हरियाणा में रबी फसलों की बुवाई के बीच DAP Fertilizer Shortage किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है। जींद जिले के सफीदों क्षेत्र में किसानों के खेत गेहूं और सरसों की बुवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती का काम प्रभावित हो रहा है। हालांकि कृषि विभाग ने अगले एक-दो दिनों में नई खेप पहुंचने की उम्मीद जताई है। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाद आने तक बुवाई रोकें या वैज्ञानिक सलाह से दूसरे विकल्प अपनाएं।
सफीदों में DAP Fertilizer Shortage, किसानों की बढ़ी मुश्किल
हरियाणा के सफीदों उपमंडल में रबी सीजन 2026-27 की शुरुआत किसानों के लिए परेशानी लेकर आई है। गेहूं और सरसों की बुवाई का समय चल रहा है, लेकिन क्षेत्र में डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) खाद की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन किसानों ने धान की कटाई के बाद खेत तैयार कर लिए हैं, वे खाद की व्यवस्था नहीं होने के कारण बुवाई का काम आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं।
स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, सफीदों क्षेत्र में विभिन्न गांवों से आए किसानों ने बताया कि खेतों की तैयारी पूरी होने के बावजूद डीएपी नहीं मिल रही है। किसानों की परेशानी इसलिए भी अधिक है क्योंकि रबी की फसलों में समय पर बुवाई को अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारी ने भी DAP Fertilizer Shortage होने की पुष्टि की है। हालांकि विभाग का कहना है कि खाद कंपनियों को मांग भेजी जा चुकी है और जल्द आपूर्ति होने की उम्मीद है।
DAP Fertilizer Shortage-2026: कृषि अधिकारी ने बताया, कब तक पहुंचेगी DAP की नई खेप?
सफीदों के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सुशील गुप्ता के अनुसार, क्षेत्र में रिपोर्ट किए गए दिन डीएपी का स्टॉक उपलब्ध नहीं था। खाद की मांग संबंधित कंपनियों को भेज दी गई है और अगले एक-दो दिनों में नई खेप पहुंचने की संभावना है।
अधिकारी ने खाद वितरण की प्रस्तावित व्यवस्था की भी जानकारी दी। इसके अनुसार नई आपूर्ति मिलने के बाद किसानों को दो माध्यमों से डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी।
- 60 प्रतिशत डीएपी: प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से।
- 40 प्रतिशत डीएपी: खाद कंपनियों के अधिकृत निजी डीलरों के माध्यम से।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सहकारी समितियों के साथ निजी बिक्री केंद्रों के माध्यम से भी किसानों तक खाद पहुंचाना है। हालांकि नई खेप की वास्तविक मात्रा, वितरण शुरू होने की तारीख और प्रत्येक किसान को मिलने वाली खाद की सीमा की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
DAP Fertilizer Shortage से गेहूं और सरसों की बुवाई पर क्यों पड़ रहा असर?
हरियाणा में अक्टूबर और नवंबर का समय रबी फसलों की बुवाई के लिए महत्वपूर्ण होता है। धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी शुरू करते हैं। दूसरी ओर, सरसों की बुवाई भी अक्टूबर से नवंबर के शुरुआती दिनों तक विभिन्न क्षेत्रों में की जाती है।
गेहूं की फसल में सही समय पर बुवाई होने से पौधों को पर्याप्त समय मिलता है। इससे जड़ों का विकास, कल्ले निकलने की प्रक्रिया और आगे चलकर दाना बनने की क्षमता प्रभावित होती है। यदि बुवाई में अधिक देरी हो जाए तो बढ़ते तापमान का असर फसल के अंतिम विकास चरण पर पड़ सकता है।
सरसों की खेती में भी बुवाई का समय महत्वपूर्ण है। देर से बोई गई सरसों में मौसम और कीटों से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। हालांकि वास्तविक प्रभाव किस्म, तापमान, मिट्टी की नमी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
