• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

खाद की बिक्री पर लगी पाबंदियों की समीक्षा करें राज्य सरकारें, किसानों को मिले उन्नत फसल पोषण उत्पादों के चयन की आजादी: FAI

State governments should review restrictions on the sale of fertilizers, farmers should be given the freedom to choose advanced crop nutrition products: FAI

Emran Khan by Emran Khan
October 16, 2026
in कृषि समाचार
0
किसानों के हित में संतुलित नीति की जरूरत

किसानों के हित में संतुलित नीति की जरूरत

0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

देश में किसानों को बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी की सेहत के लिए उन्नत कृषि इनपुट उपलब्ध कराने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने राज्य सरकारों से गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों और विशेष फसल पोषण उत्पादों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा करने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि इन प्रतिबंधों से किसानों की उन उत्पादों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है, जिनका उपयोग फसल और मिट्टी की विशेष जरूरतों के अनुसार किया जाता है।

FAI के अनुसार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में ऐसे प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जबकि हाल ही में बिहार में भी इस तरह के कदम उठाए गए हैं। इनका असर उन कंपनियों की ओर से बेचे जाने वाले गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों और स्पेशियलिटी क्रॉप न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स पर पड़ सकता है, जो सब्सिडी वाले उर्वरकों की आपूर्ति भी करती हैं। एसोसिएशन ने कहा है कि इन उत्पादों की बिक्री उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertiliser Control Order-FCO), 1985 के नियामक ढांचे के अंतर्गत आती है।

रबी सीजन की शुरुआत से पहले इस मुद्दे का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि इस समय गेहूं, सरसों, चना, मसूर और अन्य रबी फसलों की बुवाई तथा पोषण प्रबंधन की तैयारियां की जाती हैं। FAI का मानना है कि किसानों को फसल और मिट्टी की जरूरत के मुताबिक स्वीकृत कृषि इनपुट चुनने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, यदि खाद की बिक्री के दौरान किसी तरह की अनुचित व्यावसायिक गतिविधि होती है, तो उस पर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।

गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों पर प्रतिबंध से किसानों की पसंद हो सकती है सीमित

FAI ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों और विशेष पोषण उत्पादों की बिक्री पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय ऐसी नीति अपनाई जाए, जो किसानों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ उन्हें स्वीकृत उत्पादों तक पहुंच भी उपलब्ध कराए।

एसोसिएशन के अनुसार, भारतीय कृषि में उर्वरकों की भूमिका अब केवल पारंपरिक पोषक तत्वों की आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गई है। खेती में अलग-अलग फसलों, मिट्टी की स्थिति और पोषक तत्वों की कमी को ध्यान में रखते हुए विशेष उत्पादों का उपयोग भी बढ़ रहा है। इन उत्पादों का उद्देश्य फसल की जरूरतों के अनुसार पोषण उपलब्ध कराने और पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल में सहायता करना है।

यदि किसानों को ऐसे उत्पादों की उपलब्धता सीमित हो जाती है, तो उनकी फसल-विशिष्ट पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, हर फसल और हर खेत में एक ही प्रकार के उत्पाद की जरूरत नहीं होती। इसलिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह, मिट्टी की जांच और फसल की आवश्यकता के आधार पर पोषण प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है।

FAI का तर्क है कि नियामक ढांचे के अंतर्गत स्वीकृत उत्पादों की उपलब्धता को बनाए रखते हुए अनुचित बिक्री गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है। इससे किसानों के पास विकल्प बने रहेंगे और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयास भी जारी रहेंगे।

पारंपरिक खाद से आगे बढ़ रहा है फसल पोषण का दायरा

भारत में उर्वरक नीति का दायरा समय के साथ व्यापक हुआ है। अब खेती में पारंपरिक उर्वरकों के साथ कई प्रकार के विशेष पोषण उत्पादों और आधुनिक कृषि इनपुट पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

FAI ने अपने बयान में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, वाटर-सॉल्यूबल फर्टिलाइजर्स, बेनिफिशियल एलिमेंट फर्टिलाइजर्स, लिक्विड एवं ऑर्गेनिक-बेस्ड इनपुट, बायोफर्टिलाइजर्स, बायोस्टिमुलेंट्स और नैनोफर्टिलाइजर्स जैसी श्रेणियों का उल्लेख किया है।

