राजस्थान के बाड़मेर जिले में फागलिया नेचुरल्स फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी से जुड़े 767 किसान प्राकृतिक खेती पद्धतियों को अपनाकर अरंडी की खेती कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य खेती की लागत कम करने के साथ प्राकृतिक तरीके से उत्पाद तैयार करना और किसानों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करना है।
प्राकृतिक खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया जाता है। फागलिया नेचुरल्स एफपीओ से जुड़े किसान इसी पद्धति के माध्यम से अरंडी का उत्पादन कर रहे हैं। इस खेती पद्धति को किसानों की उत्पादन लागत कम करने और प्राकृतिक उत्पादों को प्रोत्साहित करने के एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
एफपीओ के माध्यम से किसानों को बाजार से जोड़ने की पहल
फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, विपणन और बाजार से जुड़ने में मदद करने वाला संगठनात्मक माध्यम है। फागलिया नेचुरल्स एफपीओ भी प्राकृतिक रूप से उगाए गए अरंडी उत्पाद को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की पहल कर रहा है। इससे उपभोक्ता एफपीओ से सीधे उत्पाद खरीद सकते हैं।
कंपनी के उत्पाद की ऑनलाइन खरीदारी के लिए MyStore का लिंक साझा किया गया है। इसके अतिरिक्त, उत्पाद और एफपीओ से संबंधित जानकारी के लिए संपर्क व्यक्ति के रूप में सुरेश का नाम और मोबाइल नंबर 9799459490 उपलब्ध कराया गया है।
प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पर जोर
प्राकृतिक खेती को खेती की लागत कम करने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस पद्धति में स्थानीय संसाधनों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के उपयोग को महत्व दिया जाता है। फागलिया नेचुरल्स एफपीओ का उदाहरण दिखाता है कि किसान संगठन सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती और उत्पादों के सीधे विपणन को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकते हैं।
प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता, उत्पादन लागत और किसानों की आय पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव का आकलन स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किया जाना जरूरी है। हालांकि, 767 किसानों का इस पहल से जुड़ना बाड़मेर में किसान समूहों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के प्रयास को रेखांकित करता है।
कुल मिलाकर, फागलिया नेचुरल्स एफपीओ प्राकृतिक खेती से उत्पादित अरंडी को बाजार तक पहुंचाने और किसानों को सीधे बिक्री का माध्यम उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसी पहलें किसानों, उपभोक्ताओं और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में सहायक हो सकती हैं।

