• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

मछुआरों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों को बचाने की तैयारी, भारत बनाएगा अंतर्देशीय मत्स्य पालन का राष्ट्रीय रोडमैप

India to develop a national roadmap for inland fisheries to boost fishermen's income and conserve water resources

Emran Khan by Emran Khan
October 24, 2026
in कृषि समाचार
0
India to develop a national roadmap for inland fisheries to boost fishermen's income and conserve water resources

India to develop a national roadmap for inland fisheries to boost fishermen's income and conserve water resources

0
SHARES
3
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ छोटे मछुआरों की आय और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। केंद्र सरकार ने अंतर्देशीय लघु मत्स्य पालन (Inland Small-Scale Fisheries) के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना का उद्देश्य देश के नदियों, तालाबों, झीलों, जलाशयों और अन्य मीठे जल स्रोतों पर निर्भर मछुआरा समुदायों की समस्याओं को समझना, मत्स्य संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन करना और मछली उत्पादन से जुड़े लोगों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है।

भारत सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 23 अक्टूबर को भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान इस कार्य योजना के विकास चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के ढांचे के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। इसके लिए केंद्रीय मत्स्य विभाग, बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) के साथ मिलकर काम कर रहा है।

इस पहल को केवल मछली उत्पादन बढ़ाने की योजना के रूप में नहीं, बल्कि छोटे मछुआरों की आर्थिक स्थिति, जल संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

पांच वर्षों में 3 करोड़ टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

राष्ट्रीय कार्य योजना की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब भारत मत्स्य उत्पादन और समुद्री खाद्य निर्यात के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्षों में 3 करोड़ टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। साथ ही, समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात बढ़कर 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।

डॉ. लिखी ने बताया कि भारत का वार्षिक मछली उत्पादन लगभग 19.7 मिलियन टन है। इसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन की हिस्सेदारी करीब तीन-चौथाई बताई गई है। वहीं, देश का समुद्री खाद्य निर्यात 70,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

ये आंकड़े भारतीय मत्स्य क्षेत्र में अंतर्देशीय जल संसाधनों की अहम भूमिका को दर्शाते हैं। नदियों, तालाबों, झीलों, नहरों और जलाशयों में होने वाला मत्स्य उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों के साथ इन संसाधनों पर निर्भर छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा करना भी जरूरी है।

सरकार की प्रस्तावित योजना इसी संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है, ताकि उत्पादन में वृद्धि का लाभ मछुआरा समुदायों तक भी पहुंच सके।

छोटे मछुआरों की आय और रोजगार को मिलेगी प्राथमिकता

छोटे स्तर पर मछली पकड़ने और पालन करने वाले परिवारों के लिए मत्स्य पालन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि आय और रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर स्थानीय जल निकायों की स्थिति, मछलियों की उपलब्धता और बाजार में मिलने वाली कीमतों पर निर्भर करती है।

यदि जल स्रोतों में मछलियों की उपलब्धता घटती है या बाजार तक पहुंच सीमित रहती है, तो इसका सीधा असर मछुआरों की कमाई पर पड़ता है। इसी तरह, मछली पकड़ने के बाद भंडारण, परिवहन और बिक्री की उचित व्यवस्था नहीं होने से उत्पाद का नुकसान हो सकता है और मछुआरों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ सकती है।

डॉ. लिखी ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय कार्य योजना का लाभ सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे जमीनी स्तर पर मछुआरों की आजीविका में व्यावहारिक सुधार लाने में मदद करनी चाहिए।

इसके लिए मछुआरा समुदायों के अनुभवों को योजना तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करना महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तैयार किए गए उपाय अधिक प्रभावी हो सकते हैं, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में मछली पकड़ने के तरीके, जल संसाधन, प्रजातियां और बाजार की जरूरतें अलग-अलग होती हैं।

जलवायु परिवर्तन और पानी की गुणवत्ता बड़ी चुनौती

अंतर्देशीय मत्स्य पालन के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में जलवायु परिवर्तन, जल स्रोतों की बिगड़ती गुणवत्ता और पानी में घुलित ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट शामिल हैं। इन परिस्थितियों का असर मछलियों के स्वास्थ्य, प्रजनन, वृद्धि और उपलब्धता पर पड़ सकता है।

