राजस्थान में गेहूं खरीद को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है, जिससे किसानों के बीच नाराज़गी बढ़ गई है। राज्य सरकार द्वारा गेहूं खरीद की समय-सीमा में कटौती किए जाने के फैसले ने किसानों को चिंता में डाल दिया है। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उन्हें अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और इसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ेगा।
दरअसल, पहले जहां किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलता था, वहीं अब खरीद की अवधि सीमित कर दी गई है। इस बदलाव का असर खासतौर पर उन किसानों पर ज्यादा पड़ रहा है, जिनकी फसल देर से तैयार होती है या जिनके पास परिवहन की सीमित सुविधाएं हैं। कई किसानों का कहना है कि वे पहले ही मौसम की मार और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं, ऐसे में खरीद अवधि घटाना उनके लिए दोहरी मार जैसा है।
किसान संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की वास्तविक स्थिति को समझना चाहिए और खरीद प्रक्रिया को और आसान बनाना चाहिए, न कि मुश्किल। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो वे राज्यभर में आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
किसानों की एक बड़ी चिंता यह भी है कि सीमित समय में सभी किसानों की उपज की खरीद संभव नहीं हो पाएगी। इससे उन्हें अपनी फसल खुले बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ सकती है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन समय-सीमा घटाने से यह उद्देश्य अधूरा रह सकता है।
वहीं, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और भंडारण क्षमता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। उनका दावा है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इंतजाम भी किए जाएंगे। हालांकि, जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याएं कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को किसानों और उनके संगठनों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए, ताकि इस तरह के फैसलों का संतुलित समाधान निकाला जा सके। अगर समय रहते इस मुद्दे का हल नहीं निकला, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल, राजस्थान में गेहूं खरीद को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस पर सरकार का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

