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Home कृषि समाचार

Rajasthan Farmer ID: 90.19 लाख किसानों की डिजिटल पहचान, उत्तर भारत में बना नंबर-1 राज्य

Rajasthan Farmer ID: Digital identity for 9.019 million farmers; becomes the number one state in North India.

Fiza by Fiza
September 30, 2026
in कृषि समाचार
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Rajasthan Farmer ID

Rajasthan Farmer ID

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Rajasthan Farmer ID:  राजस्थान ने कृषि क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से निर्धारित 90.19 लाख Farmer ID बनाने का लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही राजस्थान 100 प्रतिशत निर्धारित लक्ष्य पूरा करने वाला उत्तर भारत का पहला राज्य और देश का छठा राज्य बन गया है। राजस्थान सरकार ने 28 सितंबर 2026 को इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी जारी की।

यह उपलब्धि केवल Farmer ID की संख्या तक सीमित नहीं है। इसके पीछे देश में तैयार हो रहे डिजिटल कृषि ढांचे, यानी AgriStack, का बड़ा उद्देश्य है। इसके जरिए किसान की पहचान, उसकी कृषि भूमि और फसल से संबंधित सत्यापित जानकारियों को आपस में जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

राजस्थान में Farmer ID को आधार, जन आधार, भूमि रिकॉर्ड और विभिन्न कृषि सेवाओं से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं को किसानों तक अधिक व्यवस्थित और लक्षित तरीके से पहुंचाने में मदद करना है।

Rajasthan Farmer ID क्या है?

Rajasthan Farmer ID एक डिजिटल किसान पहचान है, जिसे AgriStack के Farmer Registry सिस्टम के तहत तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसान से संबंधित अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड को एक प्रमाणित डिजिटल पहचान से जोड़ना है।

सरल शब्दों में समझें तो जैसे किसी व्यक्ति की पहचान के लिए आधार नंबर का इस्तेमाल किया जाता है, उसी तरह कृषि व्यवस्था में Farmer ID किसान से संबंधित भूमि और कृषि रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। केंद्र सरकार के मुताबिक AgriStack के अंतर्गत बनाई जा रही Farmer Registry में भूमिधारक किसानों को डिजिटल Farmer ID प्रदान की जाती है। सिस्टम में किरायेदार और बटाईदार किसानों को शामिल करने का भी प्रावधान मौजूद है, हालांकि ऐसे किसानों को शामिल करने से संबंधित नीतिगत निर्णय राज्य स्तर पर लिए जा सकते हैं।

Farmer ID का उपयोग भविष्य में किसान की पहचान सत्यापित करने, सरकारी योजनाओं की पात्रता जांचने, भूमि संबंधी रिकॉर्ड से जानकारी मिलाने और कृषि सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने में किया जा सकता है।

राजस्थान ने 90.19 लाख Farmer ID का लक्ष्य किया पूरा

केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राजस्थान के लिए 90.19 लाख Farmer ID का लक्ष्य निर्धारित किया था। राजस्थान सरकार के अनुसार सितंबर 2026 में राज्य ने यह लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल कर लिया। इसके बाद राजस्थान उत्तर भारत का पहला राज्य बना जिसने अपने लिए निर्धारित Farmer ID लक्ष्य का 100 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया। राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान ऐसा करने वाला छठा राज्य बताया गया है।

यह प्रगति पिछले कुछ महीनों में लगातार हुई है। उदाहरण के लिए, केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार 19 मार्च 2026 तक राजस्थान में करीब 83.39 लाख Farmer ID बनाई जा चुकी थीं। वहीं 20 जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 87.23 लाख हो गई थी। इसके बाद सितंबर 2026 में राज्य ने 90.19 लाख का निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया। इन आंकड़ों से साफ है कि Farmer ID Rajasthan अभियान में 2026 के दौरान लगातार नए किसानों को रजिस्ट्री से जोड़ा गया।

राजस्थान उत्तर भारत का पहला राज्य कैसे बना?

