एमएसडीई ने आईटीआई उन्नयन की राष्ट्रीय योजना पर कार्यशाला का आयोजन किया

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आज कौशल भवन, नई दिल्ली में “आईटीआई उन्नयन की राष्ट्रीय योजना” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। साथ ही एमएसडीई, डीजीटी, एनसीवीईटी और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी तथा विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हाल ही में शुरू की गई राष्ट्रीय आईटीआई उन्नयन योजना की प्रभावी क्रियान्वयन रणनीति पर चर्चा करना और राज्य सरकारों से इस संबंध में आवश्यक फीडबैक प्राप्त करना था। एमएसडीई के सचिव रजित पुनहानी ने इस अवसर पर कहा कि सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को शीघ्र लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्यों से सक्रिय भागीदारी की अपील की और कहा कि यह योजना सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें सरकारी स्वामित्व वाले, उद्योग प्रबंधित कौशल संस्थानों को एक नए ढांचे के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। उन्होंने राज्यों से अनुरोध किया कि वे ऐसे आईटीआई क्लस्टर की पहचान करें जिन्हें हब एंड स्पोक मॉडल के तहत विकसित किया जा सके और संभावित एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स (AIPs) के साथ सक्रिय रूप से संवाद स्थापित करें।

एमएसडीई की विशेष सचिव एवं महानिदेशक (प्रशिक्षण) सुश्री त्रिशलजीत सेठी ने योजना की प्रमुख विशेषताओं को साझा किया और उद्योग भागीदारों की भूमिका को योजना की सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।आर्थिक सलाहकार श्रीमती अर्चना मायराम ने कार्यशाला के उद्देश्य और आगामी दिशा की रूपरेखा प्रस्तुत की। डीजीटी द्वारा योजना के मसौदे और दिशा-निर्देशों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिस पर राज्यों से सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त की गईं।

इसके अलावा एनसीवीईटी की भूमिका, उद्यमिता को योजना से जोड़ना, राष्ट्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता नीति का मसौदा, तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्किलिंग जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। कार्यशाला में नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) में सुझाए गए शिक्षा और व्यवसायिक प्रशिक्षण के एकीकरण पर भी विचार किया गया।राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों के कौशल एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र की जानकारी साझा की, प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया और उन क्षेत्रों की पहचान की जहां मंत्रालय से सहायता अपेक्षित है। एमएसडीई और डीजीटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्यों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए उन्हें हर संभव सहयोग और मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय आईटीआई उन्नयन योजना को मई 2025 में अनुमोदित किया गया था, जिसे केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित किया गया था। इस योजना के अंतर्गत देशभर के 1000 सरकारी आईटीआई संस्थानों को हब एंड स्पोक मॉडल में अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई होंगे। प्रत्येक हब आईटीआई से औसतन 4 स्पोक संस्थानों को जोड़ा जाएगा। सभी संस्थानों को अत्याधुनिक मशीनरी, उपकरण और आधारभूत संरचना से सुसज्जित किया जाएगा।

कार्यशाला का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ जिसमें सभी प्रतिभागियों ने देश में कौशल और उद्यमिता के क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई। एमएसडीई ने राज्यों को सतत मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया ताकि यह योजना सफलतापूर्वक धरातल पर उतारी जा सके।

 

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