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Home कृषि समाचार

एनपीके 12:32:16, 10:26:26 और 20:20:0:13 में क्या अंतर है? जानें किस फसल में कौन-सी खाद उपयोगी

एनपीके 12:32:16, 10:26:26 और 20:20:0:13 खाद में क्या अंतर है? जानें नाइट्रोजन, फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर की मात्रा और सही खाद चुनने का तरीका।

Vipin Mishra by Vipin Mishra
October 28, 2026
in कृषि समाचार
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एनपीके 12:32:16, 10:26:26 और 20:20:0:13 खाद में पोषक तत्वों का अंतर
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खेत में बुवाई के समय सही खाद का चुनाव करना फसल की अच्छी बढ़वार और पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने के लिए महत्वपूर्ण है। बाजार में एनपीके 12:32:16, एनपीके 10:26:26 और 20:20:0:13 जैसे कई ग्रेड के उर्वरक उपलब्ध हैं। इनके पैकेट पर लिखे अंक भले ही एक जैसे दिखाई दें, लेकिन इनमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा और उपयोग अलग-अलग हैं। इसलिए किसान के लिए यह समझना जरूरी है कि किस खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर कितना मिलता है।

इन तीनों उर्वरकों में सबसे बड़ा अंतर पोषक तत्वों के अनुपात का है। एनपीके 12:32:16 में फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है, जबकि 10:26:26 में फॉस्फोरस और पोटाश बराबर मात्रा में होते हैं। दूसरी ओर, 20:20:0:13 में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर मिलता है, लेकिन इसमें पोटाश नहीं होता।

खाद के ग्रेड में लिखे अंकों का क्या मतलब है?

उर्वरक की बोरी पर लिखे अंक उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा बताते हैं। सामान्यतः पहले अंक से नाइट्रोजन (N), दूसरे से फॉस्फेट (P₂O₅) और तीसरे से पोटाश (K₂O) की मात्रा का पता चलता है। चौथा अंक मौजूद हो, तो वह आमतौर पर सल्फर जैसे अतिरिक्त पोषक तत्व की मात्रा दर्शाता है।

उदाहरण के लिए, 12:32:16 ग्रेड के 100 किलोग्राम उर्वरक में 12 किलोग्राम नाइट्रोजन, 32 किलोग्राम फॉस्फेट और 16 किलोग्राम पोटाश के समतुल्य पोषक तत्व होते हैं। यहां फॉस्फेट और पोटाश के आंकड़े उनके ऑक्साइड समतुल्य के रूप में व्यक्त किए जाते हैं, न कि शुद्ध फॉस्फोरस और पोटैशियम के वजन के रूप में।

एनपीके 12:32:16 में क्या खास है?

इस ग्रेड में 12 प्रतिशत नाइट्रोजन, 32 प्रतिशत फॉस्फेट और 16 प्रतिशत पोटाश होता है। इसकी प्रमुख विशेषता फॉस्फेट की अपेक्षाकृत अधिक मात्रा है। फॉस्फोरस पौधों में जड़ों के विकास, ऊर्जा स्थानांतरण और शुरुआती बढ़वार जैसी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसलिए जिन खेतों में फॉस्फोरस की जरूरत अधिक हो और साथ में नाइट्रोजन तथा पोटाश भी देना हो, वहां मिट्टी की जांच और फसल की अनुशंसा के आधार पर इस ग्रेड पर विचार किया जा सकता है।

गेहूं, दलहन और अन्य फसलों में इसका उपयोग उनकी पोषक तत्व संबंधी जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है। हालांकि, किसी फसल के लिए यह खाद हमेशा सबसे बेहतर होगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता। यदि खेत में पहले से फॉस्फोरस पर्याप्त है, लेकिन पोटाश की कमी है, तो इस ग्रेड का चुनाव पोषक तत्वों का सही संतुलन नहीं बना पाएगा।

एनपीके 10:26:26 में क्या अंतर है?

एनपीके 10:26:26 में 10 प्रतिशत नाइट्रोजन, 26 प्रतिशत फॉस्फेट और 26 प्रतिशत पोटाश होता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें फॉस्फेट और पोटाश बराबर मात्रा में मिलते हैं। इसकी तुलना में 12:32:16 में फॉस्फेट अधिक और पोटाश कम होता है।

यह ग्रेड उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है, जहां फसल को फॉस्फोरस के साथ पोटाश की भी पर्याप्त जरूरत हो। पोटाश पौधों में जल संतुलन, एंजाइमों की सक्रियता और कई शारीरिक प्रक्रियाओं में योगदान देता है।

फल, सब्जियों और खेत की दूसरी फसलों में भी इस ग्रेड का इस्तेमाल मिट्टी की स्थिति और अनुशंसित पोषक तत्व मात्रा के अनुसार किया जा सकता है। लेकिन केवल यह देखकर कि किसी फसल में पोटाश की जरूरत होती है, 10:26:26 का चुनाव नहीं करना चाहिए। खेत में उपलब्ध पोटाश, फसल की जरूरत और पहले इस्तेमाल की गई खाद को ध्यान में रखना जरूरी है।

20:20:0:13 में पोटाश नहीं, सल्फर मिलता है

20:20:0:13 को आम तौर पर एनपीएस या अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट श्रेणी के उर्वरक के रूप में जाना जाता है। इसमें 20 प्रतिशत नाइट्रोजन, 20 प्रतिशत फॉस्फेट और 13 प्रतिशत सल्फर होता है। इसमें पोटाश की मात्रा शून्य है। इसलिए इसे 12:32:16 और 10:26:26 की तरह तीन प्रमुख पोषक तत्वों वाला एनपीके ग्रेड नहीं समझना चाहिए।

