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Home कृषि समाचार

लंबी मूंछ वाली कैटफिश का पहली बार क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम तैयार, मछली पालन और संरक्षण अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

Chromosome-level genome of long-whiskered catfish prepared for the first time

Emran Khan by Emran Khan
September 30, 2026
in कृषि समाचार, पशुपालन
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कैटफिश आगे के शोध के लिए तैयार हुआ मजबूत आधार

कैटफिश आगे के शोध के लिए तैयार हुआ मजबूत आधार

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान (ICAR-CIBA), चेन्नई के वैज्ञानिकों ने लंबी मूंछ वाली कैटफिश Mystus gulio (Hamilton, 1822) का उच्च गुणवत्ता वाला क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम और फुल-लेंथ ट्रांसक्रिप्टोम संसाधन विकसित किया है। यह अध्ययन इस प्रजाति के आनुवंशिक आधार को समझने, बेहतर प्रजनन कार्यक्रम विकसित करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता, लवणता सहनशीलता और वृद्धि जैसे गुणों पर शोध को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह शोध Scientific Data, जो Nature Portfolio का जर्नल है, में 4 फरवरी 2026 को प्रकाशित हुआ। शोध में वैज्ञानिकों ने आधुनिक जीनोम सिक्वेंसिंग तकनीकों की मदद से 706.32 मेगाबेस (Mb) का जीनोम असेंबली तैयार किया, जिसमें 96.56 प्रतिशत जीनोम को 29 क्रोमोसोम से जोड़ा गया है। जीनोम की पूर्णता का स्तर BUSCO विश्लेषण में 98.1 प्रतिशत पाया गया। इसके साथ ही 10 अलग-अलग ऊतकों से फुल-लेंथ ट्रांसक्रिप्टोम डेटा तैयार कर 23,339 प्रोटीन-कोडिंग जीन की पहचान की गई।

कौन है लंबी मूंछ वाली कैटफिश?

Mystus gulio को सामान्य तौर पर Long Whiskers Catfish के नाम से जाना जाता है। यह Bagridae परिवार की मछली है और मुख्य रूप से खारे पानी यानी brackishwater habitats में पाई जाती है। इसका वितरण एशिया के पूर्वी हिंद महासागर से जुड़े क्षेत्रों में भारत से लेकर इंडोनेशिया और वियतनाम तक बताया गया है।

भारत के संदर्भ में यह मछली विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे छोटे देशी मत्स्य संसाधनों यानी Small Indigenous Fish Species (SIFS) की श्रेणी में देखा जाता है। ऐसी मछलियां स्थानीय खाद्य और पोषण सुरक्षा में भूमिका निभा सकती हैं। शोध पत्र में बताया गया है कि इस प्रजाति में विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिहाज से भी संभावनाएं हैं।

हालांकि, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बीज की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं के कारण इस मछली के व्यावसायिक स्तर पर पालन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

सुंदरबन में घटती आबादी ने बढ़ाई चिंता

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में इस प्रजाति के संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान दिया है। अध्ययन के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र सुंदरबन के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में 1950 से 2000 के बीच इस मछली की आबादी में गिरावट दर्ज की गई थी। शोध पत्र में एक औसत दशकीय गिरावट का अनुमान 33.56 प्रतिशत बताया गया है।

ऐसी परिस्थितियों में किसी प्रजाति के आनुवंशिक संसाधनों को समझना संरक्षण विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। जीनोम संबंधी जानकारी वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में मदद कर सकती है कि अलग-अलग प्राकृतिक आबादियों में आनुवंशिक विविधता कितनी है और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार उनमें किस तरह का अनुकूलन विकसित हुआ है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह जीनोम अध्ययन?

