, जिसमें खेती की productivity, water availability और agricultural outcomes पर intervention के प्रभाव को देखा जाएगा।
चौथा socio-economic dimension होगा। इसमें ग्रामीण परिवारों की आजीविका, आय और स्थानीय स्तर पर होने वाले सामाजिक-आर्थिक बदलावों का अध्ययन किया जाएगा।
इस चार-आयामी monitoring system का उद्देश्य केवल यह देखना नहीं होगा कि परियोजना में कितने structures बनाए गए या कितने hectares का treatment हुआ। वास्तविक focus इस बात पर रहेगा कि intervention के बाद landscape, water resources, agriculture और rural communities में measurable change कितना आया।
कई सरकारी योजनाओं का कन्वर्जेंस जरूरी
कार्यशाला में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नदी पुनरुद्धार जैसे बड़े और long-term objective को किसी एक योजना के माध्यम से पूरा करना आसान नहीं होगा। इसके लिए अलग-अलग government programmes, state schemes, research institutions, CSR और civil society organisations के resources और expertise को एक साथ लाने की आवश्यकता होगी।
इस संदर्भ में VB-G RAM G, CAMPA, जल शक्ति मंत्रालय तथा राज्यों की विभिन्न योजनाओं एवं programmes के convergence पर चर्चा हुई। इसके अलावा CSR, NGOs, research institutions और international organisations की संभावित भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया।
इस तरह का convergence approach एक ही catchment में अलग-अलग agencies द्वारा किए जा रहे कामों को एक common objective से जोड़ सकता है। इससे resources का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ interventions के बीच coordination भी मजबूत हो सकता है।
विशेषज्ञों की multidisciplinary टीम निभाएगी भूमिका
राष्ट्रीय कार्यशाला में केवल watershed experts ही नहीं, बल्कि hydrologists, groundwater specialists, IITs के geospatial scientists, ICAR institutions, National Remote Sensing Centre (NRSC), Central Ground Water Board, National Mission for Clean Ganga (NMCG), National River Conservation Directorate (NRCD), Indian Institute of Remote Sensing, National Institute of Hydrology और National Geophysical Research Institute सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
राज्य सरकारों के representatives, research organisations, NGOs और international organisations ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।
इससे स्पष्ट है कि proposed river rejuvenation model को multidisciplinary framework के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। इसमें water science, agriculture, geospatial technology, environment, rural development और community participation को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता होगी।
समुदाय की भागीदारी के बिना लंबी अवधि का समाधान मुश्किल
कार्यशाला में community participation और long-term maintenance को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया। Watershed treatment से तैयार किए गए structures और conservation measures तभी लंबे समय तक प्रभावी रह सकते हैं जब उनका maintenance और local management मजबूत हो।
Catchment में रहने वाले किसान और ग्रामीण समुदाय water resources के प्रत्यक्ष उपयोगकर्ता होते हैं। इसलिए स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों को intervention design में शामिल करना जरूरी होगा।
इसी कारण proposed framework में institutional structure, community participation, monitoring and evaluation तथा long-term maintenance को भी शामिल किया गया है।
देशभर में विस्तार की संभावना के लिए तैयार होगा evidence
इन pilot projects का एक बड़ा उद्देश्य ऐसा evidence base तैयार करना है जिससे भविष्य में watershed-based river rejuvenation programmes को बड़े स्तर पर लागू करने के बारे में बेहतर निर्णय लिया जा सके।
यदि pilot interventions से यह स्पष्ट होता है कि catchment treatment, groundwater recharge, soil and water conservation और अन्य watershed measures से नदी के seasonal flow तथा ecological functions में ठोस सुधार हो सकता है, तो इस approach को अन्य suitable catchments में भी अपनाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सकता है।
इसके लिए monitoring और evaluation के दौरान केवल short-term results नहीं, बल्कि interventions के long-term outcomes पर भी नजर रखी जाएगी।
नदी को बचाने के लिए नदी से बाहर देखना होगा
नदी पुनरुद्धार की इस proposed approach का मूल विचार यही है कि किसी नदी की सेहत केवल उसकी मुख्य धारा से तय नहीं होती। नदी के पीछे मौजूद पूरा landscape और catchment system उसके जल प्रवाह को प्रभावित करता है।
बारिश का पानी किस तरह जमीन पर गिरता है, कितना पानी runoff के रूप में बह जाता है, कितना soil में infiltrate होता है, groundwater कितना recharge होता है और वर्षा समाप्त होने के बाद कितने समय तक नदी में पानी बना रहता है—इन सभी प्रक्रियाओं का नदी के health से सीधा संबंध है।
इसीलिए watershed development को river rejuvenation से जोड़ने का प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में water management के लिए एक व्यापक framework तैयार कर सकता है।
प्रस्तावित pilot projects के माध्यम से अब यह जांचने का प्रयास किया जाएगा कि scientific hydrological planning, modern mapping technology, watershed treatment, groundwater recharge और community participation को एक साथ लागू करने से नदियों और धाराओं के flow system में कितना सुधार लाया जा सकता है।
आने वाले समय में इन परियोजनाओं से मिलने वाले परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि watershed-based river rejuvenation model को देश के अन्य उपयुक्त catchment क्षेत्रों में किस तरह और किस पैमाने पर आगे बढ़ाया जाए।