राजस्थान की इस उपलब्धि को समझने के लिए केवल कुल संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। उत्तर भारत के कई बड़े राज्यों में राजस्थान से अधिक Farmer ID पहले से बनाई जा चुकी थीं। उदाहरण के लिए, केंद्र सरकार के जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2.43 करोड़ से अधिक Farmer ID बन चुकी थीं। राजस्थान को उत्तर भारत का पहला राज्य इसलिए कहा गया है क्योंकि उसने केंद्र द्वारा अपने लिए निर्धारित Farmer ID लक्ष्य का 100 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया है, न कि इसलिए कि राजस्थान में उत्तर भारत की सबसे अधिक Farmer ID बनी हैं। यही अंतर इस खबर को समझने में महत्वपूर्ण है। राजस्थान सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक 90.19 लाख Farmer ID के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के साथ प्रदेश उत्तर भारत में पहला और देश में छठा राज्य बन गया। इसलिए “Rajasthan Farmer ID 90.19 lakh” उपलब्धि का संबंध लक्ष्य पूरा करने से है।

कृषि जोतों के मुकाबले Farmer ID की उपलब्धि करीब 118 प्रतिशत

राजस्थान सरकार ने Farmer ID के आंकड़ों की तुलना 2015-16 की कृषि गणना से भी की है।2015-16 की कृषि गणना के अनुसार राजस्थान में करीब 76.54 लाख operational holdings, यानी परिचालित कृषि जोतें दर्ज थीं। इसके मुकाबले Farmer ID की उपलब्धि लगभग 118 प्रतिशत तक पहुंच गई है। राज्य सरकार ने इस आधार पर राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर बताया है।

यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि operational holdings और Farmer ID दो अलग-अलग प्रकार के आंकड़े हैं। एक कृषि जोत से संबंधित है, जबकि दूसरी किसान की डिजिटल पहचान से। इसलिए 118 प्रतिशत के आंकड़े का अर्थ यह नहीं है कि राज्य में किसानों की संख्या अचानक 18 प्रतिशत बढ़ गई है। यह सरकार द्वारा Farmer ID की उपलब्धि की तुलना पुरानी कृषि गणना में दर्ज operational holdings से करने पर निकला अनुपात है।

AgriStack क्या है और Farmer ID से इसका क्या संबंध है?

AgriStack केंद्र सरकार की डिजिटल कृषि पहल का प्रमुख हिस्सा है। इसे कृषि क्षेत्र के लिए Digital Public Infrastructure के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसान, उसकी भूमि और फसल से जुड़ी डिजिटल जानकारी के लिए ऐसा ढांचा विकसित करना है, जिसका उपयोग विभिन्न कृषि सेवाओं और योजनाओं में किया जा सके। AgriStack में Farmer Registry एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी Farmer Registry के तहत Digital Farmer ID तैयार की जाती है।

राजस्थान सरकार के मुताबिक Farmer ID के जरिए किसान की विशिष्ट डिजिटल पहचान को उसकी कृषि भूमि से जोड़ा जा रहा है। साथ ही भूमि रिकॉर्ड और Crop Registry जैसी व्यवस्थाओं के बीच डिजिटल संबंध तैयार किया जा रहा है।केंद्र सरकार ने भी कहा है कि Farmer ID का इस्तेमाल PM-Kisan, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, MSP आधारित खरीद, कृषि ऋण, इनपुट वितरण और आपदा राहत जैसी व्यवस्थाओं के साथ डिजिटल एकीकरण के लिए किया जा सकता है। इसलिए Rajasthan Farmer Registry AgriStack केवल किसान पंजीकरण का कार्यक्रम नहीं है। यह एक बड़े डिजिटल कृषि नेटवर्क का हिस्सा है।

83 लाख Farmer ID को जन आधार से जोड़ा गया

राजस्थान में Farmer ID को राज्य के Jan Aadhaar database के साथ भी जोड़ा जा रहा है।राज्य सरकार की सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार करीब 83 लाख किसान जन आधार में Farmer ID के साथ seeded किए जा चुके हैं।जन आधार राजस्थान में परिवार और व्यक्ति से संबंधित कई सरकारी सेवाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण डेटाबेस है।Farmer ID और जन आधार के बीच एकीकरण का उद्देश्य किसान की डिजिटल पहचान और दूसरे सरकारी डेटाबेस के बीच बेहतर समन्वय बनाना है।यदि अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड आपस में सही तरीके से जुड़े रहते हैं, तो पात्र लाभार्थियों की पहचान में लगने वाला समय कम किया जा सकता है। साथ ही एक ही जानकारी बार-बार जमा करने की आवश्यकता भी भविष्य में कम हो सकती है।यही वजह है कि Farmer ID and Jan Aadhaar Rajasthan इस डिजिटल कृषि मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहे हैं।

