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Home कृषि समाचार

खेत में Residue Management के 15 Practical तरीके: पराली को Waste नहीं, Resource बनाएं

15 Practical Methods for Farm Residue Management: Turn Stubble into a Resource, Not Waste

Fiza by Fiza
October 7, 2026
in कृषि समाचार
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Residue Management

Residue Management

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फसल काटने के बाद खेत में बचा पुआल, डंठल, भूसा, पत्तियां और दूसरे पौध अवशेष कई किसानों के लिए परेशानी बन जाते हैं। खासकर धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय कम हो, तो खेत जल्दी खाली करने का दबाव बढ़ जाता है। इसी जल्दबाजी में कई जगह फसल अवशेष जलाने जैसी स्थिति बनती है। लेकिन खेती का बदलता तरीका यह बता रहा है कि सही residue management अपनाकर इसी अवशेष को मिट्टी की सेहत सुधारने, नमी बचाने, अगली फसल लगाने और अतिरिक्त आमदनी के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2026 में crop residue management केवल पराली न जलाने तक सीमित विषय नहीं रह गया है। अब इसके साथ मशीनों की उपलब्धता, Custom Hiring Centres, बायो-एनर्जी, CBG, biomass pellets, composting, mulching और soil health को भी जोड़ा जा रहा है। सितंबर 2026 में ICAR के कार्यक्रमों में भी sustainable agriculture और crop residue management को आगामी रबी सीजन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में रखा गया। इसलिए किसान के लिए सबसे जरूरी सवाल यह है कि उसके खेत, फसल, मशीनों की उपलब्धता और अगली बुवाई के समय के अनुसार कौन-सा तरीका सबसे practical है।

Residue Management क्या है?

सरल भाषा में, फसल कटाई के बाद खेत में बचे पौध अवशेषों को जलाने या बेकार छोड़ने के बजाय उनका सही उपयोग करना residue management कहलाता है।फसल अवशेष मुख्य रूप से दो तरीकों से संभाले जा सकते हैं।पहला है in-situ management, यानी अवशेष को खेत से बाहर निकाले बिना वहीं काटना, फैलाना, mulch बनाना या मिट्टी में मिलाना।

दूसरा है ex-situ management, जिसमें पराली या दूसरे अवशेष को खेत से इकट्ठा करके पशु चारे, compost, biomass fuel, pellets, briquettes, CBG या दूसरे उपयोग के लिए भेजा जाता है। हर किसान के लिए एक ही तरीका सही नहीं होता। जिस किसान के पास समय कम है, उसके लिए direct seeding और Happy Seeder उपयोगी हो सकता है। जिस इलाके में biomass plant या straw buyer उपलब्ध है, वहां baler से गांठ बनाकर residue बाहर भेजना अधिक लाभदायक हो सकता है।

1. खेत में अवशेष को Mulch बनाकर छोड़ना

Residue management का सबसे आसान सिद्धांत है कि हर पौध अवशेष को खेत से हटाना जरूरी नहीं है।गेहूं, धान, मक्का और दूसरी फसलों के कटे हुए अवशेष को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत की सतह पर समान रूप से फैलाया जा सकता है। इससे मिट्टी खुली नहीं रहती।Mulch की परत मिट्टी से पानी के तेजी से वाष्पीकरण को कम करने में मदद करती है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव धीरे-धीरे इस जैविक पदार्थ को तोड़ते रहते हैं।इसका फायदा खासकर उन क्षेत्रों में हो सकता है जहां सिंचाई का पानी सीमित है।

लेकिन mulch बहुत मोटी और असमान परत में नहीं होना चाहिए। यदि एक जगह बहुत ज्यादा पुआल जमा हो गया, तो बुवाई में समस्या आ सकती है। इसलिए combine harvesting के समय straw spreader या Super SMS जैसी व्यवस्था residue को समान रूप से फैलाने में मदद कर सकती है।

