BuffaloCare: पशुपालन में मुनाफा बढ़ाने के लिए गर्भवती गाय-भैंस की सही देखभाल बेहद जरूरी मानी जाती है। एनिमल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ सामान्य देखभाल ही नहीं, बल्कि सही खानपान और बेहतर शेड मैनेजमेंट भी उतना ही अहम है। अगर गर्भकाल के दौरान पशु को संतुलित आहार और आरामदायक माहौल मिलता है, तो इससे न सिर्फ स्वस्थ बछड़ा पैदा होता है बल्कि दूध उत्पादन भी बेहतर होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भैंस के गर्भवती होने की पहचान करना भी जरूरी है। आमतौर पर भैंस हर 21 दिन में हीट में आती है। यदि वह दोबारा हीट में नहीं आती, तो यह संकेत होता है कि वह गर्भवती हो चुकी है। ऐसे में उसी समय से उसकी विशेष देखभाल शुरू कर देनी चाहिए। सही समय पर देखभाल से पशु का दुग्धकाल समय पर शुरू होता है और पशुपालक को आर्थिक लाभ मिलता है।
गर्भकाल (Animal Husbandry) के दौरान खानपान में की गई छोटी-सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि भैंस को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो पैदा होने वाला बच्चा कमजोर या अंधा हो सकता है। इतना ही नहीं, बच्चा देने के बाद भैंस को मिल्क फीवर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है। कई मामलों में भैंस में “फूल दिखना”, जेर का रुक जाना और बच्चेदानी में संक्रमण (मवाद) जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
इसी तरह गर्भवती पशु के लिए सही शेड तैयार करना भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भ के आठवें महीने के बाद भैंस को अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए, ताकि उसे आराम मिल सके और किसी तरह की चोट या तनाव से बचाया जा सके। पशु का बाड़ा साफ-सुथरा, समतल और फिसलन रहित होना चाहिए, जिससे गिरने का खतरा न रहे।
इसके अलावा शेड हवादार होना चाहिए और उसे मौसम की मार—जैसे तेज गर्मी, ठंड और बारिश—से सुरक्षित रखना चाहिए। फर्श कच्चा और सूखा होना चाहिए, जिसमें नमी या सीलन न हो, क्योंकि इससे बीमारियों का खतरा बढ़ता है। साथ ही, भैंस के लिए हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
अगर पशुपालक इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो उन्हें बेहतर दूध उत्पादन के साथ-साथ स्वस्थ बछड़ा भी मिलता है। इससे न केवल पशुपालन की लागत कम होती है, बल्कि आय में भी बढ़ोतरी होती है। गर्भवती पशुओं की सही देखभाल ही सफल डेयरी व्यवसाय की कुंजी है।

