सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे: 30 करोड़ लोगों को मिली नई ऊर्जा, 2047 तक ‘समृद्ध भारत’ की मजबूत नींव बनेगा सहकारिता आंदोलन : अमित शाह

Ministry of Cooperation completes five years: 30 crore people get new energy

सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता क्षेत्र ने नई दिशा और नई गति प्राप्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद देश के लगभग 30 करोड़ सहकारिता सदस्यों और 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने केवल नीतियां बनाने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि सहकारी क्षेत्र की दशकों पुरानी समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया और पूरे तंत्र को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम तथा प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और मुरलीधर मोहोल, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव आतिश चंद्र, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार सहित विभिन्न राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं, डेयरी संघों, सहकारी बैंकों और पैक्स के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

पांच वर्षों में बदली सहकारिता की तस्वीर

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय का गठन भारतीय सहकारिता आंदोलन के इतिहास में एक ऐतिहासिक निर्णय था। इससे पहले लगभग 75 वर्षों तक सहकारिता का कार्य कृषि मंत्रालय के अंतर्गत सीमित स्तर पर संचालित होता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे स्वतंत्र मंत्रालय का दर्जा देकर सहकारिता को नई पहचान और नई दिशा प्रदान की।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय के गठन के समय कुछ लोगों ने यह आशंका जताई थी कि केंद्र सरकार राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करेगी, लेकिन पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की। इससे स्पष्ट हो गया कि मंत्रालय का उद्देश्य राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि नीति निर्माण, तकनीकी सहयोग और संस्थागत विकास के माध्यम से सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना है।

आधुनिक और तकनीक-सक्षम बना सहकारी तंत्र

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने पिछले पांच वर्षों में सहकारी संस्थाओं को आधुनिक और डिजिटल स्वरूप देने पर विशेष ध्यान दिया। आज देशभर की 8.58 लाख से अधिक सहकारी समितियों और 32 करोड़ से अधिक सदस्यों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा चुका है। इस डेटाबेस में प्रत्येक संस्था की कार्यप्रणाली, ऑडिट स्थिति, कारोबार और ग्रेडिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

इस व्यवस्था से राज्य सरकारों और सहकारी रजिस्ट्रारों को यह पता चल सकेगा कि किन क्षेत्रों में नई सहकारी समितियों की आवश्यकता है तथा किन संस्थाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है। इससे योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में मदद मिलेगी।

नौ राष्ट्रीय सहकारी समितियों का गठन

अमित शाह ने कहा कि मंत्रालय ने कृषि, डेयरी, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स, जैविक खेती, निर्यात, बीज उत्पादन, मोबिलिटी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को जोड़ते हुए नौ राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों का गठन किया है। इन संस्थाओं के माध्यम से गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सहकारिता का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दस वर्षों में ये संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की अग्रणी सहकारी संस्थाओं के रूप में स्थापित होंगी, जिस प्रकार इफको, कृभको और अमूल ने वैश्विक पहचान बनाई है।

किसानों को मिलेगा वैश्विक बाजार

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि मंत्रालय का उद्देश्य किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है। इसी सोच के तहत निर्यात, जैविक खेती और बीज उत्पादन के लिए नई सहकारी संस्थाओं का गठन किया गया है।

उन्होंने बताया कि भारत बीज सहकारी समिति अगले तीन वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादन कंपनी बनने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रत्येक राज्य में नई इकाइयां स्थापित कर किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध और उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। केले, पपीते और आलू जैसी फसलों के लिए टिश्यू कल्चर आधारित पौधों और आधुनिक बीजों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

पैक्स का तेजी से आधुनिकीकरण

अमित शाह ने बताया कि सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की लागत से देशभर के प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण का कार्य शुरू किया है। अब तक लगभग 50 हजार पैक्स पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं और ई-पैक्स के रूप में कार्य कर रहे हैं।

आज 55 हजार पैक्स के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की 300 से अधिक सेवाएं ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं। इसके अतिरिक्त 39 हजार पैक्स किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किए गए हैं, जबकि 639 जन औषधि केंद्र भी पैक्स के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। कई पैक्स पेट्रोल पंप, जलापूर्ति योजनाओं और अन्य ग्रामीण सेवाओं का संचालन भी कर रहे हैं।

सहकारी बैंकों में बढ़ा कारोबार

सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, ई-केवाईसी और डिजिटल ऋण जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। इसके परिणामस्वरूप जिला सहकारी बैंकों का कुल कारोबार 19.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

उन्होंने बताया कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों का लाभ लगभग दोगुना हुआ है, जबकि सकल एनपीए और शुद्ध एनपीए में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में जनता का विश्वास पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है।

प्रोफेशनल प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा

सहकारिता क्षेत्र में पेशेवर प्रबंधन विकसित करने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। यहां बैंकिंग, डेयरी, कृषि, विपणन, उर्वरक और सहकारिता के विभिन्न क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे।

अमित शाह ने कहा कि योग्य और प्रशिक्षित पेशेवरों की नियुक्ति से सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेही बढ़ेगी। इससे नियुक्तियों में होने वाली अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सहकारिता मॉडल के माध्यम से जैविक खेती, गोबर प्रबंधन, जैविक खाद, सर्कुलर इकोनॉमी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को भी जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने सहकारिता क्षेत्र में 70 हजार करोड़ रुपये का नया निवेश किया है, जिससे सहकारी संस्थाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी का भी मजबूत माध्यम है। इससे किसानों, ग्रामीण महिलाओं और छोटे उद्यमियों को सामूहिक शक्ति के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

2047 के भारत की मजबूत नींव बनेगा सहकारिता आंदोलन

अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब समृद्ध भारत की सबसे मजबूत नींव सहकारिता आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किए गए सुधारों ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से सहकारिता आंदोलन देश के ग्रामीण विकास, कृषि क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में मंत्रालय का प्रयास रहेगा कि सहकारिता के लाभ देश के प्रत्येक गांव और प्रत्येक किसान तक पहुंचे।

Exit mobile version