2. Happy Seeder से पराली के बीच गेहूं की सीधी बुवाई

धान के बाद गेहूं उगाने वाले क्षेत्रों में Happy Seeder residue management का जाना-पहचाना विकल्प है।इस तकनीक में धान की पराली को पूरी तरह हटाना जरूरी नहीं होता। मशीन पराली के बीच से गेहूं के बीज को मिट्टी में डाल देती है और बचा residue ऊपर mulch की तरह पड़ा रहता है।इसका practical फायदा यह है कि किसान को पहले पराली हटाने, फिर खेत की कई बार जुताई करने और उसके बाद बुवाई करने की पूरी प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती।

हालांकि मशीन का चुनाव खेत की residue load, tractor power और soil condition देखकर होना चाहिए। केवल मशीन उपलब्ध होने से परिणाम अच्छे नहीं होंगे। खेत में पराली का समान वितरण बहुत जरूरी है।

3. Super Seeder का इस्तेमाल

Super Seeder धान के बाद गेहूं की बुवाई वाले क्षेत्रों में एक और उपयोगी विकल्प है।यह मशीन खड़े और बिखरे हुए residue को manage करते हुए मिट्टी में बीज डाल सकती है। इसका उपयोग उन किसानों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जो residue को खेत के अंदर ही मिलाते हुए अगली फसल लगाना चाहते हैं।लेकिन यहां एक practical बात समझनी जरूरी है।हर खेत में Super Seeder का खर्च समान नहीं होगा। डीजल खपत, tractor capacity, मिट्टी में नमी और खेत में residue की मात्रा से वास्तविक लागत बदल सकती है।इसलिए सिर्फ मशीन खरीदना जरूरी नहीं। यदि साल में कुछ ही एकड़ में इसका इस्तेमाल होना है, तो Custom Hiring Centre से किराये पर मशीन लेना कई किसानों के लिए ज्यादा आर्थिक विकल्प हो सकता है।

4. Surface Seeder और Zero Till Drill

Residue management का उद्देश्य केवल अवशेष हटाना नहीं होना चाहिए। लक्ष्य यह भी होना चाहिए कि अगली फसल कम समय और कम field operations में बोई जा सके।Surface Seeder और Zero Till Seed-cum-Fertilizer Drill जैसी मशीनों को भी सरकारी CRM कार्यक्रमों में बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार CRM scheme में Happy Seeder, Super Seeder, Smart Seeder, Surface Seeder और Zero Till Seed-cum-Fertilizer Drill जैसी मशीनें in-situ management के विकल्पों में शामिल हैं।Zero tillage उन खेतों में उपयोगी हो सकती है जहां किसान बार-बार जुताई कम करना चाहता है।कम soil disturbance से fuel और field operations बच सकते हैं, लेकिन मशीन का इस्तेमाल residue की स्थिति देखकर करना चाहिए।

5. Straw Chopper और Mulcher से residue को छोटा करें

कई बार असली समस्या residue की मात्रा नहीं, बल्कि उसका आकार होता है।लंबे डंठल seeder में फंस सकते हैं या खेत में uneven layer बना सकते हैं। ऐसे खेत में Straw Chopper या Mulcher से अवशेष को छोटे हिस्सों में काटना practical समाधान हो सकता है।काटने के बाद residue को दो तरीके से manage किया जा सकता है।

उसे मिट्टी की सतह पर mulch के रूप में छोड़ा जा सकता है या उचित स्थिति में मिट्टी में incorporate किया जा सकता है।छोटे टुकड़ों का decomposition सामान्यतः लंबे और मोटे डंठलों की तुलना में आसान होता है क्योंकि सूक्ष्मजीवों के संपर्क के लिए surface area बढ़ जाता है।