इन उत्पादों की उपयोगिता अलग-अलग परिस्थितियों में भिन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का उपयोग फसलों में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए किया जाता है। वाटर-सॉल्यूबल फर्टिलाइजर्स उन कृषि प्रणालियों में उपयोगी हो सकते हैं, जहां पानी के माध्यम से पोषक तत्वों की आपूर्ति की जाती है। वहीं, बायोफर्टिलाइजर्स और अन्य विशेष उत्पादों का इस्तेमाल उनकी निर्धारित विशेषताओं तथा फसल की जरूरतों के अनुसार किया जाता है।

नैनोफर्टिलाइजर्स और बायोस्टिमुलेंट्स जैसे उत्पाद भी आधुनिक कृषि इनपुट के व्यापक होते दायरे का हिस्सा हैं। हालांकि, इन सभी उत्पादों की उपयोगिता, प्रयोग की विधि और परिणाम एक जैसे नहीं होते। किसानों को उत्पाद के नियामक दर्जे, लेबल पर दिए गए निर्देशों और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही इनका उपयोग करना चाहिए।

FAI के अनुसार, इन उत्पादों का उद्देश्य पारंपरिक उर्वरकों का स्थान लेना ही नहीं, बल्कि जरूरत के मुताबिक संतुलित पोषण प्रबंधन में सहयोग देना भी है। भारतीय कृषि में पोषक तत्वों की कमी, मिट्टी की सेहत से जुड़ी चुनौतियां, पानी और पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता तथा बदलती जलवायु जैसी समस्याओं को देखते हुए विशेष फसल पोषण समाधानों का महत्व बढ़ रहा है।

मिट्टी की सेहत और पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल पर जोर

फसल उत्पादन में केवल अधिक मात्रा में खाद डालना ही पर्याप्त नहीं है। बेहतर परिणामों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और संबंधित फसल को किस स्तर पर पोषण की आवश्यकता है।

नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे प्रमुख पोषक तत्वों के साथ कई फसलों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। यदि मिट्टी में किसी आवश्यक तत्व की कमी हो, तो फसल की वृद्धि और उपज प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, आवश्यकता से अधिक या असंतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने से लागत बढ़ने और पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता घटने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

इसी कारण संतुलित पोषण प्रबंधन (Balanced Nutrient Management) को टिकाऊ खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें मिट्टी की जांच, फसल की आवश्यकता, सही मात्रा और उपयुक्त समय पर उर्वरकों का उपयोग शामिल है।

FAI का कहना है कि विशेष फसल पोषण उत्पाद संतुलित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। इनसे पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता, फसल उत्पादकता और कृषि उपज की गुणवत्ता में सुधार की संभावनाएं हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक परिणाम फसल, मिट्टी, मौसम, उत्पाद और इस्तेमाल की विधि जैसे कारकों पर निर्भर करते हैं।

रबी सीजन के दौरान गेहूं, सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों के लिए पोषण प्रबंधन विशेष महत्व रखता है। ऐसे में किसानों के लिए स्वीकृत उत्पादों की उपलब्धता और सही कृषि सलाह तक पहुंच बनाए रखना जरूरी है।

उर्वरक उद्योग के अनुसंधान और नवाचार पर भी पड़ सकता है असर

FAI ने कहा है कि गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों और विशेष फसल पोषण उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंधों का प्रभाव केवल तत्काल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उर्वरक उद्योग के अनुसंधान, उत्पाद विकास और किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने से जुड़े प्रयास भी प्रभावित हो सकते हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, उर्वरक कंपनियां नए उत्पाद विकसित करने, खेतों में उनके प्रदर्शन का आकलन करने, किसानों को तकनीकी जानकारी देने और कृषि विस्तार गतिविधियों पर निवेश करती हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को बेहतर पोषण प्रबंधन विकल्पों से परिचित कराना और उत्पादों के उचित उपयोग को बढ़ावा देना है।

यदि कंपनियों के लिए स्वीकृत गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की बिक्री के अवसर सीमित हो जाते हैं, तो भविष्य में अनुसंधान और नवाचार पर निवेश करने की उनकी इच्छा प्रभावित हो सकती है। FAI ने आशंका जताई है कि इसका असर पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की गति पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, इन प्रतिबंधों के कारण उद्योग के निवेश में कितनी कमी आएगी या कृषि उत्पादकता पर कितना असर पड़ेगा, इस संबंध में एसोसिएशन ने कोई विशिष्ट आंकड़ा जारी नहीं किया है। फिलहाल उसकी चिंता संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर है।

