֍:क्यों मनाया जाता है?§ֆ:इस दिन को पोषण के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में दूध के महत्व और ग्रामीण भारत के आर्थिक विकास में इसकी भूमिका का जश्न मनाता है. यह डेयरी किसानों और डेयरी व्यापारियों को पहचान प्रदान कराता है, जो भारत के डेयरी उद्योग की सफलता में योगदान देते हैं.§ֆ:इस दिन डॉ. वर्गीस कुरियन की उपलब्धियों और ऑपरेशन फ्लड पहल की स्थापना में उनके काम पर प्रकाश डाला जाता है. जिसने भारत में दूध उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं में क्रांति ला दी. उनके महत्वपूर्ण योगदान से देश में डेयरी उत्पादन आत्मनिर्भर हो गया.§ֆ:यह दिन लोगों को दूध के सेवन के लाभों और अच्छे स्वास्थ्य की भूमिका के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देता है. राष्ट्रीय दुग्ध दिवस नीतियों और नवाचारों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है जो डेयरी क्षेत्र को और मजबूत कर सकते हैं.§֍:इतिहास§ֆ:राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पहली बार 26 नवंबर, 2014 को मनाया गया था. इस दिन भारतीय डेयरी संघ ने देशभर के डेयरी संस्थानों के साथ मिलकर डॉ. कुरियन की जयंती मनाने का फैसला किया था. डॉ. कुरियन ने भारत के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड अमूल का नेतृत्व किया और गुजरात सहकारी दूध विपणन संघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन फ्लड के तहत उनकी पहल ने भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक में बदल दिया.§भारत में हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसे मनाए जाने का उद्देश्य देश के विकास में दूध और डेयरी उद्योग के महत्वपूर्ण योगदान का सम्मान देना है. इस दिन को भारत में “श्वेत क्रांति के जनक” डॉ. वर्गीस कुरियन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत को विश्व स्तर पर दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