6. Pusa Decomposer जैसे microbial विकल्प

मशीनों के साथ biological residue management पर भी काम बढ़ा है।ICAR-IARI द्वारा विकसित Pusa Decomposer एक microbial consortium है जिसका उपयोग धान की पराली सहित कई तरह के कृषि और बागवानी अवशेषों के decomposition में किया जा सकता है। ICAR के अनुसार bio-decomposer को residue incorporation के आसपास इस्तेमाल करने से decomposition की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है।यहां किसान को एक गलती नहीं करनी चाहिए।

Decomposer को ऐसा उत्पाद नहीं समझना चाहिए कि spray करते ही अगले दिन पूरा straw गायब हो जाएगा। जैविक decomposition पर moisture, temperature, residue की मोटाई और microbial activity का असर पड़ता है।इसलिए decomposer का उपयोग स्थानीय कृषि वैज्ञानिक, KVK या कृषि विभाग की recommendation के अनुसार करना बेहतर है।

7. फसल अवशेष से Compost बनाना

हर residue को मशीन से खेत में मिलाना जरूरी नहीं है।सब्जियों, दलहनों, तिलहनों, बगीचों और दूसरे कृषि कार्यों से निकलने वाला जैविक कचरा compost बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।इसके लिए crop residues को एक जगह जमा करके गोबर और दूसरे decomposable organic material के साथ composting system में लगाया जा सकता है।

अच्छी तरह तैयार compost मिट्टी में organic matter जोड़ने का एक स्रोत बन सकती है।लेकिन अधसड़ा material सीधे बड़ी मात्रा में खेत में डालना सही strategy नहीं है। Compost को पर्याप्त decomposition मिलने देना जरूरी है।छोटे किसानों के लिए गांव स्तर पर सामूहिक composting unit भी एक विकल्प हो सकती है।

8. Baler से पराली की गांठ बनाकर खेत से निकालना

जहां residue को खेत में रखना संभव नहीं है, वहां ex-situ residue management बेहतर रास्ता हो सकता है।इसके लिए Straw Rake पराली को इकट्ठा करता है और Baler उसे compact गांठों में बदल देता है।इसका फायदा यह है कि खुले और फैले हुए straw की तुलना में bale को उठाना, transport करना और store करना आसान हो जाता है।इन bales का उपयोग उपलब्ध स्थानीय व्यवस्था के आधार पर biomass plants, industrial boilers, pellet units, briquette plants, CBG projects और दूसरे उपयोग में किया जा सकता है।इस मॉडल में सबसे महत्वपूर्ण चीज मशीन नहीं, buyer linkage है।

यदि खेत से biomass plant बहुत दूर है और transport महंगा पड़ता है, तो केवल baling आर्थिक रूप से उपयोगी नहीं होगी। Baler लगाने से पहले किसान या FPO को यह पता करना चाहिए कि आसपास straw buyer कौन है और delivery की वास्तविक लागत क्या आएगी।

9. Biomass Pellets और Briquettes का बढ़ता उपयोग

Residue management में पिछले कुछ वर्षों का बड़ा बदलाव यह है कि crop residue को केवल waste नहीं बल्कि energy raw material की तरह देखा जाने लगा है।Paddy straw को process करके biomass pellets और briquettes बनाए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल कुछ thermal plants, industrial units और दूसरे fuel applications में किया जाता है।2025 में CAQM ने पंजाब और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में paddy-straw-based biomass pellets और briquettes के उपयोग को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त निर्देश भी जारी किए थे।यह बदलाव किसानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में residue management का बड़ा हिस्सा गांव से उद्योग तक biomass supply chain बनाने पर निर्भर कर सकता है। इसके लिए collection, baling, storage और transport चारों का व्यवस्थित नेटवर्क जरूरी होगा।

