समय से पहले धान बोना पड़ा भारी! करनाल में प्रशासन का बड़ा एक्शन, ट्रैक्टर चलाकर नष्ट की फसल

Premature paddy sowing proved costly! Administration takes major action in Karnal, destroying crops with tractors.

हरियाणा के करनाल जिले में गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए समय से पहले लगाई गई धान की फसल (Paddy Farming)  पर बड़ी कार्रवाई की है. कृषि विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ संगोहा गांव और आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी कर उन खेतों की पहचान की, जहां किसानों ने तय समय से पहले धान की पौध तैयार कर दी थी. प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक्टर चलवाकर और स्प्रे कर फसल को नष्ट कर दिया.

जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई ‘हरियाणा प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सॉइल वाटर एक्ट-2009’ के तहत की गई. इस कानून का उद्देश्य भूजल स्तर को बचाना है. हरियाणा सरकार ने धान की रोपाई और नर्सरी तैयार करने के लिए एक तय समय सीमा निर्धारित की है ताकि अत्यधिक पानी की खपत को नियंत्रित किया जा सके. इसके बावजूद कई किसान जल्दी फसल तैयार कर अधिक उत्पादन और जल्दी कमाई की उम्मीद में नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि करनाल समेत कई जिलों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है. धान की खेती में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है और यदि समय से पहले रोपाई शुरू हो जाए तो भूजल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है. इसी को देखते हुए सरकार ने इस बार निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी हैं.

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने ड्रोन और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद से उन खेतों की पहचान की जहां धान (Paddy Farming)  की पौध तैयार की गई थी. इसके बाद प्रशासनिक टीम ने पुलिस की मौजूदगी में खेतों में पहुंचकर कार्रवाई की. कई किसानों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन अधिकारियों ने साफ कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा में तेजी से गिरता भूजल आने वाले समय में खेती के लिए बड़ा संकट बन सकता है. राज्य के कई हिस्सों में भूजल स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुका है. ऐसे में धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की समयबद्ध खेती बेहद जरूरी हो गई है. सरकार किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर भी प्रोत्साहित कर रही है, ताकि पानी की बचत हो सके.

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे तय तारीख से पहले धान की नर्सरी या रोपाई न करें. साथ ही चेतावनी दी गई है कि भविष्य में भी नियम तोड़ने वालों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. अधिकारियों का कहना है कि भूजल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसानों और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है.

Exit mobile version