India Competitiveness Report: संरचनात्मक सुधारों से भारत की वैश्विक रैंकिंग में बड़ी छलांग, 82वें से 57वें स्थान पर पहुंचा देश

India Competitiveness Report: Structural reforms led to a major jump in India's global ranking, moving from 82nd to 57th.

India Competitiveness Report: Structural reforms led to a major jump in India's global ranking, moving from 82nd to 57th.

India Competitiveness Report: Structural reforms led to a major jump in India's global ranking, moving from 82nd to 57th.

भारत की अर्थव्यवस्था और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता (Competitiveness) को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। कॉम्पेटेरे फाउंडेशन (Competere Foundation) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से 2023 के बीच किए गए संरचनात्मक (Structural Reforms) और प्रतिस्पर्धा-समर्थक (Competition-Friendly) सुधारों के कारण भारत ने वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। मार्केट डिस्टॉर्शन्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (Market Distortions Performance Index) में भारत 82वें स्थान से बढ़कर 57वें स्थान पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में भारत ने बाजार विकृतियों (Market Distortions) को कम करने, नियामकीय ढांचे को सरल बनाने और प्रतिस्पर्धी व्यापार वातावरण तैयार करने की दिशा में कई बड़े सुधार किए हैं। इन सुधारों ने भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

CTIL और Competere Foundation ने जारी की रिपोर्ट

यह रिपोर्ट “India’s Next Growth Frontier: Reducing Anti-Competitive Market Distortions to Build on India’s 2010–2023 Reform Progress” शीर्षक से जारी की गई। इसका विमोचन भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (Indian Institute of Foreign Trade-IIFT) के Centre for Trade and Investment Law (CTIL) द्वारा Competere Foundation for Trade and Competition Policy के सहयोग से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया।

कार्यक्रम का विषय था—“India’s Reform Trajectory, Market Distortions and the Next Frontier for Growth and Competitiveness”, जिसमें भारत की सुधार यात्रा, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भविष्य की आर्थिक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

82वें से 57वें स्थान पर पहुंचा भारत

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 से वर्ष 2023 के बीच भारत ने कई ऐसे आर्थिक और संस्थागत सुधार लागू किए, जिनके कारण वैश्विक रैंकिंग में देश की स्थिति मजबूत हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार केवल रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत ने व्यापार, निवेश, उद्योग और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में एक अधिक पारदर्शी और सक्षम वातावरण तैयार किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार में अनावश्यक हस्तक्षेप कम होने और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने से निवेशकों का विश्वास भी मजबूत हुआ है।

तीन प्रमुख आधारों पर हुआ मूल्यांकन

Market Distortions Performance Index में भारत का मूल्यांकन तीन प्रमुख स्तंभों के आधार पर किया गया—

इन तीनों क्षेत्रों में भारत द्वारा किए गए सुधारों का विश्लेषण कर वैश्विक रैंकिंग निर्धारित की गई।

GST और IBC जैसे सुधारों का मिला लाभ

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत की बेहतर रैंकिंग के पीछे कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों की भूमिका रही है।

इनमें प्रमुख हैं—

इन सुधारों ने उद्योगों के लिए कारोबार करना आसान बनाया और निवेश को प्रोत्साहित किया।

डिजिटल बाजारों पर भी रिपोर्ट का फोकस

रिपोर्ट में तेजी से विकसित हो रहे Digital Markets पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

इसमें बताया गया है कि भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) के विस्तार के साथ प्रतिस्पर्धा नीति, डेटा गवर्नेंस, डिजिटल व्यापार और निवेश से जुड़े नए नियामकीय ढांचे पर लगातार कार्य कर रहा है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाली बाहरी नियामकीय बाधाओं (External Regulatory Barriers) का भी विश्लेषण किया गया है।

उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यक्रम की शुरुआत CTIL के प्रमुख एवं प्रोफेसर डॉ. जेम्स जे. नेदुमपारा के स्वागत भाषण से हुई।

उन्होंने कहा कि भारत की सुधार यात्रा का मूल्यांकन केवल घरेलू दृष्टिकोण से नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भी किया जाना आवश्यक है।

सुधांशु पांडे और शंकर सिंघम ने प्रस्तुत किए प्रमुख निष्कर्ष

कार्यक्रम में लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के राज्य चुनाव आयुक्त एवं भारत सरकार के पूर्व सचिव श्री सुधांशु पांडे ने मुख्य वक्तव्य दिया।

इसके बाद Competere Foundation के अध्यक्ष श्री शंकर सिंघम ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत ने प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और बाजार विकृतियों को कम करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन भविष्य में और सुधारों की आवश्यकता बनी हुई है।

प्रतिस्पर्धा नीति को और मजबूत करने की सिफारिश

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को प्रतिस्पर्धा नीति (Competition Policy) को और अधिक Evidence-Based तथा Outcome-Oriented बनाना चाहिए।

इसके अलावा रिपोर्ट में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं—

पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया।

चर्चा में निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श हुआ—

कार्यक्रम का समापन संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न आर्थिक और व्यापारिक विषयों पर अपने प्रश्न रखे।

भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा होगी मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार विदेशी निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) को मजबूत बनाने और Global Value Chains में भारत की भागीदारी बढ़ाने में सहायक होगा।

यदि सरकार आने वाले वर्षों में श्रम सुधार, लॉजिस्टिक्स, व्यापार सुविधा, डिजिटल अवसंरचना और नवाचार (Innovation) पर इसी प्रकार ध्यान देती रही तो भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

रिपोर्ट के अनुसार प्रतिस्पर्धी बाजार व्यवस्था न केवल उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाती है, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, निवेशकों को स्थिर वातावरण और अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक विकास का आधार भी प्रदान करती है।

भारत द्वारा पिछले एक दशक में लागू किए गए सुधारों ने यह साबित किया है कि मजबूत नीतिगत निर्णय वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

Competere Foundation की रिपोर्ट भारत की आर्थिक सुधार यात्रा को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है। 2010 से 2023 के बीच GST, IBC, Regulatory Reforms, Trade Facilitation, Investment Climate और Competition Policy जैसे क्षेत्रों में किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप भारत Market Distortions Performance Index में 82वें से 57वें स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार मजबूत कर रहा है। यदि आने वाले वर्षों में संरचनात्मक सुधारों की यह गति बनी रहती है, तो भारत वैश्विक व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

 

 

 

 

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