Maharashtra Fodder Farming Scheme: महाराष्ट्र के किसानों के लिए चारे की खेती अब अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है। राज्य के लातूर जिले में सूखे की आशंका और पशुओं के लिए चारे की बढ़ती जरूरत को देखते हुए प्रशासन ने विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत पात्र किसानों को एक एकड़ में चारा उगाने के लिए 1,21,815 रुपये तक की सरकारी सहायता मिलेगी। खास बात यह है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास गाय, भैंस या अन्य पशु होना जरूरी नहीं है।
लातूर जिला प्रशासन की ओर से 26 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, जिन किसानों के पास रबी सीजन में सिंचाई की व्यवस्था है, वे इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं। सरकार का उद्देश्य केवल चारे का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार करना और किसानों को आय का नया साधन उपलब्ध कराना भी है। आवेदन की अंतिम तारीख 1 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
Maharashtra Fodder Farming Scheme में किसे मिलेगा फायदा?
लातूर जिले के ऐसे किसान, जिनके खेत में नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है, इस योजना में भाग ले सकते हैं।चारा उत्पादन करने वाले किसानों के सामने अक्सर सबसे बड़ी समस्या बाजार और लागत की होती है। कई किसान इसलिए चारे की खेती नहीं करते, क्योंकि उनके पास अपने पशु नहीं होते। इस योजना में यह बाधा दूर करने की कोशिश की गई है। किसान तैयार हरे चारे का उपयोग अपने पशुओं के लिए कर सकते हैं। जिनके पास पशु नहीं हैं, वे इसे आसपास के डेयरी किसानों और पशुपालकों को बेच सकते हैं।
प्रति एकड़ 1,21,815 रुपये की सहायता का हिसाब
प्रति एकड़ स्वीकृत सहायता
₹1,21,815
मजदूरी
₹84,956
बीज, खाद व सामग्री
₹36,859
यह खेती के लिए निर्धारित सहायता है, किसान की शुद्ध कमाई या एकमुश्त नकद भुगतान नहीं। Maharashtra Fodder Farming Scheme में खेत की तैयारी, बुवाई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, खाद और फसल कटाई जैसी गतिविधियां शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार, योजना का उद्देश्य इन कार्यों की लागत में सरकारी सहयोग देकर किसानों का आर्थिक बोझ कम करना है।
मुफ्त मिलेगा स्पीडफीड ज्वार का बीज
इस योजना के लिए चारा ज्वार की स्पीडफीड (Speedfeed) किस्म चुनी गई है। इसके बीज महाराष्ट्र के सरकारी बीज उपक्रम महाबीज द्वारा जिला वार्षिक योजना के माध्यम से मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। स्पीडफीड की विशेषता यह है कि पहली कटाई बुवाई के लगभग 55 से 60 दिनों में की जा सकती है। इसके बाद उपयुक्त देखभाल और सिंचाई मिलने पर लगभग 35 से 40 दिनों के अंतराल पर दो अतिरिक्त कटाइयां संभव हैं। इस प्रकार किसान एक ही बुवाई से चार महीने के भीतर तीन बार हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक उत्पादन मिट्टी की स्थिति, तापमान, पानी और फसल प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
चारा बेचकर 1.5 लाख रुपये तक कमाई की संभावना
लातूर प्रशासन के अनुमान के अनुसार, योजना से जुड़े किसान अनुकूल परिस्थितियों में चार महीने के दौरान प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये तक के हरे चारे की बिक्री कर सकते हैं। हालांकि, यह अनुमानित बिक्री आय है, निश्चित लाभ नहीं। किसानों की वास्तविक कमाई चारे के उत्पादन, स्थानीय मांग, बिक्री मूल्य और परिवहन खर्च पर निर्भर करेगी। किसानों को बुवाई से पहले आसपास के डेयरी संचालकों और पशुपालकों से संपर्क करके चारे की मांग की जानकारी लेना फायदेमंद हो सकता है।
आवेदन कैसे करें? जानिए पूरी प्रक्रिया
Maharashtra Fodder Farming Scheme के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। लातूर जिला परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर पशुपालन विभाग की ओर से आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराया गया है।
-
सबसे पहले लातूर जिला परिषद की आधिकारिक आवेदन सूचना खोलें।
-
यहां वर्ष 2026-27 के Fodder Production Program की सूचना चुनें।
-
आवेदन के लिए उपलब्ध फॉर्म लिंक पर क्लिक करें।
-
मांगी गई जानकारी मराठी भाषा में भरें।
-
जानकारी जांचने के बाद आवेदन जमा करें।
आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन की अवधि 8 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक दिखाई गई है। किसानों को आवश्यक दस्तावेजों और सिंचाई संबंधी प्रमाण की जानकारी के लिए स्थानीय पशुपालन विभाग से संपर्क करना चाहिए।
लातूर में चारा उत्पादन बढ़ाना क्यों जरूरी?
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। लातूर प्रशासन ने शुरुआती चरण में लगभग 5,000 हेक्टेयर में चारा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित 304 तालुकों में चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए हैं। इनमें चारा उत्पादन, खरीद और भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
चारे की खेती शुरू करने से पहले पानी की उपलब्धता का सही आकलन करें। केवल सरकारी सहायता के आधार पर फसल का चयन करने के बजाय स्थानीय बाजार, पशुपालकों की मांग और कटाई के बाद चारे की बिक्री की व्यवस्था भी देखें।
फिलहाल 1.21 लाख रुपये वाली यह पहल लातूर जिले के संदर्भ में घोषित की गई है। दूसरे जिलों के किसान अपने जिला कृषि कार्यालय या पशुपालन विभाग से संबंधित योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें।