जल निकायों में तापमान और जल गुणवत्ता में बदलाव होने से मछली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यदि पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाए, तो मछलियों के जीवित रहने पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसी घटनाएं छोटे मछुआरों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके पास आय के दूसरे साधन सीमित हैं।

डॉ. लिखी ने प्रस्तावित कार्य योजना में Climate Resilience यानी जलवायु संबंधी जोखिमों का सामना करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, योजना में उन समुदायों के अनुभवों को महत्व दिया जाना चाहिए, जो इन समस्याओं का प्रत्यक्ष सामना कर रहे हैं।

इस दिशा में जल स्रोतों की नियमित निगरानी, पानी की गुणवत्ता में सुधार, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल मत्स्य प्रबंधन और आपदा संबंधी जोखिमों को कम करने के उपाय उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, इन उपायों का अंतिम स्वरूप राष्ट्रीय कार्य योजना के विकास और परामर्श की प्रक्रिया में तय किया जाएगा।

नदियों से लेकर तालाबों तक, विविध जल निकाय होंगे योजना का हिस्सा

भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की विशेषता इसकी भौगोलिक और पारिस्थितिक विविधता है। देश में मछली उत्पादन के लिए अलग-अलग प्रकार के जल स्रोतों का इस्तेमाल होता है। प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्य योजना में इसी विविधता को ध्यान में रखा जाएगा।

योजना के दायरे में नदियां, नहरें, जलाशय, झीलें, बाढ़ के मैदान, आर्द्रभूमियां, तालाब और ठंडे पानी वाले क्षेत्र शामिल होंगे। इन सभी जल प्रणालियों की प्राकृतिक परिस्थितियां और मत्स्य संसाधन अलग-अलग हैं, इसलिए इनके प्रबंधन के लिए एक जैसी रणनीति पर्याप्त नहीं हो सकती।

उदाहरण के तौर पर, किसी जलाशय में मत्स्य संसाधनों का प्रबंधन वहां उपलब्ध मछली प्रजातियों और स्थानीय समुदायों की जरूरतों के अनुसार करना होगा। वहीं, बाढ़ के मैदानों और आर्द्रभूमियों में प्राकृतिक जल चक्र तथा पारिस्थितिकी तंत्र का विशेष महत्व होता है। ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में तापमान और स्थानीय पर्यावरण की परिस्थितियां मत्स्य उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।

डॉ. लिखी ने भारत की इस विविधता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारतीय मत्स्य क्षेत्र में अलग-अलग परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले तरीकों से टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और आजीविका विकास के लिए उपयोगी अनुभव प्राप्त किए जा सकते हैं।

मछली की बिक्री और Value Chain को मजबूत करने पर जोर

मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ उसे बेहतर कीमत पर बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है। इसी कारण प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्य योजना में Value Chain और मछली पकड़ने के बाद होने वाले कारोबार से संबंधित मुद्दों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

मछली की बिक्री में बेहतर परिणाम पाने के लिए पकड़ने के बाद उचित रखरखाव, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और बाजार से संपर्क महत्वपूर्ण होते हैं। इन व्यवस्थाओं में सुधार होने से उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने और नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

छोटे मछुआरों के लिए बाजार की जानकारी और बिक्री के बेहतर विकल्प भी महत्वपूर्ण हैं। यदि उन्हें अपने उत्पाद की मांग, कीमत और विपणन के अवसरों की जानकारी मिलती है, तो वे अधिक सोच-समझकर बिक्री संबंधी निर्णय ले सकते हैं।

BOBP-IGO के निदेशक डॉ. पी. कृष्णन ने बताया कि कार्य योजना के विकास चरण में मछली पकड़ने के अधिकार, संसाधन प्रबंधन, रोजगार, सम्मानजनक कार्य, लैंगिक समानता, Value Chain और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

इन पहलुओं को एक साथ देखने से मत्स्य क्षेत्र की चुनौतियों को व्यापक रूप से समझने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर महिला मछुआरों और मछली प्रसंस्करण तथा बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका को पहचानना आजीविका विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

