गोबर से कमाई, गोवंश की सेवा: सहारनपुर की कान्हा उपवन गौशाला बनी पूरे प्रदेश के लिए मिसाल

Earning from cow dung, serving cattle: Saharanpur's Kanha Upvan Gaushala has become an example for the entire state.

KanhaUpvanGaushala: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की कान्हा उपवन गौशाला इन दिनों अपनी अनोखी कार्यप्रणाली और आत्मनिर्भर मॉडल को लेकर लगातार चर्चा में है. नगर निगम द्वारा सावलपुर नवादा क्षेत्र में संचालित यह गौशाला सिर्फ बेसहारा गोवंश के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि जैविक उत्पादों और ग्रामीण रोजगार का भी बड़ा माध्यम बन चुकी है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां पहुंचकर गौशाला में तैयार होने वाले उत्पादों की सराहना कर चुके हैं.

वर्तमान में इस गौशाला में 500 से अधिक आवारा और बेसहारा गोवंशों को सुरक्षित रखा गया है. नगर निगम द्वारा यहां पशुओं के भोजन, चिकित्सा और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की गई है. खास बात यह है कि गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर और गोमूत्र से कई तरह के उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग भी देखने को मिल रही है.

गौशाला में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद, धूपबत्ती, दीये और गोकाष्ठ बनाए जा रहे हैं. वहीं गोमूत्र से जैविक कीटनाशक और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों की बिक्री से गौशाला को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है, जिससे पशुओं की देखभाल और संचालन में आर्थिक मदद मिल रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहा है.

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, गौशाला का उद्देश्य केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे रोजगार और स्वच्छता से भी जोड़ा गया है. यहां स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं को भी काम दिया जा रहा है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ रही है. गोबर आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग ने ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह अन्य जिलों की गौशालाओं में भी गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों का निर्माण शुरू किया जाए, तो गौशालाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं. इससे सरकार पर आर्थिक बोझ कम होगा और किसानों को जैविक खेती के लिए सस्ती खाद भी उपलब्ध हो सकेगी.

सहारनपुर की कान्हा उपवन गौशाला अब केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं रही, बल्कि यह स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण रोजगार का सफल मॉडल बनकर उभर रही है. यही कारण है कि प्रदेश के कई जिलों के अधिकारी यहां आकर इसकी कार्यप्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं. आने वाले समय में यह मॉडल राज्य की अन्य गौशालाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है.

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