10. CBG प्लांट के लिए crop residue

Compressed Bio-Gas यानी CBG भी crop residue के उपयोग का तेजी से उभरता क्षेत्र है।कुछ CBG projects agricultural biomass को feedstock के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इससे खेत का residue energy value chain का हिस्सा बन सकता है।लेकिन छोटे किसान को सीधे CBG plant लगाने की जरूरत नहीं है।उसके लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि उसके जिले में कोई operational biomass या CBG procurement chain मौजूद है, तो FPO, cooperative या aggregator के माध्यम से residue supply करने का अवसर बन सकता है।इसलिए आने वाले समय में किसान के लिए सवाल सिर्फ “पराली का क्या करें?” नहीं होगा, बल्कि “हमारे जिले में इसे खरीदने वाला कौन है?” भी उतना ही जरूरी होगा।

11. Custom Hiring Centre छोटे किसान के लिए महत्वपूर्ण

Residue management की आधुनिक मशीनें हर किसान के लिए खरीदना आर्थिक रूप से सही नहीं है।उदाहरण के लिए किसान को Happy Seeder साल में केवल कुछ दिन चाहिए। ऐसे में मशीन की पूरी कीमत, maintenance और storage खुद उठाना महंगा पड़ सकता है।यहीं Custom Hiring Centre यानी CHC का महत्व बढ़ता है।

सरकारी CRM व्यवस्था के तहत individual farmers को चिन्हित crop residue management machinery की खरीद पर 50 प्रतिशत तक financial assistance और eligible groups तथा Custom Hiring Centre projects के लिए तय शर्तों के तहत 80 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान रहा है।2026 के सरकारी दस्तावेज में बताया गया कि 2018-19 से 2025-26 के बीच CRM पहल के तहत 42,000 से अधिक Custom Hiring Centres स्थापित किए जा चुके थे और 3.24 लाख से अधिक मशीनें CHCs तथा individual farmers तक पहुंचाई गई थीं।छोटे किसान के लिए इसका practical मतलब है कि पहली कोशिश मशीन खरीदने की नहीं, बल्कि अपने आसपास उपलब्ध CHC खोजने की होनी चाहिए।

12. छोटे और सीमांत किसानों के लिए मशीन उपलब्धता पर नया जोर

Residue management policy में भी अब केवल मशीन खरीदने पर जोर नहीं है।2025 में CAQM ने small और marginal farmers के लिए CRM machinery की rent-free availability की योजना बनाने से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए।यह महत्वपूर्ण बदलाव है।पराली प्रबंधन में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक यह होती है कि जरूरत के ठीक समय मशीन उपलब्ध नहीं होती। धान कटने और गेहूं बोने के बीच किसान के पास सीमित समय होता है।इसलिए आने वाले वर्षों में मशीनों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका सही समय पर किसान तक पहुंचना होगा।किसान को अपने जिले की व्यवस्था के अनुसार कृषि विभाग, CHC, FPO, cooperative या पंचायत से harvesting season शुरू होने से पहले मशीन booking की जानकारी लेनी चाहिए।

13. Combine Harvesting के समय ही residue management शुरू करें

अक्सर residue management की planning फसल कटने के बाद शुरू होती है। यही पहली गलती है।सही planning harvesting से पहले होनी चाहिए।यदि combine harvester straw को uneven तरीके से एक तरफ गिरा देता है, तो अगली मशीन का काम कठिन हो सकता है।इसलिए harvesting से पहले तय करें कि अगली फसल किस मशीन से बोई जाएगी।अगर Happy Seeder इस्तेमाल करना है, तो residue distribution उसी हिसाब से होना चाहिए।अगर baling करनी है, तो straw collection का अलग plan बनाना होगा।अगर incorporation करना है, तो moisture और decomposition के लिए कितना समय मिलेगा, यह देखना होगा।मतलब residue management वास्तव में harvest के बाद की नहीं, harvest planning की प्रक्रिया है।

14. Rice-Wheat खेत के लिए एक Practical Model

मान लीजिए धान की कटाई के बाद किसान को जल्दी गेहूं बोना है।ऐसे खेत में एक practical workflow यह हो सकता है:Combine harvesting के समय residue को समान रूप से फैलाएं।खेत की स्थिति और available machinery देखें।यदि residue mulch के रूप में रखना है तो Happy Seeder या suitable direct seeding system अपनाया जा सकता है।