PM-Kisan के करीब 50 लाख लाभार्थी Farmer ID से जुड़े

राजस्थान सरकार के अनुसार राज्य में PM-Kisan के करीब 50 लाख लाभार्थियों को Farmer ID के साथ जोड़ा जा चुका है।PM-Kisan देश की प्रमुख कृषि सहायता योजनाओं में शामिल है। Farmer ID के साथ इसका एकीकरण लाभार्थी के कृषि रिकॉर्ड और डिजिटल पहचान के बीच बेहतर समन्वय तैयार कर सकता है।केंद्र सरकार ने भी Farmer ID के उपयोग में PM-Kisan सहित कई Direct Benefit Transfer आधारित योजनाओं के एकीकरण का उल्लेख किया है।भविष्य में यदि किसान की पहचान, भूमि रिकॉर्ड और योजना से जुड़ी जानकारी एक डिजिटल सिस्टम के माध्यम से सत्यापित हो सके, तो आवेदन और पात्रता सत्यापन की कई प्रक्रियाएं आसान हो सकती हैं।

Farmer ID के दायरे में राजस्थान का 62 प्रतिशत बोया गया क्षेत्र

Farmer ID अभियान केवल किसानों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसका संबंध किसानों की कृषि भूमि से भी है।राजस्थान सरकार के अनुसार सितंबर 2026 तक राज्य के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा Farmer ID के अंतर्गत कवर हो चुका है।यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AgriStack में Farmer ID के साथ-साथ भूमि और फसल से जुड़ी जानकारी भी अहम भूमिका निभाती है।यदि किसी किसान की डिजिटल पहचान उसकी सत्यापित कृषि भूमि और संबंधित फसल रिकॉर्ड से जुड़ी है, तो कई कृषि सेवाओं में रिकॉर्ड के डिजिटल सत्यापन की क्षमता विकसित हो सकती है।हालांकि सिस्टम का वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि डेटा कितना अद्यतन और सही रहता है तथा किसानों की समस्याओं को सुधारने के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध रहती है।

राजस्थान के 99 प्रतिशत गांवों की Geo-Referencing पूरी

डिजिटल कृषि व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण पहलू Geo-Referencing है।राजस्थान सरकार के मुताबिक प्रदेश के करीब 99 प्रतिशत गांवों का Geo-Referencing कार्य पूरा किया जा चुका है।Geo-Referencing के जरिए भूमि से संबंधित रिकॉर्ड को भौगोलिक स्थान की जानकारी से डिजिटल रूप से जोड़ा जाता है।यह Digital Crop Survey और भूमि रिकॉर्ड आधारित कृषि सेवाओं के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे खेतों और भू-खंडों से संबंधित जानकारी को डिजिटल नक्शे और रिकॉर्ड के साथ व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।इसका उद्देश्य केवल नक्शा तैयार करना नहीं है, बल्कि भूमि और फसल संबंधी रिकॉर्ड में ज्यादा स्पष्टता लाना भी है।

2.72 करोड़ से अधिक भू-खंडों का Digital Crop Survey

राजस्थान ने Digital Crop Survey के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर काम किया है।राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार रबी 2025-26 के दौरान राजस्थान में 2.72 करोड़ से अधिक भू-खंडों पर Digital Crop Survey किया गया।Digital Crop Survey का उद्देश्य किसी खेत में बोई गई फसल से संबंधित जानकारी को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करना है।इसके जरिए यह जानकारी व्यवस्थित की जा सकती है कि किसी क्षेत्र में कौन-सी फसल बोई गई है और कृषि भूमि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।यह जानकारी फसल बीमा, कृषि उत्पादन संबंधी आकलन, सरकारी खरीद और कृषि संबंधी दूसरे निर्णयों में उपयोगी हो सकती है।केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर Digital Crop Survey को AgriStack के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित कर रही है।इस तरह Rajasthan Digital Crop Survey 2026 और Farmer ID एक-दूसरे से जुड़े डिजिटल कृषि ढांचे के हिस्से हैं।

Farmer ID से किसानों को क्या फायदे हो सकते हैं?