जीनोम किसी जीव के अंदर मौजूद आनुवंशिक जानकारी का व्यापक खाका होता है। किसी मछली की वृद्धि, रोगों के प्रति प्रतिक्रिया, लवणता सहने की क्षमता, प्रजनन, भोजन के उपयोग और पर्यावरण के साथ अनुकूलन जैसे कई गुणों के पीछे आनुवंशिक तंत्र काम करता है।

Mystus gulio के लिए अब तैयार किया गया क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम वैज्ञानिकों को इन गुणों के पीछे मौजूद जीन और आणविक प्रक्रियाओं की पहचान करने में मदद कर सकता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस जीनोमिक संसाधन से विशेष रूप से इन क्षेत्रों में अनुसंधान को गति मिल सकती है—

  • वृद्धि से जुड़े आनुवंशिक गुणों की पहचान
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन
  • खारे पानी में रहने और लवणता सहने की क्षमता को समझना
  • तनाव प्रतिक्रिया से जुड़े जीन की पहचान
  • आनुवंशिक सुधार और चयन आधारित प्रजनन
  • आणविक प्रजनन कार्यक्रम
  • आबादी की आनुवंशिक विविधता का अध्ययन
  • संरक्षण एवं स्टॉक सुधार
  • पोषण संबंधी क्षमता का अध्ययन
  • विकासवादी संबंधों की बेहतर समझ

706.32 Mb का तैयार हुआ जीनोम

इस अध्ययन का एक प्रमुख परिणाम 706.32 Mb लंबा क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम असेंबली है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए कई आधुनिक सिक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।

अध्ययन में PacBio HiFi, Illumina short-read sequencing और Hi-C sequencing जैसी तकनीकों को मिलाकर काम किया गया। पहले उच्च गुणवत्ता वाले डीएनए सीक्वेंस तैयार किए गए और इसके बाद Hi-C डेटा की मदद से जीनोमिक अनुक्रमों को क्रोमोसोम के स्तर पर व्यवस्थित किया गया।

शोध के अनुसार, लगभग 57.18 Gb PacBio HiFi डेटा, लगभग 81X कवरेज के साथ, प्रारंभिक जीनोम असेंबली के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके बाद लगभग 91.27 Gb Arima-HiC लिंक्ड रीड्स का उपयोग किया गया। अंतिम असेंबली में 108 स्कैफोल्ड शामिल थे और इसका N50 आकार 22.79 Mb रहा।

यहां N50 जीनोम असेंबली की निरंतरता और गुणवत्ता को समझने वाला एक महत्वपूर्ण तकनीकी मानक है। सामान्य रूप से अधिक N50 मान अधिक लंबे और निरंतर जीनोमिक अनुक्रमों का संकेत देता है।

29 क्रोमोसोम पर जीनोम का एंकरिंग

अध्ययन की एक प्रमुख उपलब्धि यह है कि तैयार जीनोम असेंबली का 96.56 प्रतिशत हिस्सा 29 क्रोमोसोम-स्तरीय स्कैफोल्ड से जुड़ा हुआ है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि यह संख्या Mystus gulio में पहले से रिपोर्ट किए गए क्रोमोसोम नंबर तथा Hemibagrus जीनस की कुछ मछलियों में रिपोर्ट किए गए क्रोमोसोम नंबर के अनुरूप है। वहीं Bagridae परिवार की कुछ अन्य प्रजातियों में 26 क्रोमोसोम रिपोर्ट किए गए हैं।

इस तरह का क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम वैज्ञानिकों को अलग-अलग जीन की स्थिति और उनके बीच संबंधों को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद करता है।

98.1 प्रतिशत जीनोम पूर्णता

जीनोम की गुणवत्ता जांचने के लिए वैज्ञानिकों ने BUSCO विश्लेषण किया। इसमें जीनोम की पूर्णता 98.1 प्रतिशत पाई गई। BUSCO विश्लेषण ऐसे संरक्षित जीनों की मौजूदगी को देखता है जो संबंधित जैविक समूहों में आम तौर पर पाए जाते हैं।