सल्फर पौधों में प्रोटीन निर्माण और कुछ जरूरी अमीनो अम्लों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरसों जैसी तिलहनी फसलों में सल्फर की पर्याप्त उपलब्धता विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। दलहन और अन्य फसलों में भी इसकी जरूरत मिट्टी और फसल के अनुसार बदलती है।

इसलिए जिन खेतों में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर की जरूरत हो, लेकिन पोटाश की अतिरिक्त आपूर्ति की आवश्यकता न हो, वहां 20:20:0:13 पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, यदि मिट्टी में पोटाश की कमी है, तो इस उर्वरक से वह कमी पूरी नहीं होगी। ऐसे में पोटाश की जरूरत को अलग से पूरा करने की योजना बनानी पड़ सकती है।

तीनों खादों में मुख्य अंतर

उर्वरक ग्रेड नाइट्रोजन फॉस्फेट पोटाश सल्फर
12:32:16 12% 32% 16% ग्रेड के अनुसार अलग
10:26:26 10% 26% 26% ग्रेड के अनुसार अलग
20:20:0:13 20% 20% 0% 13%

यह तुलना इन ग्रेडों की घोषित पोषक संरचना पर आधारित है। खरीदते समय बोरी पर दर्ज उर्वरक का नाम, ग्रेड और पोषक तत्वों की गारंटी जरूर जांचें। <Cite refs={[“turn324173search0″,”turn324173search14”]}/>

गेहूं, सरसों और दलहन में किस खाद का चुनाव करें?

गेहूं की फसल में खाद का चुनाव मिट्टी की जांच, बुवाई के समय उपलब्ध पोषक तत्वों और क्षेत्र की अनुशंसित खुराक के आधार पर करना चाहिए। यदि फॉस्फोरस की जरूरत अधिक है और नाइट्रोजन तथा पोटाश भी देना है, तो 12:32:16 एक विकल्प हो सकता है। वहीं, यदि फॉस्फोरस और पोटाश दोनों की जरूरत अपेक्षाकृत अधिक है, तो 10:26:26 पर विचार किया जा सकता है।

सरसों जैसी तिलहनी फसलों में सल्फर की जरूरत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि मिट्टी की जांच या स्थानीय कृषि अनुशंसा से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर की जरूरत सामने आती है, तो 20:20:0:13 उपयोगी विकल्प हो सकता है। हालांकि, पोटाश या अन्य पोषक तत्वों की कमी होने पर उनकी आपूर्ति अलग से सुनिश्चित करनी होगी।

दलहन की फसलों में भी खाद का चयन सावधानी से करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने के बजाय फसल की जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण क्षमता, मिट्टी की उर्वरता और अनुशंसित पोषण प्रबंधन को ध्यान में रखना जरूरी है।

यह ध्यान रखना चाहिए कि उपर्युक्त उदाहरण सामान्य मार्गदर्शन हैं, किसी विशेष फसल के लिए निश्चित खुराक की सिफारिश नहीं। सही चुनाव खेत की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही होगा।

खाद खरीदते और इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी

किसान केवल खाद की बोरी पर लिखे अंकों या कीमत के आधार पर फैसला न करें। सस्ती खाद हमेशा सबसे किफायती नहीं होती, क्योंकि अलग-अलग ग्रेड में पोषक तत्वों की मात्रा अलग होती है। कीमत की तुलना करते समय प्रति किलोग्राम पोषक तत्व की लागत और खेत की जरूरत दोनों देखनी चाहिए।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि खाद की मात्रा निर्धारित करने से पहले मिट्टी की जांच कराएं। इससे पता चलता है कि खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और किसकी पर्याप्त उपलब्धता है। इसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विश्वविद्यालय की स्थानीय अनुशंसा के अनुसार उर्वरक की मात्रा तय करें।

खाद को बुवाई के समय कैसे और कितनी मात्रा में देना है, यह भी महत्वपूर्ण है। फॉस्फोरस वाले उर्वरकों का सही स्थान पर प्रयोग पौधों तक पोषक तत्व पहुंचाने में मदद कर सकता है। वहीं, नाइट्रोजन की जरूरत को फसल की अवस्था के अनुसार बांटना कई परिस्थितियों में उपयोगी होता है।

सही ग्रेड चुनें, खाद की लागत पर रखें नियंत्रण

एनपीके 12:32:16, 10:26:26 और 20:20:0:13 में से किसी एक को हर खेत के लिए सबसे अच्छा नहीं माना जा सकता। 12:32:16 में फॉस्फेट अधिक है, 10:26:26 में फॉस्फेट और पोटाश बराबर हैं, जबकि 20:20:0:13 नाइट्रोजन, फॉस्फेट और सल्फर उपलब्ध कराता है।

किसानों के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि मिट्टी की जांच के आधार पर फसल की पोषक तत्व संबंधी जरूरत समझें और फिर उसी के अनुरूप उर्वरक चुनें। इससे अनावश्यक खाद डालने से बचने, पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने और खेती की लागत का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है।

 

Tags: 20:20:0:13 खादएनपीके 10:26:26एनपीके 12:32:16एनपीके खादकृषि सलाहखाद प्रबंधनडीएपीपोटाशयूरियासल्फर
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