मछुआरा समुदायों से परामर्श के बाद तैयार होगी कार्य योजना

भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने के लिए प्राथमिकताओं की पहचान करना और आगे की गतिविधियों के लिए एक रूपरेखा विकसित करना था। इसमें मत्स्य पालन संस्थानों के विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।

कार्य योजना को विकसित करने के लिए मछुआरा समुदायों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ परामर्श का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया के जरिए स्थानीय समस्याओं, संसाधनों की स्थिति और आजीविका से जुड़ी जरूरतों को समझने का प्रयास किया जाएगा।

कार्य योजना का सार्वजनिक प्रारूप अगले महीने जारी करने और उसके बाद हितधारकों से परामर्श के माध्यम से इसे अंतिम रूप देने की योजना बताई गई है। इसके बाद ही कार्यान्वयन से जुड़ी दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप दिया जा सकेगा।

कार्यक्रम को मध्य प्रदेश के मत्स्य पालन सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह, मत्स्य विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. गुंजन कृष्णा और FAO की परियोजना अधिकारी जूलिया गोरेली ने भी संबोधित किया।

टिकाऊ मत्स्य पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ

भारत में मछली उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य तभी अधिक व्यापक लाभ दे सकेगा, जब इसके साथ जल संसाधनों का संरक्षण और छोटे मछुआरों की आजीविका भी मजबूत हो। अंतर्देशीय लघु मत्स्य पालन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही है।

यदि योजना में स्थानीय समुदायों की भागीदारी, जलवायु जोखिमों से निपटने, जल गुणवत्ता सुधारने, संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल और बाजार तक बेहतर पहुंच जैसे विषयों पर प्रभावी रणनीति तैयार होती है, तो इससे मत्स्य क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

आने वाले समय में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित नीतियां जमीनी जरूरतों के अनुरूप कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं और उनका लाभ छोटे मछुआरों तक किस हद तक पहुंचता है। तीन करोड़ टन मछली उत्पादन का लक्ष्य महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ मछुआरों की आय, रोजगार की गुणवत्ता और जल निकायों की दीर्घकालिक सेहत को भी समान महत्व देना होगा।

राष्ट्रीय कार्य योजना का विकास चरण भारत के अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र के लिए ऐसा अवसर है, जिसके माध्यम से उत्पादन वृद्धि और आजीविका सुरक्षा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

 

Tags: AgricultureAnimal HusbandryFarmingFisheriesIndian Farming
Previous Post

अमेरिकी मंच पर भारतीय कृषि की गूंज: अमीना नसरीन ने जीता ग्लोबल यूथ अवॉर्ड, कृषि शिक्षा को नई दिशा देने पर जोर

Next Post

मध्य प्रदेश में मछली पालन से खुलेंगे कमाई और निर्यात के नए रास्ते, 49 जलाशयों के विकास को ₹87.56 करोड़ की मंजूरी

Next Post
Fisheries will open up new avenues for earning and export in Madhya Pradesh, with ₹87.56 crore approved for the development of 49 reservoirs.

मध्य प्रदेश में मछली पालन से खुलेंगे कमाई और निर्यात के नए रास्ते, 49 जलाशयों के विकास को ₹87.56 करोड़ की मंजूरी

Recent Posts

  • खेतों में नई तकनीक सीखने निकले मध्य प्रदेश के किसान, दिल्ली-हरियाणा-पंजाब में देखेंगे खेती के सफल मॉडल
  • मध्य प्रदेश में मछली पालन से खुलेंगे कमाई और निर्यात के नए रास्ते, 49 जलाशयों के विकास को ₹87.56 करोड़ की मंजूरी
  • मछुआरों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों को बचाने की तैयारी, भारत बनाएगा अंतर्देशीय मत्स्य पालन का राष्ट्रीय रोडमैप
  • अमेरिकी मंच पर भारतीय कृषि की गूंज: अमीना नसरीन ने जीता ग्लोबल यूथ अवॉर्ड, कृषि शिक्षा को नई दिशा देने पर जोर
  • कपास की तुड़ाई में अब हाथों को मिलेगी सुरक्षा! ICAR-CIRCOT ने तैयार किए खास दस्ताने, किसानों और मजदूरों को होगा फायदा

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.

Go to mobile version