इसके अलावा, तैयार जीनोम की अनुमानित गुणवत्ता का QV यानी Quality Value 59.49 बताया गया है। शोधकर्ताओं ने क्रोमोसोम-स्तरीय स्कैफोल्ड के सिरों पर टेलोमेरिक अनुक्रम भी पहचाने।

इन परिणामों से पता चलता है कि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया जीनोमिक संसाधन आगे के जीनोमिक और आणविक अनुसंधान के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकता है।

जीनोम में मिले हजारों प्रोटीन-कोडिंग जीन

अध्ययन का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा फुल-लेंथ ट्रांसक्रिप्टोम है। ट्रांसक्रिप्टोम यह समझने में मदद करता है कि किसी जीव के विभिन्न ऊतकों में कौन से जीन सक्रिय हैं और किस तरह के RNA ट्रांसक्रिप्ट तैयार हो रहे हैं।

शोधकर्ताओं ने 10 अलग-अलग ऊतकों से फुल-लेंथ ट्रांसक्रिप्टोम तैयार किया। इनमें—

  1. गलफड़े (Gills)
  2. किडनी
  3. लिवर
  4. मांसपेशी
  5. अंडाशय
  6. त्वचा
  7. पेट
  8. Arborescent organ
  9. पृष्ठीय बार्बेल यानी dorsal barbel
  10. पित्ताशय (Gallbladder)

शामिल हैं।

इन ट्रांसक्रिप्टोम डेटा को जीनोम संबंधी जानकारी के साथ एकीकृत करने के बाद 23,339 प्रोटीन-कोडिंग जीन की पहचान की गई। साथ ही अलग-अलग isoforms और विभिन्न ऊतकों में होने वाली alternative splicing घटनाओं का भी अध्ययन किया गया।

लवणता सहनशीलता पर शोध को मिलेगी नई जानकारी

Long Whiskers Catfish एक ऐसी मछली है जो खारे पानी के वातावरण में रहती है। इसलिए इसकी salinity tolerance यानी अलग-अलग लवणता परिस्थितियों में जीवित रहने और अनुकूलन करने की क्षमता aquaculture research के लिए विशेष महत्व रखती है।

जीनोम और ट्रांसक्रिप्टोम की उपलब्धता से वैज्ञानिक उन जीनों और आणविक pathways की पहचान करने का प्रयास कर सकते हैं जो लवणता और पर्यावरणीय तनाव के प्रति मछली की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं।

इससे भविष्य में ऐसे प्रजनन कार्यक्रमों के विकास में मदद मिल सकती है जिनमें पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन करने वाले आनुवंशिक गुणों का चयन किया जाए। हालांकि, वर्तमान अध्ययन स्वयं किसी व्यावसायिक breeding programme या किसी विशेष जीन को व्यावसायिक रूप से उपयोगी घोषित नहीं करता; यह मुख्य रूप से आगे के शोध के लिए जीनोमिक आधार उपलब्ध कराता है।

रोग प्रतिरोध और वृद्धि पर भी हो सकता है काम

मछली पालन में रोग, वृद्धि दर और पर्यावरणीय तनाव प्रमुख अनुसंधान विषय हैं। किसी प्रजाति के जीनोम में मौजूद आनुवंशिक विविधताओं को समझने से वैज्ञानिक ऐसे जीन या molecular pathways की पहचान कर सकते हैं जिनका संबंध इन गुणों से हो सकता है।

Mystus gulio के मामले में उपलब्ध नया जीनोम वैज्ञानिकों को संभावित genetic markers और Quantitative Trait Loci (QTLs) की पहचान के लिए आधार देता है। ऐसे मार्कर भविष्य में marker-assisted breeding और genetic improvement research में उपयोग किए जा सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि इस अध्ययन से तुरंत कोई नई रोग-रोधी या तेजी से बढ़ने वाली मछली विकसित हो गई है। बल्कि यह शोध उस दिशा में आगे के प्रयोगों के लिए आवश्यक बुनियादी आनुवंशिक जानकारी उपलब्ध कराता है।

