पूर्वोत्तर भारत में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने तथा पशुपालकों की आजीविका के नए अवसर विकसित करने की दिशा में सिक्किम में कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई हैं। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 और 3 नवंबर 2026 को सिक्किम के दो दिवसीय दौरे के दौरान राज्य में पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान देसी पशु नस्लों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों, डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार और पशुधन उत्पादकता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया गया।
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने उत्तर सिक्किम में डेयरी सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए उत्तर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (NDMU) का ऑनलाइन शुभारंभ किया। इसके अलावा सिरी मवेशी संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया और पाकयोंग जिले के चुचाचेन में सिरी बुल मदर फार्म की आधारशिला रखी गई। सुअर पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए Liquid Semen के माध्यम से Artificial Insemination (AI) की मानक प्रक्रियाएं भी जारी की गईं।
केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि भारत सरकार का पशुपालन एवं डेयरी विभाग सिक्किम में स्वदेशी सिरी नस्ल के संरक्षण और विकास के लिए एक Centre of Excellence स्थापित करेगा। इसका उद्देश्य नस्ल की आनुवंशिक विशेषताओं को सुरक्षित रखने, वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देने और बेहतर पशुधन संसाधन विकसित करने के प्रयासों को संस्थागत मजबूती देना है।
उत्तर सिक्किम में डेयरी सहकारी नेटवर्क का होगा विस्तार
दौरे के दौरान शुरू की गई प्रमुख पहलों में उत्तर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (North District Milk Producers’ Cooperative Union – NDMU) का शुभारंभ शामिल रहा। मंगन में शुरू की गई यह पहल White Revolution 2.0 के तहत उत्तर सिक्किम में संगठित डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सिक्किम जैसे पर्वतीय राज्य में डेयरी क्षेत्र का विकास स्थानीय किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकता है। सहकारी मॉडल के माध्यम से छोटे पशुपालक दूध उत्पादन, संग्रहण, गुणवत्ता जांच और विपणन की संगठित व्यवस्था से जुड़ सकते हैं।
डेयरी सहकारी समितियां किसानों को स्थानीय स्तर पर दूध बेचने का एक व्यवस्थित माध्यम उपलब्ध कराती हैं। इससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से बाजार तलाशने की निर्भरता कम करने और सामूहिक रूप से अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने NDMU को White Revolution 2.0 के तहत शामिल किए जाने पर बधाई दी और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक योजना तैयार करने का सुझाव दिया। इस योजना में डेयरी प्लांट का आधुनिकीकरण, सहकारी नेटवर्क का विस्तार और ‘सिक्किम मिल्क’ नाम से एक एकीकृत ब्रांड विकसित करने जैसे विषय शामिल करने पर जोर दिया गया।
एकीकृत ब्रांडिंग से राज्य के डेयरी उत्पादों को अलग पहचान मिल सकती है। इसके लिए दूध की गुणवत्ता, नियमित संग्रहण, शीत-श्रृंखला (Cold Chain), प्रसंस्करण और पैकेजिंग की मजबूत व्यवस्था विकसित करना आवश्यक होगा। यदि इन सभी पहलुओं पर समन्वित तरीके से काम किया जाता है, तो सिक्किम के डेयरी उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
सिरी मवेशी नस्ल के संरक्षण के लिए शुरू हुआ विशेष कार्यक्रम
सिक्किम दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘सिरी मवेशी संरक्षण कार्यक्रम’ का ऑनलाइन शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य स्वदेशी सिरी नस्ल का संरक्षण और संवर्धन करना, उसके महत्वपूर्ण आनुवंशिक संसाधनों को सुरक्षित रखना तथा वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों को मजबूत करना है।
भारत में देसी पशु नस्लें स्थानीय जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक पशुपालन प्रणालियों के अनुरूप विकसित हुई हैं। इन नस्लों का संरक्षण केवल पशुधन विविधता बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के Breeding Programmes और पशुधन सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सिरी मवेशियों के संरक्षण कार्यक्रम के माध्यम से नस्ल की पहचान, आनुवंशिक विशेषताओं का संरक्षण और बेहतर प्रजनन प्रबंधन को बढ़ावा देने की योजना है। इससे भविष्य में नस्ल की गुणवत्ता और उपयोगिता को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने सिरी मवेशियों के संरक्षण और विकास के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें नस्ल सुधार (Breed Improvement), Genetic Conservation और Scientific Breeding को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
चुचाचेन में बनेगा सिरी बुल मदर फार्म
सिरी नस्ल के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री ने पाकयोंग जिले के चुचाचेन में प्रस्तावित ‘सिरी बुल मदर फार्म’ की आधारशिला ऑनलाइन माध्यम से रखी।
इस सुविधा का उद्देश्य स्वदेशी सिरी नस्ल के संरक्षण को संस्थागत समर्थन देना, वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देना और बेहतर गुणवत्ता वाले Germplasm के विकास तथा उपलब्धता को मजबूत करना है।
पशुधन सुधार में अच्छी आनुवंशिक गुणवत्ता वाले प्रजनन पशुओं और Germplasm की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वैज्ञानिक तरीके से चयनित प्रजनन पशुओं के उपयोग से नस्ल की वांछित विशेषताओं को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
सिरी बुल मदर फार्म इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधा के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इसके माध्यम से नस्ल संरक्षण, प्रजनन प्रबंधन और आनुवंशिक संसाधनों के व्यवस्थित उपयोग को बढ़ावा देने की योजना है।
केंद्रीय मंत्री ने सिरी नस्ल के आनुवंशिक सुधार में तेजी लाने के लिए In Vitro Fertilization (IVF) तकनीक लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया। IVF एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है, जिसमें शरीर के बाहर प्रयोगशाला में अंडाणु का निषेचन कर भ्रूण विकसित किया जाता है। इसके बाद उपयुक्त प्रक्रिया के माध्यम से भ्रूण को मादा पशु में स्थापित किया जा सकता है।
