Maharashtra Fodder Scheme: चारे की किल्लत होगी दूर! सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Maharashtra Fodder Scheme: Fodder shortage to be resolved! Government takes a major decision

Maharashtra Fodder Scheme

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Maharashtra Fodder Scheme: महाराष्ट्र सरकार ने सूखे और पशुओं के लिए बढ़ती चारे की कमी को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब जिला वार्षिक योजना निधि का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा चारा उत्पादन, भंडारण और वैकल्पिक चारा व्यवस्था पर खर्च किया जाएगा। सरकार के इस कदम से हजारों पशुपालकों और डेयरी किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र में कम बारिश और सूखे की स्थिति ने खेती के साथ-साथ पशुपालन की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कई क्षेत्रों में हरे चारे की उपलब्धता घटने से किसानों को पशुओं के रखरखाव पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने Maharashtra Fodder Scheme के तहत नई व्यवस्था तैयार की है।

30 अक्टूबर 2026 को जारी सरकारी निर्णय के अनुसार, जिलाधिकारियों को चारा उत्पादन बढ़ाने, चारा बैंक स्थापित करने और जरूरतमंद पशुपालकों तक चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने भी इस फैसले की जानकारी दी है।

304 तहसीलों में सूखे का संकट, पशुपालकों की बढ़ी चिंता

महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के दौरान निर्धारित सूखा संकेतकों के आधार पर राज्य की 304 तहसीलों में सूखे की घोषणा की है। बारिश की कमी से कई इलाकों में चारा उत्पादन प्रभावित हुआ है।

पशुपालकों के लिए चारे की कमी केवल पशुओं के भोजन की समस्या नहीं है। इसका सीधा असर दूध उत्पादन, पशुओं के स्वास्थ्य और Dairy Farming से होने वाली कमाई पर भी पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार ने Fodder Management को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तर पर आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

जिला फंड का 5 प्रतिशत हिस्सा कैसे खर्च होगा?

नई व्यवस्था के तहत जिला कलेक्टर संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी से वार्षिक योजना निधि का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा चारे से संबंधित कार्यों के लिए उपलब्ध कराएंगे।

इस धनराशि का उपयोग चारे की खेती बढ़ाने, उपलब्ध चारे के संरक्षण, भंडारण की सुविधाओं और वैकल्पिक चारा उत्पादन तकनीकों को विकसित करने में किया जाएगा।

उदाहरण के लिए, यदि किसी जिले की वार्षिक योजना निधि 200 करोड़ रुपये है, तो 5 प्रतिशत के हिसाब से कम से कम 10 करोड़ रुपये चारा संबंधी योजनाओं के लिए उपलब्ध कराए जा सकते हैं। यह केवल गणना का उदाहरण है, किसी विशेष जिले के स्वीकृत बजट का आंकड़ा नहीं।

सूखे चारे के लिए 12 रुपये और साइलेज के लिए 8 रुपये प्रति किलो की सीमा

महाराष्ट्र सरकार ने चारे की सरकारी खरीद में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए Reference Price Ceiling भी निर्धारित की है। सूखा चारा (Dry Fodder)

₹12/किलो

साइलेज (Silage)

₹8/किलो

सरकारी खरीद की संदर्भ मूल्य सीमा। परिवहन खर्च अलग है। यह सभी निजी दुकानों पर लागू खुदरा बिक्री मूल्य नहीं है।सरकार ने सूखे चारे को प्राथमिकता देने की बात कही है, क्योंकि इसे हरे चारे की तुलना में अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे सूखे के दौरान चारे का स्टॉक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

गांवों में बनेंगे चारा बैंक, किसानों को मिलेगी सुविधा

नई योजना की एक महत्वपूर्ण पहल Fodder Bank Development है। इसके माध्यम से जरूरत के समय पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। जिला प्रशासन Farmer Producer Organisation (FPO), किसान उत्पादक कंपनियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से चारा बैंक स्थापित कर सकेगा।

सरकार कृषि विश्वविद्यालयों, बीज उत्पादन केंद्रों और पशुपालन विभाग की उपलब्ध जमीन पर चारा उगाने की संभावनाएं भी तलाश रही है। इससे स्थानीय स्तर पर चारा उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।

कम पानी वाली चारा फसलों को मिलेगा बढ़ावा

रबी सीजन में चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कृषि विभाग को पर्याप्त Fodder Seeds सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली और एक से अधिक कटाई देने वाली चारा फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। क्षेत्र की जलवायु और सिंचाई सुविधा के अनुसार जई, बरसीम, चारा ज्वार तथा अन्य उपयुक्त फसलों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि फसल का चुनाव स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह से करना बेहतर होगा। इसके अलावा Hydroponic Fodder और Azolla Cultivation जैसी तकनीकों को भी बढ़ावा देने की योजना है। इन तरीकों को पशुओं के संतुलित आहार के पूरक के रूप में अपनाया जा सकता है।

दूसरे राज्यों में चारा भेजने पर प्रतिबंध

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।सूखे की स्थिति में चारे का उपयोग पशु आहार के बजाय पैकेजिंग, Biofuel और बिजली उत्पादन जैसे दूसरे कार्यों के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।इसके अलावा सूखा प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों से पड़ोसी राज्यों में चारा भेजने पर कानूनी रोक लगाने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए गए हैं।यदि किसी जिले में चारे की कमी होती है, तो संबंधित अधिकारी दूसरे जिलों से आपूर्ति की व्यवस्था करेंगे।

पशु शिविरों की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था

सरकार ने चारा छावनियों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए Chara Chawani Monitoring and Management System विकसित करने का निर्णय लिया है।  इस Digital Monitoring System में पशुओं की संख्या, चारे की उपलब्धता, दैनिक उपस्थिति, पशु चिकित्सा सुविधाओं और खर्च की जानकारी दर्ज की जाएगी।शिविरों में CCTV तथा Biometric या QR Code आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पशुओं का सत्यापन भारत पशुधन प्रणाली से किया जाएगा।

किसानों और डेयरी पशुपालकों को क्या फायदा होगा?

इस फैसले का सबसे बड़ा संभावित लाभ उन छोटे और मध्यम पशुपालकों को मिलेगा, जिनकी आजीविका दूध उत्पादन और पशुपालन पर निर्भर है।स्थानीय चारा बैंक बनने से चारे की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। वहीं, सरकारी खरीद और भंडारण की योजनाएं सूखे के दौरान आपूर्ति बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

पशुपालकों को अपने क्षेत्र की योजनाओं की जानकारी जिला पशुपालन कार्यालय, कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन से लेनी चाहिए। फिलहाल इस निर्णय को प्रत्येक पशुपालक के खाते में सीधे धनराशि भेजने वाली योजना नहीं समझना चाहिए।महाराष्ट्र सरकार का जिला फंड का 5 प्रतिशत हिस्सा चारे पर खर्च करने का फैसला सूखा प्रभावित पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे चारा उत्पादन, भंडारण और वितरण की व्यवस्था मजबूत करने का अवसर मिलेगा।हालांकि इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिला स्तर पर कितनी जल्दी चारा बैंक तैयार होते हैं, किसानों को उचित समय पर सहायता मिलती है और उपलब्ध धनराशि का सही उपयोग होता है।

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