मछली के भोजन उपयोग और पोषण पर भी शोध संभव

शोधकर्ताओं ने जीनोमिक संसाधनों के संभावित उपयोग को feed conversion efficiency और nutritional potential के अध्ययन से भी जोड़ा है।

मछली कितनी प्रभावी ढंग से भोजन को शरीर की वृद्धि और अन्य जैविक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल करती है, यह aquaculture की आर्थिक दक्षता के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न है। जीन और metabolic pathways की बेहतर जानकारी भविष्य में इस विषय पर genome-scale metabolic models विकसित करने में मदद कर सकती है।

यह पहल खास तौर पर उन शोध कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनका उद्देश्य छोटे देशी मत्स्य संसाधनों को वैज्ञानिक तरीके से समझना और उनके संभावित aquaculture उपयोग का मूल्यांकन करना है।

प्राकृतिक आबादी और संरक्षण में भी उपयोगी

जीनोम केवल aquaculture के लिए ही उपयोगी नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण उपयोग conservation genetics में भी हो सकता है।

अलग-अलग क्षेत्रों से प्राप्त Mystus gulio की आबादियों के आनुवंशिक नमूनों की तुलना करके वैज्ञानिक यह अध्ययन कर सकते हैं कि उनमें कितनी आनुवंशिक विविधता है, कौन से आनुवंशिक बदलाव स्थानीय पर्यावरण के अनुकूलन से जुड़े हैं और किन आबादियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता हो सकती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, नए जीनोमिक संसाधन विभिन्न प्राकृतिक वातावरण में रहने वाली आबादियों में genetic diversity और adaptive variation के अध्ययन में मदद कर सकते हैं। इससे भविष्य में संरक्षण और stock improvement programmes के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार किया जा सकता है।

व्यावसायिक पालन की चुनौती अभी भी बनी हुई है

हालांकि इस अध्ययन से वैज्ञानिक आधार मजबूत हुआ है, लेकिन Long Whiskers Catfish के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक पालन से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान केवल जीनोम से नहीं होगा।

शोध पत्र के अनुसार, इस प्रजाति के commercial aquaculture को प्रभावित करने वाली प्रमुख समस्याओं में प्राकृतिक बीज की कमी और hatchery-produced seed की सीमित उपलब्धता शामिल हैं। भारत और बांग्लादेश में इस मछली का induced breeding और larval development सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया जा चुका है, लेकिन व्यापक स्तर पर बीज उत्पादन और पालन प्रणाली को अभी और विकसित करने की आवश्यकता है।

ऐसे में नया जीनोम संसाधन hatchery technology, breeding biology और genetic improvement से जुड़े भविष्य के शोध के साथ जोड़ा जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने कहां से लिया नमूना?

अध्ययन में इस्तेमाल किया गया Mystus gulio नमूना ICAR-CIBA के Muttukadu Experimental Station, Chennai से लिया गया था।

वैज्ञानिकों ने प्रजाति की पहचान की पुष्टि के लिए Cytochrome C Oxidase I (COI) जीन के एक हिस्से का sequencing किया। इस अनुक्रम को GenBank में PP855629 accession number के साथ जमा किया गया। इसके बाद विभिन्न Mystus species के उपलब्ध COI sequences के साथ phylogenetic analysis किया गया।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जीनोम sequencing के लिए इस्तेमाल किया गया नमूना सही प्रजाति Mystus gulio का है।

भारत के जलीय कृषि क्षेत्र के लिए संभावित महत्व

भारत में aquaculture तेजी से विकसित हो रहा है और इसके साथ ऐसी देशी मछली प्रजातियों पर शोध का महत्व भी बढ़ रहा है जिनमें पोषण, स्थानीय खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता और aquaculture की संभावनाएं मौजूद हैं।

