ओडिशा में समुद्री मत्स्य अवसंरचना को मिली नई रफ्तार, ₹1,086 करोड़ की परियोजनाओं से मछुआरों की आय और Seafood Export को मिलेगा बढ़ावा

Marine fisheries infrastructure gains new momentum in Odisha

जिलों में लगातार बढ़ रहा निवेश

जिलों में लगातार बढ़ रहा निवेश

भारत सरकार देश में Marine Fisheries, Blue Economy और Seafood Export को बढ़ावा देने के लिए लगातार बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। इसी दिशा में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PM Matsya Sampada Yojana – PMMSY) के तहत ओडिशा में समुद्री मत्स्य अवसंरचना (Marine Fisheries Infrastructure) को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य आधुनिक Fishing Harbours, Fish Landing Centres, Cold Chain Infrastructure, Fish Processing Units और बाजार सुविधाओं का विकास करना है, ताकि मछुआरों की आय बढ़े, मत्स्य उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) हो और निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत हो।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 से लागू PM Matsya Sampada Yojana के तहत ओडिशा राज्य के लिए 1,086.51 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें 416.84 करोड़ रुपये केंद्र सरकार का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त पारादीप Fishing Harbour के आधुनिकीकरण के लिए 108.91 करोड़ रुपये की अलग परियोजना को भी स्वीकृति दी गई है।

PM Matsya Sampada Yojana से Fisheries Sector को मिल रही मजबूती

भारत सरकार ने 20,750 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) शुरू की है। इसका उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक मत्स्य अवसंरचना तैयार करना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना और भारत को वैश्विक Seafood Export Hub के रूप में विकसित करना है।

योजना के तहत Fishing Harbour, Fish Landing Centre (FLC), Cold Chain, Ice Plant, Fish Processing Unit, Fish Market, Refrigerated Transport और अन्य आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। इससे समुद्री मत्स्य क्षेत्र में गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार तक पहुंच में सुधार हो रहा है।

ओडिशा में ₹1,086 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी

सरकार ने बताया कि ओडिशा में PMMSY के अंतर्गत कुल 1,086.51 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 416.84 करोड़ रुपये केंद्र सरकार का अंश है। इसके अलावा 108.91 करोड़ रुपये की लागत से Paradip Fishing Harbour के आधुनिकीकरण को भी स्वीकृति दी गई है, जिससे समुद्री मत्स्य गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

FIDF के तहत भी मिल रहा वित्तीय सहयोग

मत्स्य पालन विभाग वर्ष 2018-19 से Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund (FIDF) भी संचालित कर रहा है। इस योजना के तहत मत्स्य क्षेत्र की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए रियायती वित्त उपलब्ध कराया जाता है।

ओडिशा में अब तक 13 Fisheries Infrastructure Projects को 784.32 करोड़ रुपये की परियोजना लागत पर मंजूरी दी गई है। इनमें से 286.39 करोड़ रुपये की परियोजनाएं ब्याज सहायता (Interest Subvention) के लिए पात्र हैं। भारत सरकार इन परियोजनाओं पर 3 प्रतिशत तक ब्याज सहायता प्रदान करती है, जिससे निवेश की लागत कम होती है और निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलता है।

आधुनिक Cold Chain Infrastructure से मिलेगा लाभ

PMMSY के अंतर्गत ओडिशा में Cold Chain Infrastructure का तेजी से विस्तार किया गया है। सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक कुल 1,178 आधुनिक इकाइयों का निर्माण या उन्नयन किया गया है।

इनमें शामिल हैं—

इन सुविधाओं से मछलियों का सुरक्षित भंडारण, परिवहन और विपणन पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हो सकेगा। इससे कटाई के बाद होने वाला नुकसान कम होगा और मछुआरों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

मछुआरों के कल्याण पर विशेष ध्यान

PM Matsya Sampada Yojana केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मछुआरों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण पर भी विशेष जोर देती है।

योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के सक्रिय पारंपरिक समुद्री मछुआरा परिवारों को वार्षिक मत्स्यन प्रतिबंध अवधि के दौरान आजीविका एवं पोषण सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा दुर्घटना बीमा, मछली पकड़ने वाली नौकाओं और जालों की खरीद, Deep Sea Fishing Vessels के उन्नयन, Mariculture, Seaweed Farming, Pearl Culture, Ornamental Fisheries तथा आधुनिक मत्स्य तकनीकों पर प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना से अतिरिक्त सहायता

ओडिशा सरकार ने राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना (MMKY) लागू की है। इसके तहत अधिसूचित मत्स्य प्रतिबंध क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक पात्र समुद्री मछुआरा परिवार को 1 नवंबर से 31 मई तक की वार्षिक कछुआ संरक्षण मत्स्यन प्रतिबंध अवधि के दौरान 15,000 रुपये की आजीविका सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता मछुआरों की आय में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Deep Sea Fishing और Blue Economy पर फोकस

ओडिशा सरकार ने State Deep Sea Fishing Mission (2026–2036) की शुरुआत की है। इस मिशन का उद्देश्य अपतटीय मत्स्यन, आधुनिक मत्स्य तकनीकों, Tuna Fisheries, Mariculture और Blue Economy को बढ़ावा देना है।

इसके साथ ही राज्य सरकार Deep Sea Fishing Vessels को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है तथा आधुनिक Fishing Technology अपनाने के लिए मछुआरों को प्रशिक्षण भी दे रही है।

Fish Processing और Value Addition को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि केवल मछली उत्पादन बढ़ाने से आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है। इसलिए Fish Processing, Packaging, Cold Chain, Fish Market Modernization और Export Infrastructure पर भी विशेष निवेश किया जा रहा है।

स्वच्छ मछली प्रबंधन, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से Seafood की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है।

VMS से बढ़ेगी समुद्री सुरक्षा

समुद्र में सुरक्षा और निगरानी को मजबूत बनाने के लिए मशीनीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों में Transponder आधारित Vessel Monitoring System (VMS) स्थापित किया जा रहा है। इससे जहाजों की रियल-टाइम निगरानी, समुद्री सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन बेहतर होगा। साथ ही कछुआ बहिष्करण उपकरण (TED) और टिकाऊ मत्स्यन पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

झींगा उद्योग को भी मिलेगा प्रोत्साहन

ओडिशा सरकार ने Aquaculture and Shrimp Export Cell की स्थापना की है। इसके अंतर्गत Seafood Processing Units में Plant एवं Machinery की स्थापना के लिए सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 30 प्रतिशत (अधिकतम 3.5 करोड़ रुपये) तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, दिव्यांगजनों और अन्य पात्र लाभार्थियों को 35 प्रतिशत (अधिकतम 4 करोड़ रुपये) तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अतिरिक्त White-leg Shrimp Farming के लिए नया नियामक ढांचा भी अधिसूचित किया गया है, जिससे राज्य की झींगा उत्पादन क्षमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होने की उम्मीद है।

जिलों में लगातार बढ़ रहा निवेश

राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान ओडिशा के विभिन्न जिलों में मत्स्य विकास परियोजनाओं पर लगातार निवेश किया गया है। इन परियोजनाओं में अवसंरचना निर्माण, मत्स्य पालन सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता तथा मछुआरों के लिए विभिन्न सहायता कार्यक्रम शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PM Matsya Sampada Yojana) ओडिशा के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। ₹1,086.51 करोड़ की स्वीकृत परियोजनाएं, Paradip Fishing Harbour का आधुनिकीकरण, 784.32 करोड़ रुपये की FIDF परियोजनाएं, 1,178 आधुनिक Cold Chain इकाइयां, Deep Sea Fishing Mission, Blue Economy पर फोकस और मछुआरों के लिए व्यापक कल्याणकारी योजनाएं इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती हैं। इन पहलों से न केवल मछुआरों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि Fish Processing, Seafood Export, Value Addition और भारत की वैश्विक समुद्री खाद्य प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत आधार मिलेगा।

 

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