Farmer ID का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य किसान की प्रमाणित डिजिटल पहचान तैयार करना है।राजस्थान सरकार के कृषि विभाग के अनुसार इसके माध्यम से भविष्य में किसानों को अलग-अलग योजनाओं के लिए एक ही तरह के दस्तावेज बार-बार जमा करने की आवश्यकता कम हो सकती है। साथ ही पात्र किसान की पहचान तेजी से करने और सरकारी सेवाओं को ज्यादा लक्षित ढंग से उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।Rajasthan Kisan ID benefits की बात करें तो Farmer ID का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है, जिनमें PM-Kisan, फसल बीमा, MSP आधारित सरकारी खरीद, कृषि ऋण, उर्वरक वितरण और दूसरी कृषि सेवाएं शामिल हैं।

Farmer ID को भूमि रिकॉर्ड और Crop Registry के साथ जोड़ने से सरकारी सिस्टम के पास किसान की भूमि तथा उस पर बोई गई फसल की सत्यापित डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने का आधार तैयार हो सकता है।इससे पात्रता सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जा सकता है।हालांकि किसान को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब रिकॉर्ड सही हों, तकनीकी सिस्टम आसानी से उपलब्ध हो और गलत जानकारी होने पर उसे ठीक करने के लिए सरल प्रक्रिया मौजूद हो।

फसल बीमा में कैसे उपयोगी हो सकती है Farmer ID?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY में किसान, उसकी फसल और कृषि क्षेत्र की सही जानकारी महत्वपूर्ण होती है।Farmer ID को भूमि रिकॉर्ड और Digital Crop Survey के साथ जोड़ने से फसल और खेत की पहचान से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल बढ़ सकता है।राजस्थान सरकार ने Farmer ID को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के साथ एकीकृत करने की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी है।राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार Digital Agriculture Infrastructure के तहत satellite imagery और technology-based crop yield estimation जैसी प्रणालियों का उपयोग PMFBY में बढ़ा रही है।इसलिए Farmer ID PM Kisan Rajasthan के साथ-साथ फसल बीमा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान बन सकती है।

MSP पर फसल बेचने में भी Farmer ID का उपयोग

राजस्थान में Farmer ID को Minimum Support Price यानी MSP आधारित खरीद व्यवस्था के साथ भी जोड़ा जा रहा है।राजफेड के 2026 किसान पंजीकरण सिस्टम में भी AgriStack Farmer ID का विकल्प दिखाई देता है।इस तरह का एकीकरण किसान की पहचान और कृषि भूमि से जुड़े रिकॉर्ड के सत्यापन में मदद कर सकता है।केंद्र सरकार के अनुसार अन्य राज्यों में भी Farmer ID और Digital Crop Survey का इस्तेमाल MSP खरीद प्रक्रिया में किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर छत्तीसगढ़ में सरकार ने Farmer ID और Digital Crop Survey को धान की MSP खरीद व्यवस्था में शामिल किया है।इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में Farmer ID अलग-अलग राज्यों में सरकारी कृषि खरीद व्यवस्था का महत्वपूर्ण डिजिटल आधार बन सकती है।

उर्वरक वितरण से भी जोड़ी जा रही Farmer ID

राजस्थान सरकार ने Farmer ID को उर्वरक वितरण प्रणाली के साथ एकीकृत करने की दिशा में भी काम किया है।विचार यह है कि सत्यापित भूमि रिकॉर्ड के आधार पर किसान और उसकी कृषि भूमि की पहचान होने से कृषि इनपुट वितरण व्यवस्था को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सके।लेकिन यह प्रक्रिया किस तरह लागू होती है और किसान को कितनी सुविधा मिलती है, इसका मूल्यांकन वास्तविक कार्यान्वयन के आधार पर ही किया जाना चाहिए।डिजिटल व्यवस्था के सफल होने के लिए तकनीकी सिस्टम के साथ ऑफलाइन सहायता की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, खासकर उन किसानों के लिए जिन्हें स्मार्टफोन, इंटरनेट या डिजिटल सेवाओं का नियमित अनुभव नहीं है।केंद्र सरकार ने इसी कारण Common Service Centres, Farmer Producer Organisations और कृषि सखियों जैसे माध्यमों से किसानों के पंजीकरण में मदद की व्यवस्था का उल्लेख किया है।

पूरे भारत में तेजी से बढ़ रही Farmer ID की संख्या

Rajasthan Farmer ID की उपलब्धि को राष्ट्रीय तस्वीर में देखने पर AgriStack के विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार 19 मार्च 2026 तक देशभर में लगभग 9.19 करोड़ Farmer ID बन चुकी थीं। जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 10.18 करोड़ से अधिक पहुंच गया था।