Mystus gulio का जीनोम उपलब्ध होने से भारतीय वैज्ञानिकों के पास अब इस प्रजाति को आणविक स्तर पर समझने के लिए एक बेहतर reference resource मौजूद है।

आने वाले अध्ययनों में इसी आधार पर विभिन्न प्राकृतिक आबादियों की तुलना, disease-response genes, salinity adaptation, growth-related markers, reproduction और nutritional pathways का विस्तृत अध्ययन किया जा सकता है।

DBT के सहयोग से हुआ शोध

यह शोध Department of Biotechnology (DBT), Government of India द्वारा वित्त पोषित परियोजना “Genome sequencing and its application for Brackish water Aquaculture” के अंतर्गत किया गया। अध्ययन के लेखक ICAR-Central Institute of Brackishwater Aquaculture, चेन्नई से संबद्ध हैं।

शोध में Sudheesh K. Prabhudas, Vinaya Kumar Katneni, Ashok Kumar Jangam, Karthic Krishnan, Ashok Selvaraj, Jesudhas Raymond Jani Angel और Mudagandur S. Shekhar शामिल रहे।

आगे के शोध के लिए तैयार हुआ मजबूत आधार

इस अध्ययन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि Mystus gulio के लिए उच्च गुणवत्ता वाला chromosome-level genome और विभिन्न ऊतकों से full-length transcriptome resource उपलब्ध कराया गया है।

706.32 Mb जीनोम, 29 क्रोमोसोम, 98.1 प्रतिशत BUSCO completeness और 23,339 protein-encoding genes जैसे आंकड़े इस संसाधन की वैज्ञानिक उपयोगिता को दर्शाते हैं।

अब वैज्ञानिक इस जानकारी का इस्तेमाल केवल जीनों की पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि उनके कार्य और अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों में उनकी भूमिका समझने के लिए भी कर सकते हैं।

लंबी मूंछ वाली कैटफिश के लिए यह जीनोमिक संसाधन aquaculture, molecular breeding, population genetics, evolutionary biology, nutrition और conservation जैसे कई क्षेत्रों में भविष्य के शोध की नींव बन सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तरह की जानकारी से इस प्रजाति के genetic improvement और प्राकृतिक आबादी के sustainable management की दिशा में वैज्ञानिक आधार मजबूत होगा।

अध्ययन के प्रमुख आंकड़े

पैरामीटर प्रमुख जानकारी
मछली Mystus gulio
सामान्य नाम Long Whiskers Catfish
परिवार Bagridae
आवास Brackishwater
जीनोम आकार 706.32 Mb
क्रोमोसोम 29
क्रोमोसोम पर एंकर जीनोम 96.56%
BUSCO completeness 98.1%
N50 22.79 Mb
प्रोटीन-कोडिंग जीन 23,339
ट्रांसक्रिप्टोम 10 ऊतकों से
प्रमुख तकनीक PacBio HiFi, Illumina, Hi-C, PacBio Iso-Seq
संस्थान ICAR-CIBA, चेन्नई
प्रकाशन Scientific Data, Nature Portfolio
प्रकाशन तिथि 4 फरवरी 2026

निष्कर्ष: लंबी मूंछ वाली कैटफिश Mystus gulio का यह chromosome-level genome केवल एक जीनोम sequencing उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय brackishwater aquaculture में एक महत्वपूर्ण देशी मछली के लिए तैयार किया गया व्यापक आनुवंशिक संसाधन है। इससे भविष्य में बेहतर breeding, रोग और तनाव प्रतिक्रिया, लवणता अनुकूलन, पोषण, आनुवंशिक विविधता और संरक्षण से जुड़े शोध को वैज्ञानिक आधार मिल सकता है।

स्रोत: Scientific Data, Nature Portfolio में प्रकाशित शोधपत्र — Chromosome level genome and full length transcriptome of long whiskers catfish, Mystus gulio (Hamilton, 1822), Prabhudas et al., 2026.

 

Tags: Animal HusbandryFarming Fish FarmingFarming News
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