रबी 2026-27 सीजन की शुरुआत भारत ने पिछले साल की तुलना में मजबूत उर्वरक भंडार के साथ की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रबी सीजन की शुरुआत में देश का कुल उर्वरक स्टॉक करीब 1.701 करोड़ टन रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 38 प्रतिशत अधिक है। खाद के कुल भंडार में हुई यह बढ़ोतरी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब रबी फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है और आने वाले महीनों में उर्वरकों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
कुल स्टॉक में यूरिया की स्थिति विशेष रूप से मजबूत बताई गई है। रबी की शुरुआत में यूरिया का स्टॉक 54.26 प्रतिशत बढ़कर करीब 83.3 लाख टन पहुंच गया। वहीं, DAP का स्टॉक करीब 30.3 लाख टन बताया गया है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि रबी सीजन के शुरुआती चरण में देश में प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
1.70 करोड़ टन का मजबूत शुरुआती भंडार
रबी सीजन की शुरुआत से पहले उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। फसल की बुवाई के समय किसानों को अलग-अलग पोषक तत्वों वाले उर्वरकों की जरूरत होती है। ऐसे में यदि खाद की उपलब्धता पहले से मजबूत रहती है तो बुवाई के दौरान अचानक आपूर्ति दबाव बनने की संभावना कम हो सकती है।
इस बार करीब 1.701 करोड़ टन का कुल उर्वरक स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। यानी रबी 2026-27 की शुरुआत में देश के पास पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा खाद उपलब्ध है।
हालांकि, यह शुरुआती स्टॉक पूरे रबी सीजन की जरूरत को पूरा करने की गारंटी नहीं है। रबी की बुवाई आगे बढ़ने के साथ उर्वरकों की खपत भी बढ़ेगी। इसलिए आने वाले महीनों में नई आपूर्ति, राज्यों की मांग और वितरण व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
यूरिया स्टॉक में 54.26 प्रतिशत की बढ़ोतरी
कुल उर्वरक स्टॉक में सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर यूरिया की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रबी सीजन की शुरुआत में यूरिया का स्टॉक 54.26 प्रतिशत बढ़कर 83.3 लाख टन हो गया।
पिछले साल की तुलना में यूरिया भंडार में इतनी बड़ी बढ़ोतरी किसानों और सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यूरिया देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में शामिल है और इसकी मांग रबी सीजन में भी काफी रहती है।
यूरिया की उपलब्धता को लेकर किसानों में अक्सर चिंता रहती है, खासकर उस समय जब किसी क्षेत्र में मांग अचानक बढ़ जाती है। ऐसे में शुरुआती स्टॉक का पिछले साल से काफी अधिक होना आपूर्ति व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत देता है।
लेकिन आगे चलकर इसकी खपत कितनी तेजी से होती है, यह रबी फसलों के क्षेत्र, किसानों की मांग और राज्यों की उठान पर निर्भर करेगा।
DAP का स्टॉक भी मजबूत
रबी सीजन की शुरुआत में DAP का स्टॉक करीब 30.3 लाख टन बताया गया है। DAP रबी फसलों के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक है। इसकी उपलब्धता को लेकर बुवाई के समय किसानों की विशेष नजर रहती है।
देश में DAP का शुरुआती स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर स्थिति में बताया गया है। इससे रबी बुवाई के शुरुआती चरण में DAP की उपलब्धता को लेकर राहत मिल सकती है।
हालांकि DAP के मामले में केवल स्टॉक ही महत्वपूर्ण नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें, आयात लागत, कच्चे माल की कीमत और सरकार की सब्सिडी व्यवस्था भी इसकी आपूर्ति और लागत को प्रभावित करती है।
इसलिए मजबूत स्टॉक के बावजूद आगे DAP की लगातार आपूर्ति बनाए रखना जरूरी होगा।
रबी सीजन में खाद की मांग क्यों बढ़ती है?
रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना और अन्य फसलों की खेती बड़े स्तर पर होती है। इन फसलों के लिए किसानों को फसल की जरूरत के अनुसार अलग-अलग उर्वरकों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
बुवाई के समय खाद की उपलब्धता विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। किसान खेत की तैयारी और बुवाई का काम एक निर्धारित समय में पूरा करना चाहते हैं। यदि खाद समय पर उपलब्ध नहीं होती तो बुवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से रबी सीजन शुरू होने से पहले सरकार उर्वरकों के स्टॉक और राज्यों की मांग पर नजर रखती है। इस बार 1.701 करोड़ टन का शुरुआती स्टॉक पिछले साल की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
स्टॉक बढ़ने से किसानों को क्या फायदा?