जबरन टैगिंग पर सख्त कार्रवाई का समर्थन

FAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्यों की ओर से प्रतिबंध लगाने के पीछे एक प्रमुख चिंता खाद की जबरन टैगिंग (Forced Tagging) से जुड़ी है। इस प्रक्रिया में किसान को सब्सिडी वाला उर्वरक खरीदने के साथ किसी अन्य उत्पाद को भी अनिवार्य रूप से खरीदने के लिए कहा जाता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी किसान को सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए किसी अतिरिक्त उत्पाद की खरीद के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह उसकी स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करता है। इससे किसान पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ सकता है, खासकर तब जब उसे संबंधित उत्पाद की जरूरत न हो।

FAI ने कहा है कि वह इस तरह की अनुचित बिक्री प्रथाओं का विरोध करता है। एसोसिएशन के अनुसार, यदि कोई कंपनी, वितरक या खुदरा विक्रेता किसानों पर जबरन उत्पाद खरीदने का दबाव डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, संगठन का मानना है कि इस समस्या का समाधान सभी गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की बिक्री पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय जबरन टैगिंग की पहचान और उसे रोकने पर केंद्रित होना चाहिए। इससे अनुचित बिक्री गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के साथ किसानों को स्वेच्छा से स्वीकृत उत्पाद खरीदने का विकल्प भी मिल सकता है।

FAI ने यह भी कहा कि सब्सिडी वाले उर्वरकों की आपूर्ति और आवंटन केंद्र तथा राज्य सरकारों के निर्देशों के तहत निर्धारित होता है। ऐसे में संगठन के अनुसार, कंपनियों और विपणनकर्ताओं को जबरन टैगिंग के लिए सामान्य रूप से जिम्मेदार ठहराने के बजाय संबंधित गतिविधियों की वास्तविक जांच की जानी चाहिए।

मध्य प्रदेश के उदाहरण का किया उल्लेख

FAI ने मध्य प्रदेश में अपनाए गए दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जबरन टैगिंग के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि किसानों को सब्सिडी वाले और गैर-सब्सिडी वाले दोनों प्रकार के उर्वरकों तक पहुंच बनाए रखने का अवसर मिला है।

एसोसिएशन के अनुसार, यह उदाहरण दिखाता है कि किसानों को अनुचित बिक्री प्रथाओं से बचाने और उनके लिए स्वीकृत कृषि इनपुट की उपलब्धता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

FAI ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे अपने यहां लागू प्रतिबंधों की समीक्षा करें और ऐसी व्यवस्था अपनाएं, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन किसानों के वैध विकल्प अनावश्यक रूप से सीमित न हों।

इस संबंध में यह ध्यान रखना जरूरी है कि मध्य प्रदेश में अपनाए गए दृष्टिकोण के बारे में यहां विवरण FAI के बयान पर आधारित है। अलग-अलग राज्यों में लागू नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्थिति संबंधित सरकारी आदेशों से स्पष्ट होगी।

FCO, 1985 के तहत नियामक ढांचे का मुद्दा

उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 (Fertiliser Control Order-FCO) भारत में उर्वरकों के नियमन से संबंधित महत्वपूर्ण ढांचा है। FAI का कहना है कि जिन विशेष फसल पोषण उत्पादों की बात की जा रही है, वे संबंधित नियामक व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, राष्ट्रीय नियामक ढांचे के अंतर्गत स्वीकृत उत्पादों पर अलग-अलग राज्यों में लगाए गए प्रतिबंधों के कारण किसानों को कुछ बाजारों में उनकी उपलब्धता से वंचित होना पड़ सकता है। संगठन का मानना है कि इस विषय पर विज्ञान-आधारित और पूर्वानुमान योग्य नीति की जरूरत है।

हालांकि, किसी उत्पाद की बिक्री पर लागू नियम उसकी श्रेणी, पंजीकरण या स्वीकृति तथा संबंधित सरकारी आदेशों पर निर्भर कर सकते हैं। इसलिए किसानों और विक्रेताओं के लिए संबंधित उत्पाद की वैधता और राज्य में लागू निर्देशों की जानकारी रखना आवश्यक है।

FAI ने राज्य सरकारों से ऐसे उपाय अपनाने की मांग की है, जिनसे किसानों के हितों की रक्षा हो और कृषि क्षेत्र में स्वीकृत तकनीकों को अपनाने के अवसर भी बने रहें।

FAI ने क्या कहा?