केंद्र सरकार ने 2026-27 तक देश में लगभग 11 करोड़ Farmer ID तैयार करने का लक्ष्य तय किया था।

इस लिहाज से राजस्थान में 90.19 लाख Farmer ID का लक्ष्य पूरा होना भारत में तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल कृषि नेटवर्क का हिस्सा है।

मार्च से सितंबर 2026 तक राजस्थान में Farmer ID की प्रगति

राजस्थान में Farmer ID की प्रगति कुछ ही महीनों में तेजी से आगे बढ़ी।

19 मार्च 2026 को केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में राजस्थान की Farmer ID संख्या करीब 83.39 लाख थी।

20 जुलाई 2026 तक यह बढ़कर करीब 87.23 लाख हो गई।

इसके बाद सितंबर 2026 में राजस्थान सरकार ने केंद्र द्वारा तय 90.19 लाख Farmer ID का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा होने की जानकारी दी।

इस तरह लगभग छह महीने की अवधि में राज्य ने लक्ष्य के शेष हिस्से को पूरा किया।

छूटे किसानों के लिए चलाया गया विशेष अभियान

राजस्थान सरकार ने उन पात्र किसानों को Farmer Registry से जोड़ने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जो पहले पंजीकृत नहीं हो पाए थे।राज्य सरकार के अनुसार 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेशव्यापी Farmer ID अभियान चलाया गया।इसमें म्यूटेशन के समय आधार नंबर लेने, छूटे हुए PM-Kisan लाभार्थियों को SMS के जरिए जानकारी देने और कृषि पर्यवेक्षकों की भागीदारी जैसे कदम शामिल किए गए।इसके अलावा वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र लोगों को व्यवस्था में शामिल करने और AgriStack से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी काम किया गया।अभियान का उद्देश्य केवल निर्धारित संख्या हासिल करना नहीं, बल्कि अभी तक डिजिटल Farmer Registry से बाहर पात्र किसानों को भी इसमें शामिल करना था।

किसान के लिए डिजिटल रिकॉर्ड सही होना क्यों जरूरी?

Farmer ID की उपयोगिता इस बात पर काफी निर्भर करती है कि इससे जुड़े रिकॉर्ड सही और अपडेटेड हों।किसान की जमीन में विरासत, बिक्री, बंटवारा, नाम परिवर्तन या अन्य बदलाव होने पर भूमि रिकॉर्ड को अपडेट रखना जरूरी होगा।केंद्र सरकार के अनुसार भूमि रिकॉर्ड में inheritance और land transactions से संबंधित अपडेट राज्य सरकारों द्वारा किए जाते हैं।यदि Farmer ID भविष्य में सरकारी सहायता, बीमा, खरीद या दूसरी सेवाओं की पात्रता से ज्यादा गहराई से जुड़ती है, तो रिकॉर्ड में गलती होने की स्थिति में शिकायत और सुधार की सरल व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।इसलिए डिजिटल कृषि व्यवस्था की सफलता केवल बड़ी संख्या में ID बनाने से नहीं मापी जा सकती। डेटा की सटीकता, किसान की पहुंच और समस्या समाधान की व्यवस्था भी इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।

डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी भी अहम मुद्दा

Farmer ID, भूमि रिकॉर्ड और फसल संबंधी जानकारी को जोड़ने के साथ डेटा सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।केंद्र सरकार ने फरवरी 2025 में लोकसभा में बताया था कि AgriStack की State Registry को federated architecture पर विकसित किया गया है और संबंधित डेटा का स्वामित्व राज्यों के पास रहता है। सरकार के अनुसार इस सिस्टम को Digital Personal Data Protection Act, 2023 के प्राइवेसी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।व्यवहार में इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि डेटा तक किसे पहुंच मिलती है, किस उद्देश्य से इसका इस्तेमाल किया जाता है और गलत या अनधिकृत उपयोग से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्थाएं किस प्रकार लागू की जाती हैं।Digital Farmer ID का दायरा बढ़ने के साथ डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और किसान के रिकॉर्ड को सुधारने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।

