गर्मियों का मौसम मछली पालकों (FishFarming) के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता. तेज धूप, गर्म पानी और ऑक्सीजन की कमी के कारण तालाबों में मछलियों की गतिविधियां बदल जाती हैं. यही वजह है कि कई बार एक ही तालाब में पाली गई मछलियों का वजन अलग-अलग बढ़ता है. कुछ मछलियां तेजी से ग्रोथ करती हैं, जबकि कुछ कमजोर रह जाती हैं. फिशरीज एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण तालाब में फिश फीड का बराबर तरीके से न पहुंच पाना है. अब इस समस्या का समाधान आधुनिक तकनीक और ड्रोन फीडिंग सिस्टम के जरिए संभव माना जा रहा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों में पानी का तापमान बढ़ने से मछलियां तालाब के अलग-अलग हिस्सों में चली जाती हैं. ऐसे में अगर मछली पालक हाथ से तालाब के किनारे पर ही दाना डालते हैं तो सभी मछलियों तक बराबर मात्रा में फीड नहीं पहुंचती. इससे कुछ मछलियां ज्यादा दाना खा लेती हैं और कुछ को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. परिणामस्वरूप वजन में असमानता देखने को मिलती है.
फिशरीज एक्सपर्ट्स का कहना है कि ड्रोन के जरिए तालाब के हर हिस्से में एक साथ फीड डाला जा सकता है. इससे तालाब के बीच, सतह और तली में रहने वाली सभी मछलियों को उनकी जरूरत के हिसाब से दाना मिल जाता है. यही वजह है कि अब कई राज्यों में टेक्नोलॉजी आधारित फिश फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है.
रोहू मछली की बात करें तो यह उत्तर भारत की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मछलियों में शामिल है. इसका मीट नरम और स्वादिष्ट होता है, इसलिए यूपी, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में इसकी भारी मांग रहती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि रोहू तालाब की सतह और तली के बीच वाले हिस्से में रहकर दाना खाती है. इसलिए जरूरी है कि फीड तालाब के मध्य स्तर तक पहुंचे.
वहीं नैनी यानी नरेन मछली का व्यवहार इससे अलग होता है. यह मछली ज्यादातर तालाब की तली में रहना पसंद करती है और वहीं दाने का इंतजार करती है. अगर फीड केवल सतह पर डाला जाए तो नैनी को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता. ऐसे में उसकी ग्रोथ प्रभावित होती है.
कतला मछली का स्वभाव भी अलग है. यह मछली पानी की सतह के करीब रहकर भोजन करती है. बाजार में एक से डेढ़ किलो वजन की कतला की काफी मांग रहती है. फिश फ्राई और होटल इंडस्ट्री में भी कतला का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है. इसलिए सतह पर पर्याप्त मात्रा में फीड पहुंचाना जरूरी माना जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मछली पालक तालाब की तीनों लेयर—सतह, मध्य और तली—को ध्यान में रखकर फीडिंग करें तो मछलियों की ग्रोथ तेजी से बढ़ सकती है. ड्रोन आधारित फीडिंग सिस्टम से न केवल दाने की बर्बादी कम होगी, बल्कि उत्पादन और मुनाफा भी बढ़ेगा. आने वाले समय में स्मार्ट फिश फार्मिंग भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है.