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि भारतीय कृषि में टिकाऊ तरीके से उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को स्वीकृत आधुनिक फसल पोषण समाधानों तक पहुंच मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि FCO इन उत्पादों के लिए राष्ट्रीय नियामक ढांचा उपलब्ध कराता है, लेकिन राज्य स्तर पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण राष्ट्रीय ढांचे के अंतर्गत स्वीकृत उत्पाद भी कुछ बाजारों में किसानों के लिए अनुपलब्ध हो सकते हैं।

डॉ. चौधरी के अनुसार, ऐसी नीति की आवश्यकता है जो विज्ञान पर आधारित हो, किसानों के हितों की रक्षा करे और उन्हें आधुनिक कृषि समाधानों को अपनाने में सक्षम बनाए।

FAI ने दोहराया कि उर्वरक उद्योग केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर जिम्मेदार विपणन प्रथाओं, संतुलित पोषण प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट की उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए काम करने को तैयार है।

किसानों के हित में संतुलित नीति की जरूरत

गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों और विशेष फसल पोषण उत्पादों की बिक्री को लेकर उठा यह मुद्दा किसानों की पसंद, कृषि इनपुट के नियमन और अनुचित व्यावसायिक गतिविधियों पर नियंत्रण के बीच संतुलन से जुड़ा है।

एक ओर, जबरन टैगिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है, ताकि किसानों को उनकी जरूरत के बिना अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। दूसरी ओर, स्वीकृत उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है, ताकि किसान अपनी फसल और मिट्टी की आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय ले सकें।

FAI ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार सहित संबंधित राज्यों से प्रतिबंधों की समीक्षा करने और लक्षित कार्रवाई की नीति अपनाने की अपील की है। संगठन के मुताबिक, जबरन टैगिंग पर सख्ती के साथ किसानों को स्वेच्छा से स्वीकृत फसल पोषण उत्पाद चुनने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

आने वाले रबी सीजन में इस मुद्दे पर राज्य सरकारों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। किसानों के लिए सबसे जरूरी यह है कि उन्हें खाद और अन्य कृषि इनपुट की खरीद में पारदर्शिता, उचित जानकारी और अपनी खेती की जरूरत के अनुसार विकल्प उपलब्ध हों।

 

Tags: AgricultureFarmingIndian Farminglatest News
Previous Post

India Chem 2026: मुंबई में 22 से 24 अक्टूबर तक जुटेंगे वैश्विक केमिकल उद्योग के दिग्गज, भारत को ग्लोबल केमिकल्स हब बनाने पर होगा मंथन

Next Post

रॉटरडैम कन्वेंशन की बैठक में Profenofos, Quinalphos और Phenthoate पर भारत को बड़ी सफलता, PMFAI ने किया प्रमुख कीटनाशकों का प्रभावी बचाव

Next Post
रॉटरडैम कन्वेंशन की बैठक में Profenofos, Quinalphos और Phenthoate पर भारत को बड़ी सफलता, PMFAI ने किया प्रमुख कीटनाशकों का प्रभावी बचाव

रॉटरडैम कन्वेंशन की बैठक में Profenofos, Quinalphos और Phenthoate पर भारत को बड़ी सफलता, PMFAI ने किया प्रमुख कीटनाशकों का प्रभावी बचाव

Recent Posts

  • MSP New Rate 2026: गेहूं, धान और सरसों की नई कीमतें, जानें MSP और मंडी भाव में कितना अंतर
  • BASAI के CEO विपिन सैनी को Leadership Excellence Summit 2026 में सम्मान, टिकाऊ कृषि और किसान हितों पर रखे विचार
  • ESTIC 2026: कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा और पोषण पर ICAR पेश करेगा अपनी प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियां
  • महिला किसान दिवस 2026: कृषि विकास और विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर जोर
  • रॉटरडैम कन्वेंशन की बैठक में Profenofos, Quinalphos और Phenthoate पर भारत को बड़ी सफलता, PMFAI ने किया प्रमुख कीटनाशकों का प्रभावी बचाव

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.

Go to mobile version