धान की नर्सरी कैसे तैयार करें, बेहतर पौध तैयार करने की वैज्ञानिक विधि

How to prepare paddy nursery, scientific method to prepare better seedlings

भारत में धान एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है और इसकी अच्छी पैदावार काफी हद तक स्वस्थ एवं मजबूत पौध पर निर्भर करती है। यदि धान की नर्सरी सही तरीके से तैयार की जाए तो पौधे मजबूत बनते हैं, रोग कम लगते हैं और मुख्य खेत में रोपाई के बाद फसल तेजी से बढ़ती है। इसलिए किसान भाइयों के लिए धान की नर्सरी तैयार करने की सही जानकारी होना बहुत आवश्यक है।

धान की नर्सरी का महत्व

धान की खेती में नर्सरी वह स्थान होता है जहाँ बीजों को पहले बोया जाता है और बाद में तैयार पौधों को मुख्य खेत में रोपित किया जाता है। अच्छी नर्सरी से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं—

नर्सरी के लिए उपयुक्त स्थान का चयन

धान की नर्सरी तैयार करने के लिए ऐसे खेत का चयन करना चाहिए जहाँ पानी की पर्याप्त सुविधा हो और जल निकास भी अच्छा हो। भूमि उपजाऊ तथा समतल होनी चाहिए। नर्सरी मुख्य खेत के पास हो तो पौध उखाड़ने और रोपाई में सुविधा रहती है।

स्थान चयन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

नर्सरी की तैयारी का सही समय

धान की नर्सरी तैयार करने का समय क्षेत्र और किस्म पर निर्भर करता है। सामान्यतः खरीफ मौसम में जून से जुलाई के बीच नर्सरी तैयार की जाती है। समय पर नर्सरी तैयार करने से पौध सही उम्र में रोपाई के लिए उपलब्ध हो जाती है।

बीज का चयन

अच्छी उपज के लिए प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीजों का चयन करना चाहिए। रोगग्रस्त या टूटे हुए बीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

प्रमुख उन्नत धान किस्में

क्षेत्र के अनुसार कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित किस्मों का ही चयन करें।

बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर क्षेत्र की रोपाई के लिए सामान्यतः 25 से 35 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। संकर धान के लिए बीज की मात्रा कम लगती है।

बीज उपचार का महत्व

बीज उपचार करने से बीज जनित रोगों से बचाव होता है तथा अंकुरण अच्छा होता है। किसान बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करें।

बीज उपचार की विधि

नर्सरी की भूमि की तैयारी

नर्सरी खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। खेत को भुरभुरा एवं समतल बनाना जरूरी है। खेत में गोबर की सड़ी खाद मिलाने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है।

भूमि तैयारी के मुख्य चरण

  1. खेत की 2–3 जुताई करें
  2. पाटा लगाकर भूमि समतल करें
  3. गोबर की खाद मिलाएँ
  4. छोटे-छोटे बेड तैयार करें
  5. सिंचाई की नालियाँ बनाएँ

नर्सरी में खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

स्वस्थ पौध तैयार करने के लिए संतुलित उर्वरक देना आवश्यक है।

प्रति 100 वर्गमीटर नर्सरी हेतु

उर्वरकों को अंतिम जुताई के समय मिला देना चाहिए।

बीज बुवाई की विधि

अंकुरित बीजों को समान रूप से नर्सरी में छिड़काव विधि से बोना चाहिए। ध्यान रखें कि बीज बहुत अधिक घने न हों, अन्यथा पौधे कमजोर हो जाते हैं।

बुवाई के समय सावधानियाँ

सिंचाई प्रबंधन

धान की नर्सरी में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। शुरुआत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। अधिक पानी भरने से अंकुर खराब हो सकते हैं।

सिंचाई संबंधी सुझाव

खरपतवार एवं रोग नियंत्रण

नर्सरी में खरपतवार पौधों की वृद्धि रोकते हैं। समय-समय पर खरपतवार हटाना जरूरी है। रोग एवं कीटों की निगरानी भी करते रहें।

सामान्य रोग एवं बचाव

  1. झुलसा रोग

फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

  1. तना छेदक कीट

उचित कीटनाशक का प्रयोग करें।

  1. पत्ती लपेटक

फसल की नियमित निगरानी करें।

पौध उखाड़ने का सही समय

धान की पौध सामान्यतः 20 से 25 दिन में रोपाई योग्य हो जाती है। पौधे स्वस्थ, हरे और मजबूत होने चाहिए।

पौध उखाड़ते समय ध्यान दें

धान की नर्सरी तैयार करते समय सामान्य गलतियाँ

इन गलतियों से पौध कमजोर हो सकती है और उत्पादन घट सकता है।

धान की अच्छी पैदावार के लिए मजबूत और स्वस्थ पौध तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। यदि किसान वैज्ञानिक विधि से नर्सरी तैयार करें, अच्छे बीजों का चयन करें, संतुलित उर्वरक एवं उचित सिंचाई प्रबंधन अपनाएँ, तो धान की फसल अधिक उत्पादन दे सकती है। सही नर्सरी प्रबंधन न केवल लागत कम करता है बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

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