यदि residue incorporation करना है तो Super Seeder या उपलब्ध उचित machinery का इस्तेमाल किया जा सकता है।यदि खेत में residue load बहुत ज्यादा है और आसपास biomass buyer मौजूद है, तो कुछ straw को baler से बाहर निकाला जा सकता है।यह hybrid model कई स्थितियों में एक ही solution पर निर्भर रहने से ज्यादा practical हो सकता है।

15. मक्का और दूसरे फसल अवशेष का क्या करें?

Residue management की चर्चा अक्सर धान की पराली तक सीमित रह जाती है, जबकि मक्का, कपास, गन्ना, सरसों, सोयाबीन और बागवानी फसलों से भी बड़ी मात्रा में biomass निकलता है।मक्का के डंठल को chop करके mulch या composting में इस्तेमाल किया जा सकता है।दलहनी फसलों के स्वस्थ अवशेष मिट्टी में organic matter recycling के लिए उपयोगी हो सकते हैं।गन्ने की trash को उचित व्यवस्था के साथ mulch के रूप में manage किया जा सकता है।लेकिन रोगग्रस्त plant material के मामले में सामान्य residue recycling का फैसला सावधानी से करना चाहिए। किसी गंभीर बीमारी से संक्रमित crop residue को बिना सलाह के compost या mulch में डालने से रोग चक्र जारी रहने का जोखिम हो सकता है।ऐसी स्थिति में KVK या plant protection specialist की स्थानीय recommendation लेना बेहतर है।

16. Residue Management और मिट्टी की सेहत

फसल अवशेष सिर्फ कचरा नहीं होता। पौधे ने पूरे मौसम में मिट्टी से जो nutrients लिए, उनका एक हिस्सा harvested grain में जाता है और एक हिस्सा stalk, leaves तथा दूसरे plant material में रहता है।जब residue को उचित तरीके से खेत में recycle किया जाता है, तो decomposition के बाद उसका कुछ nutrient और carbon मिट्टी के चक्र में वापस आता है।हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि crop residue डालने के बाद fertilizer की जरूरत तुरंत खत्म हो जाएगी।

Residue decomposition और nutrient release धीरे-धीरे होता है। इसलिए fertilizer management soil test, crop requirement और स्थानीय agronomic recommendation के आधार पर ही करना चाहिए।

ICAR के 2026 कार्यक्रमों में भी soil-test-based nutrient management, balanced fertilization और crop residue recycling को soil health सुधारने वाली integrated practices के रूप में आगे बढ़ाया गया है।

17. कौन-सा Residue Management तरीका चुनें?

किसान सिर्फ यह देखकर फैसला न करे कि पड़ोसी कौन-सी मशीन चला रहा है।

पांच सवाल पहले पूछें:

  • अगली फसल कितने दिन में बोनी है?

यदि समय बहुत कम है, तो ऐसी तकनीक चाहिए जिसमें residue हटाने और कई जुताइयों की जरूरत कम हो।

  • खेत में residue कितना है?

बहुत अधिक residue और कम residue के लिए एक जैसी मशीन setting सही नहीं होगी।

  • पास में कौन-सी मशीन उपलब्ध है?

CHC में उपलब्ध मशीनें जानना जरूरी है।

  • क्या आसपास residue buyer है?

यदि biomass, pellet या CBG unit आसपास है, तो ex-situ option आर्थिक रूप से उपयोगी हो सकता है।

  • मिट्टी में नमी कितनी है?

