देश में खरीफ सीजन की प्रगति, दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति, एल नीनो के संभावित प्रभाव, वर्षा की कमी वाले जिलों, किसानों के लिए उर्वरकों एवं बीजों की उपलब्धता तथा खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित न हो और यदि मानसून पर एल नीनो का असर पड़ता है तो किसानों को समय रहते वैकल्पिक कृषि रणनीतियां उपलब्ध कराई जा सकें। कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार प्रत्येक जिले की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तैयारी के साथ कार्य कर रही है।
खरीफ बुवाई की गति धीमी, लेकिन अगले कुछ दिनों में सुधार की उम्मीद
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि देश के कई हिस्सों में अब तक सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई अपेक्षित गति से नहीं हो सकी है। हालांकि मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार अगले तीन दिनों के दौरान गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सहित कई राज्यों में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो खरीफ बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने बताया कि किसानों ने कई क्षेत्रों में वर्षा की प्रतीक्षा में बुवाई को फिलहाल टाल रखा है। पर्याप्त वर्षा होते ही धान, मक्का, बाजरा, कपास, सोयाबीन, मूंगफली, दालें और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से शुरू हो जाएगी। कृषि मंत्रालय ने राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों को आवश्यक सलाह जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
एल नीनो के संभावित प्रभाव पर लगातार निगरानी
बैठक में दक्षिण-पश्चिम मानसून पर एल नीनो के संभावित प्रभाव का भी विस्तृत आकलन किया गया। अधिकारियों ने बताया कि नवीनतम जलवायु मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि एल नीनो का प्रभाव आने वाले समय में मानसून की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण कृषि मंत्रालय ने मौसम संबंधी प्रत्येक बदलाव पर लगातार नजर रखने और समय-समय पर राज्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की व्यवस्था की है।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसी परिस्थितियां कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती अवश्य हैं, लेकिन वैज्ञानिक योजना, समयबद्ध निर्णय और किसानों तक त्वरित जानकारी पहुंचाकर इन चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम संबंधी सभी सूचनाएं राज्यों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से तुरंत किसानों तक पहुंचाई जाएं।
262 संवेदनशील जिलों की निगरानी, 15 नए प्रभावित जिले चिन्हित
बैठक में बताया गया कि कृषि मंत्रालय ने देशभर के 262 संवेदनशील जिलों की पहचान पहले ही कर ली है, जहां मानसून की स्थिति और वर्षा वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है। इन जिलों में वर्षा की मात्रा, मिट्टी में नमी, फसलों की स्थिति और जल संसाधनों का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है।
इसके अलावा हालिया आंकड़ों के आधार पर 15 अतिरिक्त जिलों की भी पहचान की गई है, जहां सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इन जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसलें, कम अवधि वाली किस्में तथा अन्य कृषि उपाय अपनाने की सलाह दी जाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसी भी जिले में यदि सूखे जैसी स्थिति बनने की संभावना दिखाई देती है तो वहां तुरंत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि किसानों को नुकसान कम से कम हो।
कॉन्टिंजेंसी प्लान के क्रियान्वयन पर विशेष जोर
बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) द्वारा तैयार किए गए कॉन्टिंजेंसी प्लान की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि सभी राज्यों के लिए जिला स्तर पर वैकल्पिक कृषि योजनाएं पहले से तैयार हैं।
इन योजनाओं में कम वर्षा की स्थिति में कौन-सी फसलें बोई जाएं, किस प्रकार की किस्मों का चयन किया जाए, सिंचाई प्रबंधन कैसे किया जाए तथा उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कैसे हो, जैसी रणनीतियां शामिल हैं।
मंत्रालय ने राज्यों के साथ लगातार बैठकें आयोजित कर इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन राज्यों के साथ अभी बैठक नहीं हुई है, वहां भी शीघ्र समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
कृषि विज्ञान केंद्रों को किया गया अलर्ट
बैठक में देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। मंत्रालय ने सभी केवीके को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल तकनीकी सलाह उपलब्ध कराएं।
केवीके को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे फसल विविधीकरण, वैकल्पिक फसलों, जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन तथा उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में किसानों को जागरूक करें। यदि किसी क्षेत्र में वर्षा में और देरी होती है तो स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों को वैज्ञानिक सलाह दी जाएगी।
बीजों की पर्याप्त उपलब्धता, राष्ट्रीय बीज निगम कर रहा नियमित निगरानी
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए बीजों की उपलब्धता पूरी तरह संतोषजनक है। राष्ट्रीय बीज निगम निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप बीज भंडार की नियमित निगरानी कर रहा है और राज्यों को आवश्यकता के अनुसार बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी राज्य में बीज की कमी की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। यदि कहीं अतिरिक्त मांग आती है तो उसकी पूर्ति समय पर सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों की बुवाई प्रभावित न हो।
उर्वरकों की उपलब्धता पर भी हुई समीक्षा
बैठक में खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि देश में उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और राज्यों के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम कमी या कालाबाजारी जैसी स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए तथा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रखी जाए।
जलाशयों में कम जल, लेकिन भूजल की स्थिति स्थिर
बैठक में देश के जल संसाधनों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में इस समय पिछले वर्ष की तुलना में जल भंडारण कम है। हालांकि राहत की बात यह है कि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो जलाशयों का जलस्तर तेजी से सुधर सकता है। कृषि मंत्री ने जल संरक्षण उपायों को और मजबूत करने तथा उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया।
मंडी भाव और खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की भी समीक्षा
बैठक में कृषि उपज मंडियों में प्रमुख फसलों के साप्ताहिक भावों की समीक्षा भी की गई। साथ ही देश में खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने आवश्यक जानकारी प्रस्तुत की।
कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और बाजार व्यवस्था पर निरंतर निगरानी रखी जाए। उन्होंने खाद्यान्न भंडारण प्रणाली को मजबूत बनाए रखने तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त भंडारण क्षमता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
किसानों के हित सर्वोपरि
बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बदलते जलवायु परिदृश्य और मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए वैज्ञानिक संस्थानों, राज्य सरकारों और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्येक परिस्थिति के लिए अग्रिम तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय केवल मौसम की निगरानी ही नहीं कर रहा, बल्कि जिला स्तर तक स्थिति का विश्लेषण कर समयबद्ध निर्णय भी ले रहा है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, वैज्ञानिक सलाह और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि आगामी दिनों में मानसून सामान्य रहता है तो खरीफ सीजन की बुवाई में तेजी आएगी और देश का कृषि उत्पादन मजबूत रहेगा।
कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर वर्षा, वैज्ञानिक सलाह, प्रभावी कॉन्टिंजेंसी प्लान और केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से एल नीनो जैसी चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह खरीफ सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे और कृषि मंत्रालय की सक्रिय निगरानी किसानों के लिए राहत का आधार बन सकती है।

