PM-KISAN की 23वीं किस्त के हस्तांतरण कार्यक्रम का कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा में हुआ सीधा प्रसारण

The live broadcast of the event for the transfer of the 23rd installment of the PM-Kisan scheme was held at Krishi Vigyan Kendra, Ujwa.

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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त के हस्तांतरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आज कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), उजवा, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्रधानमंत्री द्वारा किसानों के खातों में जारी की गई सम्मान निधि की किस्त का सीधा प्रसारण देखा। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं से अवगत कराना तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक बनाना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF), नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. बिजेन्द्र सिंह तथा दिल्ली नगर निगम (नजफगढ़ जोन) के उपाध्यक्ष श्री बांके पहलवान उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीनतम परिवर्तनों और सरकारी योजनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए आर्थिक संबल का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से किसानों को प्रतिवर्ष वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे कृषि कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कर सकें। उन्होंने किसानों से कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

डॉ. सिंह ने खरीफ मौसम की तैयारियों पर विशेष जोर देते हुए किसानों को उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग, समय पर बुवाई तथा कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को ऐसी तकनीकों को अपनाना चाहिए जो फसल उत्पादन को सुरक्षित और लाभकारी बना सकें।

कार्यक्रम में उपस्थित श्री बांके पहलवान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पीएम-किसान जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी खेती-किसानी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने तथा कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर किसान अपनी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा द्वारा किसान उत्सव सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती, प्राकृतिक खेती, पोषण प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि स्वस्थ मृदा ही बेहतर उत्पादन की आधारशिला है और मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके खेती की लागत को घटाया जा सकता है। साथ ही, इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के माध्यम से टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

पोषण प्रबंधन विषय पर विशेषज्ञों ने बताया कि फसलों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह दी गई।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से विभिन्न कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा की तथा उनके समाधान प्राप्त किए। किसानों को जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग और मौसम आधारित कृषि प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती की रणनीतियां अप…

नई दिल्ली, 23 जून 2026। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त के हस्तांतरण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आज कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), उजवा, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्रधानमंत्री द्वारा किसानों के खातों में जारी की गई सम्मान निधि की किस्त का सीधा प्रसारण देखा। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं से अवगत कराना तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक बनाना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF), नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. बिजेन्द्र सिंह तथा दिल्ली नगर निगम (नजफगढ़ जोन) के उपाध्यक्ष श्री बांके पहलवान उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीनतम परिवर्तनों और सरकारी योजनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए आर्थिक संबल का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से किसानों को प्रतिवर्ष वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे कृषि कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कर सकें। उन्होंने किसानों से कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

डॉ. सिंह ने खरीफ मौसम की तैयारियों पर विशेष जोर देते हुए किसानों को उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग, समय पर बुवाई तथा कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को ऐसी तकनीकों को अपनाना चाहिए जो फसल उत्पादन को सुरक्षित और लाभकारी बना सकें।

कार्यक्रम में उपस्थित श्री बांके पहलवान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में किसानों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पीएम-किसान जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी खेती-किसानी को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने तथा कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर किसान अपनी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा द्वारा किसान उत्सव सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती, प्राकृतिक खेती, पोषण प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि स्वस्थ मृदा ही बेहतर उत्पादन की आधारशिला है और मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके खेती की लागत को घटाया जा सकता है। साथ ही, इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के माध्यम से टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

पोषण प्रबंधन विषय पर विशेषज्ञों ने बताया कि फसलों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह दी गई।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से विभिन्न कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा की तथा उनके समाधान प्राप्त किए। किसानों को जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग और मौसम आधारित कृषि प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती की रणनीतियां अप…

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, उजवा द्वारा किसान उत्सव सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत खेती, प्राकृतिक खेती, पोषण प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि स्वस्थ मृदा ही बेहतर उत्पादन की आधारशिला है और मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करके खेती की लागत को घटाया जा सकता है। साथ ही, इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के माध्यम से टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

पोषण प्रबंधन विषय पर विशेषज्ञों ने बताया कि फसलों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह दी गई।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से विभिन्न कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा की तथा उनके समाधान प्राप्त किए। किसानों को जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग और मौसम आधारित कृषि प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती की रणनीतियां अप…

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