देश में खरीफ 2026 सीज़न की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात व्यवस्था को मजबूत बनाने की रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को बुआई के महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी का सामना न करना पड़े।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, फर्टिलाइज़र्स विभाग ने इस बार बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। इसमें घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों से समय रहते उर्वरकों की खरीद सुनिश्चित की गई है। मंत्रालय का कहना है कि यह रणनीति किसानों को संभावित आपूर्ति बाधाओं से बचाने और देश में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक एम्पावर्ड पूल मैनेजमेंट कमेटी (EPMC) के माध्यम से अतिरिक्त प्राकृतिक गैस की सफल खरीद रही है। सरकार ने स्पॉट मार्केट से 7.31 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (MMSCMD) अतिरिक्त गैस हासिल की है। इसके परिणामस्वरूप यूरिया संयंत्रों को मिलने वाली कुल गैस आपूर्ति 32 MMSCMD से बढ़कर 39.31 MMSCMD हो गई है।
गैस आपूर्ति बढ़ने का सीधा असर यूरिया उत्पादन पर पड़ा है। पहले जहां देश में प्रतिदिन लगभग 54,500 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हो रहा था, वहीं अब यह बढ़कर 67,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है। यानी घरेलू उत्पादन में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी किसानों की मांग पूरी करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार, इस अतिरिक्त गैस आपूर्ति से उर्वरक उद्योग की आवश्यकताओं की पूर्ति का स्तर भी बढ़ा है। पहले गैस की उपलब्धता कुल जरूरत का लगभग 62 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 76 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया अधिक स्थिर और भरोसेमंद भी बनी है।
सरकार ने खरीफ सीज़न से पहले उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण पर भी विशेष ध्यान दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 19 मार्च तक देश में यूरिया का कुल स्टॉक 61.14 लाख मीट्रिक टन था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 55.22 लाख मीट्रिक टन था। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार ने समय रहते भंडारण बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए हैं।
डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) के मामले में स्थिति और भी बेहतर दिखाई दे रही है। DAP का स्टॉक एक वर्ष में दोगुने से अधिक बढ़कर 24.24 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इसके अलावा NPK और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) जैसे अन्य प्रमुख उर्वरकों का भंडार भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। इससे किसानों को विभिन्न फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सरकार ने आयात व्यवस्था को भी मजबूत किया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में संभावित व्यवधानों को देखते हुए काफी पहले से अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी किए गए। इसके अलावा उर्वरकों की खरीद के स्रोतों में विविधता लाई गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश आयातित उर्वरक खेपें मार्च के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी स्पष्ट किया है कि भारत के पास वर्तमान में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार कई सप्लायर देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और किसी भी संभावित संकट का सामना प्रभावी ढंग से किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि, पर्याप्त भंडारण और समय पर आयात की संयुक्त रणनीति किसानों के लिए राहत लेकर आएगी। इससे खरीफ सीज़न के दौरान खाद की कमी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी और किसानों को बुवाई तथा फसल प्रबंधन के लिए आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध हो सकेंगे।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की सक्रिय तैयारी और बहुआयामी रणनीति ने खरीफ 2026 सीज़न से पहले देश की उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया है। बढ़ा हुआ यूरिया उत्पादन, पर्याप्त स्टॉक और सुरक्षित आयात व्यवस्था न केवल किसानों के हितों की रक्षा करेगी बल्कि कृषि उत्पादन को भी स्थिर और मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