Incorporation और decomposition की सफलता moisture condition से प्रभावित होगी।इन पांच सवालों के जवाब मिलने के बाद residue management का निर्णय अधिक practical बन जाता है।

18. इन गलतियों से बचें

सबसे पहली गलती है harvest के बाद अंतिम दिन तक इंतजार करना।

  • दूसरी गलती है बिना खेत की स्थिति देखे मशीन चुनना।
  • तीसरी गलती है decomposer को instant solution मान लेना।
  • चौथी गलती है buyer तय किए बिना baling करवाना।
  • पांचवीं गलती है residue को खेत में एक जगह मोटी layer में छोड़ देना।
  • छठी गलती है केवल subsidy देखकर मशीन खरीद लेना।

मशीन तभी आर्थिक रूप से सही है जब उसका पर्याप्त annual utilization हो। अन्यथा किराये की मशीन या shared machinery बेहतर विकल्प हो सकती है।

2026 का नया संदेश: Residue से Resource की ओर

2026 में crop residue management की दिशा साफ तौर पर बदल रही है।सितंबर 2026 में पंजाब में आयोजित ICAR stakeholder workshop में policymakers, scientists, farmers, FPOs, machinery manufacturers, Custom Hiring Centres, service providers और industry को एक ही मंच पर residue management के लिए जोड़ने पर जोर दिया गया।21 सितंबर 2026 को Bathinda में आयोजित कार्यक्रम में भी resource-based crop planning, diversification और crop residue management को sustainable farming से जोड़ा गया।इससे एक बात स्पष्ट होती है कि आने वाला model केवल “पराली मत जलाओ” नहीं होगा।नया model होगा:

खेत में उपयोग + मशीन sharing + biomass collection + industry linkage + soil health management।यही बदलाव residue को liability से agricultural resource में बदल सकता है।

 

खेत में बचा crop residue समस्या तभी बनता है जब उसके लिए पहले से योजना न हो।सही residue management अपनाकर किसान अवशेष को mulch बना सकता है, मिट्टी में recycle कर सकता है, अगली फसल की direct sowing कर सकता है, compost तैयार कर सकता है या baling करके biomass value chain से जोड़ सकता है।Happy Seeder, Super Seeder, Mulcher, Zero Till Drill, Surface Seeder, Straw Rake और Baler जैसी मशीनों ने किसानों के सामने कई विकल्प खोले हैं। वहीं Pusa Decomposer जैसे biological solutions residue decomposition में एक अतिरिक्त विकल्प देते हैं।

लेकिन सबसे practical strategy वही है जो किसान की जमीन, अगली फसल, उपलब्ध समय, मशीन की लागत और स्थानीय बाजार को ध्यान में रखकर बनाई जाए।छोटे किसान के लिए जरूरी नहीं कि हर मशीन खरीदी जाए। CHC, cooperative, FPO और पंचायत स्तर पर machinery sharing ज्यादा किफायती हो सकती है।और यदि आसपास biomass, pellet, briquette या CBG industry मौजूद है, तो crop residue भविष्य में अतिरिक्त value देने वाला raw material भी बन सकता है।इसलिए harvesting शुरू होने से पहले तीन चीजें तय कर लें: residue खेत में रखना है या बाहर भेजना है, कौन-सी मशीन चाहिए और वह मशीन किस तारीख को उपलब्ध होगी।यही simple planning बेहतर residue management की शुरुआत है।खेती में अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “फसल के बाद बचे अवशेष को कैसे खत्म करें?”बेहतर सवाल है:

“इस residue का अगला उपयोग क्या होगा?” इस लेख में शामिल 2025-26 के policy और technology updates के लिए मैंने PIB और ICAR जैसे सरकारी स्रोतों को प्राथमिकता दी है। सब्सिडी और मशीन उपलब्धता राज्य, वर्ष और पात्रता के अनुसार बदल सकती है, इसलिए आवेदन से पहले स्थानीय कृषि विभाग या संबंधित योजना की वर्तमान शर्तें जांचना जरूरी है।

Tags: buyer linkageCustom Hiring CentresHappy Seeder residue managementICAR stakeholder workshopResidue Managementstraw spreaderZero Till Seed-cum-Fertilizer Drill
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