पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन से देश में पशु रोगों में आई कमी

केंद्र सरकार द्वारा संचालित पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (Livestock Health and Disease Control Programme – LHDCP) के तहत देशभर में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम ने पशुओं में गंभीर बीमारियों जैसे फुट एंड माउथ डिज़ीज़ (FMD), ब्रुसेलोसिस और लंपी स्किन डिज़ीज़ (LSD) के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण पाया है।

सिरो-मॉनिटरिंग (sero-monitoring) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, टीकाकरण के कारण पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी है, और रोग की सक्रियता में गिरावट देखी गई है। जहां एफएमडी के प्रकोप 2019 में 132 थे, वहीं 2024 में यह घटकर 93 रह गए और 2025 में जून तक केवल 6 मामले ही सामने आए हैं। इसी प्रकार ब्रुसेलोसिस के मामलों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है – 2019 में 20 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2024 में यह घटकर केवल 5 रह गए।

लंपी स्किन डिज़ीज़ (LSD) के मामले फिलहाल केवल महाराष्ट्र में सक्रिय हैं और देशभर में इसकी प्रकृति छिटपुट (sporadic) है।

गुणवत्ता और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम:

सिक्किम में भी टीकाकरण के अच्छे परिणाम:

सिक्किम राज्य से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में पशु रोगों में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है:

पशु चिकित्सकों की स्थिति:

भारत में 53.7 करोड़ पशुधन के लिए 87,914 पंजीकृत पशु चिकित्सक कार्यरत हैं, जिससे पशु-से-पशु चिकित्सक अनुपात लगभग 6108:1 बैठता है। राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिश के अनुसार यह अनुपात 5000:1 होना चाहिए। सिक्किम में स्वीकृत 84 पदों में से फिलहाल 50 पशु चिकित्सक कार्यरत हैं और 55 नए पदों को भरने की अधिसूचना जारी की गई है। राज्य में 6 मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स (MVUs) LHDCP योजना के तहत कार्यरत हैं जो किसानों के द्वार तक पशु चिकित्सा सेवा पहुंचा रही हैं।

पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने भारत में पशुओं की सेहत सुधारने और रोगों पर नियंत्रण पाने में एक सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह कार्यक्रम न केवल पशुधन उत्पादन में सुधार लाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

 

Exit mobile version