कृषि विशेषज्ञों ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ क्षेत्र में सरसों के लिए अक्टूबर के मध्य से नवंबर के शुरुआती सप्ताह और सामान्य गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर के पहले पखवाड़े को उपयुक्त अवधि बताया था।
ऐसे में सफीदों में खाद की कमी यदि लंबे समय तक बनी रहती है, तो खेत तैयार होने के बावजूद बुवाई की तारीख आगे खिसक सकती है। इसका प्रभाव खेती की लागत और उत्पादन योजना दोनों पर पड़ने की आशंका है।
हरियाणा के दूसरे जिलों में भी सामने आई खाद की कमी
सफीदों में डीएपी की अनुपलब्धता कोई अकेली घटना नहीं है। रबी सीजन शुरू होने के दौरान हरियाणा के दूसरे जिलों से भी खाद की कमी और वितरण में परेशानी की खबरें सामने आई हैं।
सितंबर 2026 में सिरसा में डीएपी नहीं मिलने से नाराज किसानों ने डबवाली रोड पर प्रदर्शन किया था। खाद लेने पहुंचे किसानों को स्टॉक उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिली थी। इसी तरह महेंद्रगढ़ में अक्टूबर की शुरुआत में किसानों को नई खेप का इंतजार करना पड़ा था।
अक्टूबर में राज्य के विभिन्न जिलों के लिए खाद आपूर्ति बढ़ाने की योजना भी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा में रबी फसलों के लिए अक्टूबर के दौरान लगभग 7.50 लाख मीट्रिक टन विभिन्न उर्वरकों की आपूर्ति की तैयारी की गई थी।
इसके बावजूद सफीदों में डीएपी नहीं मिलना बताता है कि राज्यस्तर पर आपूर्ति की योजना और स्थानीय बिक्री केंद्रों पर वास्तविक उपलब्धता में अंतर हो सकता है।
किसानों ने उठाई खाद के साथ जबरन दूसरी सामग्री बेचने की समस्या
सफीदों के किसानों ने खाद की उपलब्धता के साथ बिक्री व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने मांग की है कि निजी विक्रेताओं के पास पहुंचने वाली डीएपी और यूरिया तत्काल किसानों को उपलब्ध कराई जाए।
किसानों ने यह भी मांग की कि डीएपी खरीदने के लिए उन्हें जबरन कोई कीटनाशक, दवा या दूसरी कृषि सामग्री खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए।
हरियाणा सरकार पहले भी खाद की जमाखोरी, कालाबाजारी और जबरन अतिरिक्त उत्पाद बेचने के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दे चुकी है। राज्य कृषि विभाग ने खाद विक्रेताओं के स्टॉक की नियमित जांच और अनियमितता मिलने पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
यहां किसानों के लिए जरूरी है कि वे खाद खरीदते समय अधिकृत विक्रेता से बिल जरूर लें और निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे मांगने पर कृषि विभाग को शिकायत करें।
DAP खाद गेहूं और सरसों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
DAP भारतीय खेती में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक है। इसमें सामान्यतः 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फेट (P₂O₅) होता है।
फॉस्फोरस पौधों की शुरुआती जड़ वृद्धि और ऊर्जा से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। गेहूं में शुरुआती विकास के दौरान फॉस्फोरस की पर्याप्त उपलब्धता फसल की स्थापना में मदद करती है। सरसों में भी जड़ों की वृद्धि और पौधों के विकास में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि फसल को डीएपी नाम की खाद नहीं, बल्कि सही मात्रा में पोषक तत्व चाहिए। यदि मिट्टी की जरूरत के अनुसार फॉस्फोरस किसी अन्य उपयुक्त उर्वरक से मिल जाता है, तो डीएपी के बिना भी पोषण प्रबंधन संभव है।
DAP नहीं मिले तो किसान कौन-सी खाद इस्तेमाल करें?