डिजिटल कृषि की ओर राजस्थान का बढ़ता कदम

AgriStack Rajasthan के तहत Farmer ID, Geo-Referencing, Digital Crop Survey, Jan Aadhaar integration और कृषि योजनाओं के बीच डिजिटल कनेक्शन विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।राजस्थान की उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां केवल Farmer ID का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं किया गया, बल्कि दूसरी डिजिटल कृषि व्यवस्थाओं के साथ इसके एकीकरण पर भी काम किया जा रहा है।करीब 83 लाख Farmer ID का Jan Aadhaar से जुड़ना, PM-Kisan के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को Farmer ID से जोड़ना, 99 प्रतिशत गांवों की Geo-Referencing और रबी 2025-26 में 2.72 करोड़ से अधिक भू-खंडों का Digital Crop Survey इसी बड़े डिजिटल ढांचे के अलग-अलग हिस्से हैं।

क्या हर किसान के लिए Farmer ID जरूरी होगी?

Farmer ID का इस्तेमाल केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न कृषि सेवाओं के साथ लगातार बढ़ रहा है। अलग-अलग योजनाओं में इसके उपयोग के नियम और आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं।

इसलिए किसी विशेष योजना के लिए Farmer ID अनिवार्य है या नहीं, इसकी जानकारी संबंधित योजना की वर्तमान आधिकारिक गाइडलाइन के आधार पर ही देखनी चाहिए।किसानों को केवल यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि एक Farmer ID बन जाने से हर कृषि योजना का लाभ अपने आप मिल जाएगा। प्रत्येक योजना में पात्रता की अलग शर्तें हो सकती हैं।Farmer ID का मुख्य काम एक प्रमाणित डिजिटल किसान पहचान और कृषि रिकॉर्ड के बीच संबंध तैयार करना है।

राजस्थान की उपलब्धि का क्या है वास्तविक महत्व?

राजस्थान का 90.19 लाख Farmer ID का लक्ष्य पूरा करना राज्य में डिजिटल कृषि ढांचे के विस्तार का संकेत है। इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राज्य ने केंद्र द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 100 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया और ऐसा करने वाला उत्तर भारत का पहला राज्य बना। साथ ही राजस्थान देश का छठा राज्य है जिसने अपना निर्धारित Farmer ID लक्ष्य पूर्ण किया है।लेकिन इस व्यवस्था की दीर्घकालिक सफलता का आकलन केवल Farmer ID की संख्या से नहीं होगा।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Farmer ID के कारण किसानों के लिए PM-Kisan, फसल बीमा, MSP खरीद, कृषि ऋण, उर्वरक और दूसरी सेवाओं तक पहुंच वास्तव में कितनी सरल होती है।इसके साथ रिकॉर्ड में होने वाली गलतियों के सुधार, तकनीकी समस्याओं, डिजिटल पहुंच और डेटा प्राइवेसी पर भी ध्यान देना होगा।

राजस्थान ने 90.19 लाख Farmer ID का केंद्र द्वारा निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा कर डिजिटल कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। इसके साथ राजस्थान 100 प्रतिशत Farmer ID लक्ष्य पूरा करने वाला उत्तर भारत का पहला और देश का छठा राज्य बन गया है।

मार्च 2026 में राजस्थान में करीब 83.39 लाख Farmer ID थीं और जुलाई तक संख्या लगभग 87.23 लाख पहुंची थी। सितंबर के अंत तक राज्य ने 90.19 लाख का निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिया।  इसके अलावा करीब 83 लाख किसानों की Farmer ID को Jan Aadhaar से जोड़ा गया है, PM-Kisan के लगभग 50 लाख लाभार्थी Farmer ID से जुड़े हैं, कुल बोए गए क्षेत्र के लगभग 62 प्रतिशत हिस्से को इसके दायरे में लाया गया है और 99 प्रतिशत गांवों का Geo-Referencing पूरा किया गया है। रबी 2025-26 में 2.72 करोड़ से अधिक भू-खंडों का Digital Crop Survey भी किया गया।

Rajasthan Farmer ID की यह पहल AgriStack पर आधारित उस व्यापक डिजिटल कृषि व्यवस्था का हिस्सा है जिसमें किसान की पहचान, जमीन और फसल संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि रिकॉर्ड की सटीकता, डेटा सुरक्षा, किसानों की डिजिटल पहुंच और शिकायत समाधान व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो यह ढांचा कृषि योजनाओं और सेवाओं की डिलीवरी को अधिक व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

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