धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली किसानों के लिए हर साल बड़ी चुनौती बन जाती है। खासकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों को गेहूं की बुवाई समय पर करने के लिए पराली का जल्दी निपटान करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए पंजाब में Parali Management को आसान बनाने के लिए विशेष किसान हेल्पलाइन शुरू की गई है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से किसान पराली प्रबंधन मशीनों, उनके इस्तेमाल और उपलब्धता से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों को पराली जलाने के बजाय दूसरे विकल्प अपनाने में मदद मिल सकती है।
Parali Management के लिए किसानों को मिलेगी हेल्पलाइन की सुविधा
पंजाब में Parali Management को बढ़ावा देने के लिए संझा मित्तर फार्मर सपोर्ट सेंटर की ओर से टेलीफोन हेल्पलाइन शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन में आने वाली परेशानियों का समाधान उपलब्ध कराना है। किसान हेल्पलाइन नंबर +91 79737 27514 पर संपर्क करके कृषि मशीनों और पराली प्रबंधन के तरीकों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। हेल्पलाइन सेवा सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहने की जानकारी दी गई है।
Parali Management में आधुनिक मशीनों से किसानों को मिलेगी मदद
धान की कटाई के बाद Parali Management के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, मल्चर और बेलर जैसी मशीनें काफी उपयोगी मानी जाती हैं। हैप्पी सीडर मशीन खेत में मौजूद फसल अवशेषों के बीच गेहूं की बुवाई करने में मदद करती है। वहीं सुपर सीडर मशीन पराली को मिट्टी में मिलाते हुए गेहूं की बुवाई कर सकती है। बेलर मशीन पराली को इकट्ठा करके गांठों में बदलती है, जिससे उसे खेत से बाहर ले जाना आसान हो जाता है। हालांकि, किसानों को मशीन का चुनाव खेत की स्थिति और अपनी जरूरत के अनुसार करना चाहिए।
Parali Management में बेहतर काम करने वाली 5 पंचायतें सम्मानित
पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले में Parali Management को लेकर सकारात्मक प्रयास करने वाली पांच ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया गया है। इनमें धीरपुर, वजीदपुर, बादला, रुड़की और बरोंगा जेर गांव की पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों ने अपने क्षेत्रों में किसानों को पराली न जलाने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए जागरूक करने में योगदान दिया है। पंचायतों को सम्मानित करने का उद्देश्य दूसरे गांवों को भी इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करना है।
Parali Management के लिए सरकार ने मशीनों की उपलब्धता पर दिया जोर
केंद्र सरकार भी Parali Management को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। अक्टूबर 2026 में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मशीनों की उपलब्धता और उनके सही इस्तेमाल पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को मशीनें समय पर मिलें और पुरानी मशीनों को भी उपयोग के योग्य बनाया जाए। छोटे और सीमांत किसानों के लिए कृषि यंत्रों को किराये पर उपलब्ध कराना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि सभी किसान महंगी मशीनें खरीदने की स्थिति में नहीं होते।
Parali Management के लिए 544 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान
वित्त वर्ष 2026-27 में Parali Management से संबंधित गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार ने 544.15 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी दी थी। इसके तहत कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने और फसल अवशेषों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने 46 हजार से अधिक मशीनों के वितरण और 141 पराली आपूर्ति शृंखला परियोजनाओं का लक्ष्य भी रखा था। इन योजनाओं का उद्देश्य पराली को जलाने के बजाय कृषि और औद्योगिक उपयोग में लाने के अवसर बढ़ाना है।
Parali Management में FARMS ऐप भी हो सकता है उपयोगी
किसानों के लिए Parali Management को आसान बनाने में FARMS मोबाइल ऐप भी मददगार साबित हो सकता है। इस ऐप के माध्यम से किसान अपने आसपास मौजूद कृषि यंत्र बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जिन किसानों के पास खुद की मशीन नहीं है, वे उपलब्ध सेवाओं के बारे में पता करके किराये पर कृषि उपकरण लेने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, मशीनों का किराया और उपलब्धता अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।
Parali Management से मिट्टी की सेहत को भी होगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीके से Parali Management अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पराली को खेत में उचित तरीके से मिलाने पर समय के साथ जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ सकती है। इससे मिट्टी की संरचना और नमी बनाए रखने की क्षमता को लाभ मिल सकता है। हालांकि, फसल अवशेषों के अपघटन की गति मौसम, मिट्टी की स्थिति और अपनाई गई तकनीक पर निर्भर करती है। इसलिए किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार फसल अवशेष प्रबंधन करना चाहिए।
Parali Management से कम हो सकती है किसानों की परेशानी
पंजाब में शुरू की गई नई हेल्पलाइन Parali Management को लेकर किसानों के लिए उपयोगी पहल बन सकती है। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच किसानों के पास सीमित समय होता है। ऐसे में सही मशीन की जानकारी समय पर मिलने से खेती के काम की योजना बनाना आसान हो सकता है। इसके साथ ही पंचायतों को सम्मानित करने जैसी पहल से गांवों में जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले समय में हेल्पलाइन, कृषि मशीनों और स्थानीय स्तर पर सामूहिक प्रयासों की मदद से पराली जलाने की घटनाओं को कम करने में सहयोग मिल सकता है।