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के मृदा वैज्ञानिकों ने गेहूं की खेती के लिए डीएपी के स्थान पर अन्य फॉस्फोरसयुक्त उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह दी है। इनमें NPK, Single Super Phosphate (SSP) और Triple Super Phosphate (TSP) प्रमुख हैं।
| खाद | प्रमुख पोषक तत्व | खास बात |
| DAP 18:46:0 | नाइट्रोजन और फॉस्फेट | बुवाई के समय प्रचलित खाद |
| NPK 12:32:16 | नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश | तीन प्रमुख पोषक तत्व |
| SSP | लगभग 16% फॉस्फेट और सल्फर | सरसों जैसी तिलहनी फसलों में उपयोगी |
| TSP | लगभग 46% फॉस्फेट | फॉस्फोरस का स्रोत, नाइट्रोजन नहीं |
सफीदों के कृषि अधिकारी ने भी बताया है कि बाजार में TSP उपलब्ध है, लेकिन किसान डीएपी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि इन उर्वरकों में पोषक तत्वों का अनुपात अलग-अलग होता है। इसलिए एक खाद की जगह दूसरी खाद उतनी ही मात्रा में डालना हमेशा सही नहीं होगा। विशेषकर SSP या TSP इस्तेमाल करने पर नाइट्रोजन की जरूरत अलग से पूरी करनी पड़ सकती है।
सही खाद और मात्रा तय करने के लिए Soil Testing Report और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
सफीदों में DAP Fertilizer Shortage से खेती की लागत भी बढ़ने की आशंका
किसानों के लिए खाद की कमी केवल बुवाई में देरी की समस्या नहीं है। इसका असर उनकी आर्थिक योजना पर भी पड़ सकता है।
खेत तैयार करने के लिए किसान पहले ही ट्रैक्टर, डीजल, बीज और मजदूरी पर खर्च कर चुके होते हैं। यदि बुवाई खाद की वजह से रुक जाए तो उन्हें दोबारा खेत की तैयारी, अतिरिक्त सिंचाई या मजदूरी पर खर्च करना पड़ सकता है।
इसके अलावा किसान दूर-दराज के बिक्री केंद्रों पर खाद तलाशने जाते हैं तो परिवहन खर्च और समय दोनों बढ़ते हैं।
यदि खाद पर्याप्त मात्रा में समय पर पहुंच जाए तो इन परेशानियों से बचा जा सकता है। लेकिन आपूर्ति में लंबी देरी छोटे और सीमांत किसानों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
किसानों को अब क्या करना चाहिए?
खेती के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को केवल डीएपी के इंतजार में पूरी बुवाई योजना रोकने के बजाय कृषि विभाग से उपलब्ध विकल्पों की जानकारी लेनी चाहिए।
सबसे पहले अपने नजदीकी PACS, अधिकृत खाद विक्रेता या खंड कृषि कार्यालय से उपलब्ध स्टॉक की स्थिति पता करें। हरियाणा में खाद वितरण व्यवस्था को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल से जोड़ा गया है, इसलिए किसान अपने पंजीकरण और फसल विवरण भी जांच लें।
यदि DAP के साथ कोई दूसरा उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता है, तो किसान जिला कृषि कार्यालय में शिकायत कर सकते हैं। हरियाणा में ऐसी शिकायतों के लिए पूर्व में जारी टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 का भी उपयोग किया जा सकता है।
किसानों को बिना मिट्टी परीक्षण या कृषि सलाह के अधिक मात्रा में उर्वरक नहीं डालना चाहिए। जरूरत से ज्यादा खाद देने पर खर्च बढ़ता है और पोषक तत्वों का असंतुलन भी पैदा हो सकता है।
कब मिलेगी किसानों को राहत?
सफीदों में किसानों की नजर अब डीएपी की अगली खेप पर टिकी है। कृषि अधिकारी ने एक-दो दिनों में आपूर्ति पहुंचने की उम्मीद जताई है। यदि कंपनियों से खाद समय पर आ जाती है और सहकारी समितियों तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से वितरण शुरू हो जाता है, तो किसानों को राहत मिल सकती है।
सबसे जरूरी सवाल खाद की कुल आपूर्ति से आगे बढ़कर समय पर स्थानीय उपलब्धता का है। गेहूं और सरसों की बुवाई का मौसम सीमित होता है। ऐसे में प्रशासन को किसानों की वास्तविक मांग के अनुसार पर्याप्त खाद पहुंचाने, स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करने और वितरण व्यवस्था पारदर्शी रखने की जरूरत है।
सफीदों के किसानों को उम्मीद है कि नई खेप जल्द पहुंचेगी, ताकि वे बिना अतिरिक्त देरी के रबी फसलों की बुवाई पूरी कर सकें।
