देश में खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसानों के बीच उठ रही चिंताओं के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत के पास वर्तमान खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का स्टॉक मौजूद है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है कि किसानों को यूरिया और डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) जैसी आवश्यक खादें सब्सिडी वाली दरों पर मिलती रहें।
इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय BRICS कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।
चौहान ने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि यूरिया और DAP की कीमतों में कोई असामान्य बढ़ोतरी किसानों तक नहीं पहुंचने दी जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार खुद अतिरिक्त सब्सिडी का भार वहन कर रही है। उन्होंने बताया कि इस फैसले के कारण सरकारी खजाने पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, लेकिन किसानों की जरूरतों को देखते हुए सरकार यह खर्च उठाने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वर्तमान खरीफ सीजन के साथ-साथ आगामी रबी सीजन के लिए भी उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार विभिन्न स्रोतों से उर्वरकों की आपूर्ति बनाए रखने और आयात व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके अलावा राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर वितरण प्रणाली को भी प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी क्षेत्र में उर्वरकों की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो।
BRICS कृषि बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि सदस्य देशों के बीच कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और समाधानों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। विशेष रूप से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। इन योजनाओं का लक्ष्य किसानों की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और कृषि को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
बैठक में जलवायु परिवर्तन और उससे कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा हुई। इसी संदर्भ में जब कृषि मंत्री से संभावित एल नीनो प्रभाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने बताया कि एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसका असर भारत सहित दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है। इससे वर्षा के पैटर्न में बदलाव आने और कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। हालांकि भारत सरकार ने संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही आवश्यक तैयारियां कर ली हैं।
चौहान ने कहा कि सरकार मौसम संबंधी आंकड़ों की लगातार निगरानी कर रही है और किसानों को समय पर सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। साथ ही जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन और फसल सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को भी मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अन्य देशों के साथ जानकारी, तकनीक और सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं का आदान-प्रदान करेगा ताकि जलवायु संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। BRICS देशों के बीच सहयोग से कृषि क्षेत्र में नवाचार और टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर कृषि मंत्री का यह बयान किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। उर्वरकों की उपलब्धता, सब्सिडी का निरंतर लाभ और एल नीनो जैसी संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को लेकर सरकार का यह आश्वासन कृषि क्षेत्र में विश्वास बढ़ाने का काम करेगा। आने वाले खरीफ और रबी सीजन में किसानों को आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