पशुधन क्षेत्र में इस तकनीक का उपयोग बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के गुणन और प्रजनन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसके प्रभावी उपयोग के लिए विशेषज्ञ संस्थानों, प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों, प्रयोगशाला सुविधाओं और उपयुक्त पशु प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत होती है।
सुअर पालन में वैज्ञानिक प्रजनन को मिलेगा बढ़ावा
सिक्किम दौरे के दौरान सुअर पालन क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल की गई। केंद्रीय मंत्री ने ‘सूअरों में Liquid Semen का उपयोग करके Artificial Insemination के लिए Semen Production हेतु न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल और Standard Operating Procedures (SOPs)’ की शुरुआत की।
इस पहल का उद्देश्य सुअरों में वीर्य उत्पादन, उसकी गुणवत्ता और तरल वीर्य के उपयोग से कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया के लिए एक मानकीकृत व्यवस्था तैयार करना है।
पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में सुअर पालन ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए यह आय और स्थानीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख माध्यम है। ऐसे में वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देने से सुअर पालन की उत्पादकता और प्रबंधन में सुधार की संभावनाएं बन सकती हैं।
Artificial Insemination यानी कृत्रिम गर्भाधान एक ऐसी तकनीक है, जिसमें प्राकृतिक प्रजनन के बजाय चयनित नर पशु के वीर्य का उपयोग करके मादा पशु का गर्भाधान कराया जाता है। इससे बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के प्रजनन को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जा सकता है।
Liquid Semen Technology के लिए वीर्य के संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, प्रसंस्करण, भंडारण और निर्धारित समय में उपयोग की वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। नए प्रोटोकॉल इन प्रक्रियाओं के लिए न्यूनतम मानक और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश उपलब्ध कराएंगे।
इस पहल से सुअर पालन में वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों के विस्तार, आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार, उत्पादकता बढ़ाने और जैव-सुरक्षा (Biosecurity) को मजबूत करने की उम्मीद है। मानकीकृत प्रक्रिया से प्रजनन संबंधी जोखिमों और संक्रमण के प्रसार की आशंका को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
किसानों और पशुपालकों की आजीविका मजबूत करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री के दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को किसानों की आजीविका से जोड़कर देखना रहा। सिक्किम में डेयरी सहकारी समितियों, देसी पशु नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन से जुड़ी पहलों को इसी व्यापक उद्देश्य के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन खेती के साथ आय का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकता है। छोटे किसान फसल उत्पादन के साथ गाय, सुअर और अन्य पशुधन का पालन करके अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं। इससे कृषि पर निर्भरता के साथ-साथ परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
हालांकि, पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए संतुलित पशु आहार, नियमित टीकाकरण, रोग नियंत्रण, बेहतर प्रजनन प्रबंधन, पशु चिकित्सा सेवाओं और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं पर भी काम करना जरूरी है।
डेयरी क्षेत्र में दूध संग्रहण और प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार तथा सुअर पालन में वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों की उपलब्धता छोटे पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इसके साथ ही किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन देना भी आवश्यक होगा, ताकि वे नई व्यवस्थाओं का सही उपयोग कर सकें।
टिंगडा स्कूल और रामथांग स्वास्थ्य केंद्र का भी किया दौरा
सिक्किम प्रवास के दौरान 2 नवंबर को केंद्रीय मंत्री ने टिंगडा सरकारी प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत की और उन्हें शिक्षा तथा सीखने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके अलावा उन्होंने रामथांग प्राथमिक स्वास्थ्य उप-केंद्र (PHSC) और वेलनेस सेंटर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया गया।
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें सिरी बैल, सिरी गायों और उनसे जुड़े मूल्यवर्धित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने किसानों और पशुपालकों से बातचीत कर देसी नस्लों के संरक्षण तथा पशुधन आधारित आजीविका के अवसरों की जानकारी ली।
प्रदर्शनी में डेयरी एवं पशुपालन उत्पादों के साथ स्थानीय स्तर पर उगाई गई जैविक सब्जियों के स्टॉल भी लगाए गए थे। इससे स्थानीय कृषि और पशुपालन गतिविधियों के बीच मौजूद संबंधों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
सिक्किम में पशुधन विकास के लिए तैयार होगा व्यापक रोडमैप
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में डेयरी और पशुधन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी नस्लों के संरक्षण, आधुनिक प्रजनन तकनीकों को अपनाने, डेयरी बुनियादी ढांचे के विकास और सहकारी आधारित मॉडल को आगे बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई।
सिक्किम में प्रस्तावित Centre of Excellence, सिरी बुल मदर फार्म और IVF तकनीक से जुड़ी कार्ययोजना नस्ल संरक्षण और पशुधन सुधार के लिए महत्वपूर्ण पहल हो सकती हैं। वहीं NDMU और ‘सिक्किम मिल्क’ ब्रांड की प्रस्तावित योजना राज्य में संगठित डेयरी बाजार के विकास को दिशा दे सकती है।
इन पहलों की सफलता के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय, पर्याप्त तकनीकी संसाधन और किसानों की सक्रिय भागीदारी जरूरी होगी। पशुपालकों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह का सिक्किम दौरा राज्य में डेयरी विकास, स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलों के साथ संपन्न हुआ। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों और पशुपालकों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करना भी है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव उनके प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत सहयोग और स्थानीय पशुपालकों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

