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Home कृषि समाचार

चीनी एक्सपोर्ट पर भारत की रोक, घरेलू कीमतों को काबू में रखने का प्रयास

भारत ने पहले चीनी मिलों को 1.59 मिलियन मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। सरकार ने यह अनुमति इस उम्मीद में दी थी कि देश में चीनी उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा

Vipin Mishra by Vipin Mishra
May 16, 2026
in कृषि समाचार
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चीनी एक्सपोर्ट पर भारत की रोक, घरेलू कीमतों को काबू में रखने का प्रयास
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New Delhi: भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। इस फैसले का असर वैश्विक चीनी बाजार पर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और ब्राज़ील के बाद सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों को समर्थन मिलेगा। वहीं ब्राज़ील और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को एशिया और अफ्रीका के खरीदारों को अधिक मात्रा में चीनी निर्यात करने का मौका मिल सकता है।

भारत ने पहले चीनी मिलों को 1.59 मिलियन मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। सरकार ने यह अनुमति इस उम्मीद में दी थी कि देश में चीनी उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा। लेकिन अब लगातार दूसरे साल उत्पादन खपत से कम रहने की संभावना जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कमजोर पैदावार माना जा रहा है।

इसके अलावा इस वर्ष एल नीनो मौसमीय परिस्थितियों के कारण मॉनसून प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मॉनसून कमजोर रहता है तो अगले सीजन में गन्ने का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम हो सकता है। इससे चीनी उत्पादन पर और दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडर्स के मुताबिक, सरकार द्वारा मंजूर किए गए 1.59 मिलियन मीट्रिक टन निर्यात कोटे में से लगभग 8 लाख टन चीनी के लिए निर्यात अनुबंध किए जा चुके हैं। इनमें से 6 लाख टन से अधिक चीनी की शिपमेंट भी हो चुकी है। हालांकि अब नए निर्यात प्रतिबंध के चलते बाकी ऑर्डर पूरे करना व्यापारियों के लिए चुनौती बन सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कच्ची और सफेद दोनों प्रकार की चीनी के निर्यात पर रोक रहेगी। हालांकि कुछ शिपमेंट्स को राहत दी गई है। जिन खेपों की लोडिंग सरकारी नोटिफिकेशन जारी होने से पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा जिन मामलों में शिपिंग बिल पहले ही फाइल हो चुका है और जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुका है, लंगर डाल चुका है या खड़ा है, उन्हें भी निर्यात की मंजूरी मिलेगी।

सरकार ने यह भी कहा कि यदि नोटिफिकेशन जारी होने से पहले चीनी को कस्टम अथॉरिटी या कस्टोडियन को सौंप दिया गया था, तो ऐसी खेपों को भी निर्यात के लिए क्लियर किया जाएगा। इससे उन व्यापारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है जिन्होंने पहले से निर्यात सौदे कर रखे थे।

मुंबई स्थित एक ग्लोबल ट्रेडिंग हाउस के डीलर ने कहा कि फरवरी में सरकार द्वारा अतिरिक्त निर्यात कोटा दिए जाने के बाद व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर निर्यात सौदे किए थे। लेकिन अब अचानक लगाए गए प्रतिबंध से निर्यात ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो सकता है।

भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजारों में तुरंत दिखाई दिया। खबर आने के बाद न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जबकि लंदन व्हाइट शुगर फ्यूचर्स लगभग 3 प्रतिशत तक चढ़ गए। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार भारत के निर्यात रुकने से सप्लाई घटने की आशंका देख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। आने वाले महीनों में मॉनसून की स्थिति और गन्ना उत्पादन के आंकड़े यह तय करेंगे कि भारत भविष्य में चीनी निर्यात नीति में कोई बदलाव करता है या नहीं।

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