उर्वरक का मजबूत शुरुआती स्टॉक किसानों के लिए कई मायनों में राहत देने वाला हो सकता है। सबसे पहले, बुवाई के समय खाद की तत्काल उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। दूसरा, राज्यों और वितरण केंद्रों के पास पर्याप्त स्टॉक रहने से अचानक पैदा होने वाली मांग को संभालना आसान हो सकता है।
तीसरा, यदि पूरे सीजन में नई खेप लगातार आती रहती है तो बाजार में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव कम रह सकता है।
हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर स्टॉक बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जिले में किसानों को बिना किसी परेशानी के खाद मिल जाएगी। इसके लिए राज्यों के बीच और राज्य के भीतर वितरण व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है।
राज्यों की मांग पर रहेगी नजर
रबी सीजन के दौरान अलग-अलग राज्यों में उर्वरकों की मांग अलग-अलग होती है। जिन राज्यों में गेहूं और अन्य रबी फसलों का क्षेत्र अधिक है, वहां खाद की मांग भी ज्यादा रहती है।
इसलिए कुल राष्ट्रीय स्टॉक के साथ राज्यों की मांग और उनकी उठान भी महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी राज्य में मांग तेजी से बढ़ती है तो वहां अतिरिक्त आपूर्ति भेजने की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि मजबूत राष्ट्रीय स्टॉक को किसानों तक समय पर पहुंचाया जाए। गोदामों में खाद उपलब्ध होने के बावजूद यदि परिवहन या वितरण में देरी होती है तो स्थानीय स्तर पर किसानों को परेशानी हो सकती है।
मजबूत स्टॉक के साथ लागत की चुनौती
उर्वरक स्टॉक की स्थिति बेहतर होने के बावजूद खाद क्षेत्र के सामने लागत से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में DAP और अन्य उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारत की आयात लागत पर पड़ता है।
सरकार किसानों को उर्वरक उचित कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी देती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने की स्थिति में सरकारी सब्सिडी पर भी दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे में रबी सीजन की शुरुआत में मजबूत स्टॉक निश्चित रूप से सकारात्मक है, लेकिन आने वाले महीनों में कीमत और सब्सिडी दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा।
पूरे सीजन में आपूर्ति बनाए रखना जरूरी
1.701 करोड़ टन का शुरुआती स्टॉक रबी सीजन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। लेकिन रबी की मांग कई महीनों तक बनी रहती है। जैसे-जैसे फसलों की बुवाई और आगे की कृषि गतिविधियां बढ़ेंगी, उर्वरकों की खपत भी बढ़ती जाएगी।
इसलिए सरकार और उर्वरक कंपनियों को शुरुआती स्टॉक के साथ-साथ आगे की आपूर्ति की भी योजना बनानी होगी। यूरिया की बड़ी मात्रा में उपलब्धता के साथ DAP और अन्य उर्वरकों की जरूरत के अनुसार आपूर्ति बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
किसानों के लिए शुरुआती तस्वीर सकारात्मक
कुल मिलाकर रबी 2026-27 की शुरुआत में देश का उर्वरक स्टॉक पिछले साल की तुलना में मजबूत स्थिति में है। कुल स्टॉक करीब 1.701 करोड़ टन रहा, जो पिछले वर्ष से लगभग 38 प्रतिशत ज्यादा है।
यूरिया का स्टॉक 54.26 प्रतिशत बढ़कर 83.3 लाख टन और DAP का स्टॉक करीब 30.3 लाख टन बताया गया है। ये आंकड़े रबी सीजन की शुरुआत में खाद की उपलब्धता को लेकर सकारात्मक संकेत देते हैं।
अब सबसे बड़ी चुनौती इस मजबूत शुरुआती स्थिति को पूरे रबी सीजन में बनाए रखने की होगी। किसानों की मांग बढ़ने के साथ स्टॉक की खपत तेज होगी। इसलिए समय पर नई आपूर्ति, राज्यों में संतुलित वितरण और स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रबंधन जरूरी होगा।
यदि मौजूदा मजबूत स्टॉक के साथ आगे भी उर्वरकों की नियमित आपूर्ति बनी रहती है, तो रबी 2026-27 में किसानों को खाद की उपलब्धता के मोर्चे पर पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर स्थिति मिल सकती है। फिलहाल, 1.70 करोड़ टन से अधिक का शुरुआती भंडार रबी सीजन के लिए खाद आपूर्ति व्यवस्था का एक मजबूत आधार जरूर तैयार करता है।

